लाइव टीवी
Elec-widget

श्रम कानून में बदलाव करने जा रही है मोदी सरकार, हड़ताल से 14 दिन पहले देना होगा नोटिस

भाषा
Updated: November 27, 2019, 7:38 PM IST
श्रम कानून में बदलाव करने जा रही है मोदी सरकार, हड़ताल से 14 दिन पहले देना होगा नोटिस
श्रम कानून में कई बड़े बदलाव करेगी मोदी सरकार (प्रतीकात्मक तस्वीर)

राज्यसभा (Rajyasabh) में सवालों का जवाब देते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार (Santosh Gangwar) ने बताया कि श्रम कानूनों में बदलाव कर हड़ताल से 14 दिन पहले नोटिस देने का प्रावधान शामिल किया जाएगा.

  • Share this:
नई दिल्ली. अदालती आदेशों और अन्य आपात स्थितियों के कारण विकास परियोजनाओं (Development Projects) का काम रुकने पर मजदूरों (Labours) की रोजमर्रा की आजीविका प्रभावित होने बचाने से जुड़े पूरक प्रश्न के जवाब में गंगवार ने कहा कि अचानक कामबंदी के कारण श्रमिकों का जीवन यापन प्रभावित न हो, इसके लिये सरकार श्रम कानूनों (Labour Law) में बदलाव कर हड़ताल का 14 पूर्व नोटिस देने जैसे प्रावधान शामिल करेगी. अभी हड़ताल से एक दिन पहले नोटिस देने का प्रावधान है.

98 प्रतिशत मांगों का समाधान
सरकार ने अगले साल आठ जनवरी से विभिन्न श्रम संगठनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल आयोजित करने की औपचारिक सूचना मिलने से इंकार करते हुये कहा है कि सरकार श्रमिकों और श्रम संगठनों (Labour Union) की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है और 98 प्रतिशत मांगों का समाधान कराया है.

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार (Santosh Gangwar) ने बुधवार को राज्यसभा (Rajyasabha) में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि पिछले तीन साल में मंत्रालय को श्रमिकों की जितनी भी मांगे मिली उनमें 95 से 98 प्रतिशत का समाधान कर हड़ताल नहीं होने दी.

ये भी पढ़ें: प्याज सस्ती करने के लिए सरकार ने उठाया एक और कदम, राज्यों को दिया ये आदेश

गंभीरता से कार्रवाई कर रहा मंत्रालय
Loading...

आठ जनवरी से देशव्यापी हड़ताल की जानकारी होने और श्रमिकों की मांगों पर विचार करने से जुड़े सवाल के जवाब में गंगवार ने कहा कि मंत्रालय को इस हड़ताल के बारे में कोई नोटिस नहीं मिला है. अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के आधार पर मंत्रालय गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतना ही कह सकता हूं कि पिछले तीन सालों में श्रमिकों की जितनी भी शिकायतें मिली हैं उनमें से 95 से 98 प्रतिशत का समाधान कर श्रमिको को हड़ताल पर जाने का मौका नहीं दिया गया है.’’

कामगारों और उद्योग जगत के बीच सामंजस्य कायम करने के सबसे बड़े फोरम के रूप में अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं होने के पूरक प्रश्न के जवाब में गंगवार ने कहा, ‘‘आईएलसी की बैठक जल्द ही आहूत की जा रही है.’’

ये भी पढ़ें: आर्थिक ग्रोथ भले ही कम लेकिन मंदी जैसे हालात नहीं: निर्मला सीतारमण

देश में कुल 10 करोड़ प्रवासी मजदूर
दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले श्रमिकों को जीवन यापन की मूलभूत सुविधायें नहीं मिल पाने की वजह कानून की अपर्याप्त शक्तियों से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में गंगवार ने कहा कि देश में कुल श्रमिकों में लगभग 10 करोड़ (20 प्रतिशत) प्रवासी मजदूर हैं.

प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा
उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम 1979 में बदलते दौर की परिस्थितियों के मुताबिक बदलाव की जानकारी देते हुये बताया कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को चार संहिता में बदलने की पहल की है. इनमें प्रवासी कामगारों के अधिकारों और सुविधाओं के प्रावधान किये जायेंगे.

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में आपात स्थिति में अचानक मजदूरी बंद होने पर कामगारों केा एक महीने की मजदूरी के भुगतान किया जाता है.

मुद्रा योजना के तहत लक्ष्य से अधिक कर्ज बांटा गया
मुद्रा योजना के तहत छोटे और मझोले कारोबारियों को मिली सहायता से जुड़े एक सवाल के जवाब में गंगवार ने बताया कि इस योजना में लक्ष्य से ज्यादा लोगों को ऋण मुहैया कराया गया है. इनमें महिलाओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पर्याप्त संख्या में शामिल किया गया है.

ये भी पढ़ें: ये बैंक दे रहा ‘SMART EMI’ पर कार लोन, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस का खर्च हो जाएगा फ्री

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 27, 2019, 7:33 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...