भारत घटाएगा सऊदी अरब से तेल आयात! ऊर्जा के दूसरे विकल्पाें पर तेजी से काम कर रही मोदी सरकार

सऊदी में तेल कंपनी पर हुए हमले के बाद कच्चे तेल के दाम सालभर के सर्वाेच्च स्तर पर 71 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया.

सऊदी में तेल कंपनी पर हुए हमले के बाद कच्चे तेल के दाम सालभर के सर्वाेच्च स्तर पर 71 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी (PM Narendra Modi) ने कहा था कि भारत 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का 40 प्रतिशत नवीकरण स्रोतों से उत्पादन करने लगेगा. भारत ने 2019-20 में अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत तेल, 53 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का आयात किया था.

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नई दिल्ली. सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति पर लगाम लगाने के लिए भारत अपने पास माैजूद कच्चे स्त्राेत में विविधता लाने और वैकल्पिक ऊर्जा काे आगे बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. वैसे भी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत अरब देशों पर निर्भरता कम करने की पहले से ही कोशिश कर रहा है. भारत ने बीते 5 साल में अमेरिकी तेल का आयात 0.5 फीसदी बढ़ाकर कुल 6 फीसदी कर लिया है. यह बात हिंदुस्तान पेट्राेलियम कॉरपाेरेशन के चेयरमेन कुमार सुराणा ने एक निजी चैनल काे दिए इंटरव्यू में कही.



केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान लगातार तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) तथा अन्य देशों से  कच्चे तेल के उत्पादन पर लागू प्रतिबंधों को उठाने दाम स्थिर रखने के वादे को पूरा करने का आग्रह कर रहे है. इससे पिछले सप्ताह सऊदी अरब और रूस के प्रभुत्व वाले गठबंधन ने उत्पादन स्थिर रखने का फैसला किया. सऊदी में तेल कंपनी पर साेमवार काे हुए हमले के बाद कच्चे तेल के दाम सालभर के सर्वाेच्च स्तर 71 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गए.



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सुराणा ने कहा कि ऊंची कीमतें कमाेडिटी के रूप में तेल के भविष्य काे और अधिक नुकसानदायक बनाती है. यह लाेगाें काे ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक संसाधनाें की तलाश करने के लिए भी प्रेरित करती है. वे मानते है कि भारत 50 से 60 डॉलर प्रति बैरल की सीमा तक मिलने वाले तेल काे खरीदना ज्यादा पसंद करेगा. सरकारी आकड़ों के अनुसार करीब 86 प्रतिशत भारतीय तेल ओपेक सदस्य देशाें से लिया गया. जिसमें साऊदी अरब से आने वाला तेल 19 प्रतिशत था. सुराना ने कहा कि भारतीय रिफाइनर तेल बाजार में ईरान के संभावित पुन प्रवेश काे देख रहे है. ते के ऊंचे दामाें से ऊर्जा के स्वच्छ स्त्राेताें के लिए भारत के और अधिक प्राेत्साहन मिलने की संभावना है.

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पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने कहा था भारत 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा का 40 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन करने लगेगा.  'भारत ने 2019-20 में अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत तेल, 53 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का आयात किया था. ' पीएम ने कहा कि अब देश ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करने पर ध्यान दे रहा है. ब्रेंट ऑयल की कीमतों में इस साल अब तक 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है. इससे ईंधन की घरेलू मांग पर काफी बुरा असर पड़ा है. वहीं, कच्‍चे तेल की ऊंची दरों के कारण भारत के सामने 1950 के बाद सबसे बुरी मंदी का खतरा मंडराने लगा है. सुराणा ने कहा ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति काे बढ़ाती है और यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है.

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