बड़ी खबर- एक साल में सरकारी बैंकों में ग्राहकों के साथ हुई 1.48 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी

बड़ी खबर- एक साल में सरकारी बैंकों में ग्राहकों के साथ हुई 1.48 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी
आरटीआई, (सूचना के अधिकार) से बैंक फ्रॉड का खुलासा हुआ है.

आरटीआई (RTI-Right to Information Act) से मिले आंकड़ों पर गौर करें, तो पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक क्षेत्र (Government Banks) के तत्कालीन 18 बैंकों द्वारा कुल 1,48,428 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 12,461 मामले सूचित किये गये हैं.

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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI-Reserve Bank of India) की ओर से दी गई जानकारी से पता चला हैं कि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में तत्कालीन 18 सरकारी बैंकों द्वारा कुल 1,48,428 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 12,461 मामले सूचित किये गये हैं. आरटीआई, सूचना के अधिकार (RTI-Right to Information Act) कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को बताया कि आरबीआई ने उन्हें आरटीआई के तहत यह जानकारी दी है.रिजर्व बैंक की ओर से आरटीआई के तहत मुहैया करायी गयी जानकारी में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों की प्रकृति और छल के शिकार तत्कालीन 18 सरकारी बैंकों या उनके ग्राहकों को हुए नुकसान का विशिष्ट ब्योरा नहीं दिया गया है. गौरतलब है कि गुजरे बरसों में सिलसिलेवार एकीकरण के बाद देश में सरकारी क्षेत्र के बैंकों की संख्या फिलहाल 12 रह गयी है.

किस बैंक में हुई सबसे ज्यादा धोखाधड़ी-आरटीआई से मिले आंकड़ों पर गौर करें, तो बीते वित्त वर्ष में धोखाधड़ी का सबसे बड़ा शिकार सरकारी क्षेत्र का शीर्ष बैंक एसबीआई यानी भारतीय स्टेट बैंक (SBI-State Bank of India) बना है. इस अवधि के दौरान एसबीआई में 44,612.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े 6,964 मामले सूचित किये गए. यह रकम बीते वित्त वर्ष के दौरान 18 सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी की जद में आयी कुल धनराशि का करीब 30 फीसदी है.

आरबीआई ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक द्वारा एक अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 की अवधि में धोखाधड़ी के 395 मामले सूचित किये गये जिसमें 15,354 करोड़ रुपये की रकम शामिल है. इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर बैंक ऑफ बड़ौदा रहा जिसमें 349 मामलों के साथ 12,586.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आयी. आपको बता दें कि बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय एक अप्रैल, 2019 से अमल में आया था.



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अवधि के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 424 मामलों में 9,316.80 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया ने 200 मामलों में 8,069.14 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 208 मामलों में 7,519.30 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 207 मामलों में 7,275.48 करोड़ रुपये, इलाहाबाद बैंक ने 896 मामलों में 6,973.90 करोड़ रुपये और यूको बैंक ने 119 मामलों में 5,384.53 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी.

रिजर्व बैंक ने सूचना के अधिकार के तहत बताया कि एक अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 की अवधि में ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने 329 मामलों में 5,340.87 करोड़ रुपये, सिंडिकेट बैंक ने 438 मामलों में 4,999.03 करोड़ रुपये, कॉरपोशन बैंक ने 125 मामलों में 4,816.60 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 900 मामलों में 3,993.82 करोड़ रुपये, आंध्रा बैंक ने 115 मामलों में 3,462.32 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 413 मामलों में 3,391.13 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने 87 मामलों में 2,679.72 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक ने 225 मामलों में 2,254.11 करोड़ रुपये और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 67 मामलों में 397. 28 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी दी.
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