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कोरोना में जीवन साथी की मौत होने पर इस तरह से वित्तीय प्रबंधन कर फिर से संवारें अपनी जिंदगी

केंद्र सरकार छोटे कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद कर रही है.

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Investment Tips : पति के पास कोई जीवन बीमा पॉलिसी हो तो क्लेम करने में देर नहीं करें

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    नई दिल्ली. कोरोना महामारी ने हमारे कई करीबियों को हमसे छीन लिया. परिवार के परिवार तबाह हो गए. मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. कुछ ऐसे परिवार भी जिनमें मुखिया की मौत हो गई. लेकिन जिंदगी लगातार चलती रहती है. लिहाजा, कुछ वित्तीय उपाय (Financial Management in Corona)अपनाकर हम भी अपनी जिंदगी को फिर से संवार सकते हैं.
    ऐसी कठिन चुनौती का सामना कर रहे लोगों को सभी जरूरी वित्तीय दस्तावेज सहेजने होंगे. पत्नी को पति की संपत्ति, देनदारी ( Liability), बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) तथा बैंक खातों की स्थिति जाननी होगी. सीए हरिगोपाल पाटीदार ने न्यूज18 को बताया कि ऐसे परिवारों को महीने भर के भीतर ही संपत्ति और देनदारियों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए. पति के पास कोई जीवन बीमा पॉलिसी हो तो दावा करने में देर नहीं करें. आपको परिसंपत्तियां भी अपने नाम करानी होंगी.
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    शेयरों से निवेश निकाल कर म्युचुअल फंडों में लगाने पर विचार करें
    अगर आपके परिवार में एक ही कमाऊ सदस्य रह गया है तो जोखिम लेने की क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है. लिहाजा, आपकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाएंगी और अपने निवेश पर नजर रखने के लिए आपके पास समय भी नहीं बचेगा. ऐसे में शेयरों से निवेश निकाल कर म्युचुअल फंडों में लगाने पर विचार करें. केवल डेट फंडों में ही सारी रकम लगाने की जरूरत नहीं है. यदि पर्याप्त रकम है और आय अच्छी है तो थोड़ा अधिक आक्रामक लेकिन सतर्क दांव खेल सकते हैं. यानी दीर्घ अवधि के लिए शेयरों में निवेश कर सकते हैं.
    बैंक से कर्ज पुनर्गठन पर बात करें
    अगर कोई बैंक या वित्त संस्थान कर्ज चुकाने के लिए कहते हैं तो अपने पास मौजूद कागजात पर नजर जरूर डालें. इससे पता चल जाएगा कि उनके दावे सही हैं या नहीं. आपने कर्ज में गारंटी ली थी, सह-आवेदक थे या कानूनी वारिस हैं तो बैंक या वित्तीय संस्थान गिरवी रखी परिसंपत्तियां या जमानत के तौर पर ली गई रकम से ऋण वसूलेंगे या आपसे मांगेंगे. जो लोग भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं उन्हें कर्जदाताओं के साथ ऋण पुनर्गठन को लेकर चर्चा करनी चाहिए. जीवन बीमा के दावे से प्राप्त रकम का इस्तेमाल होम लोन चुकता करने में करें. बैंक बाजार के सीईओ आदिल शेट्‌टी कहते हैं कि इससे कम से कम आपके पास सिर छिपाने के लिए जगह तो रहेगी. इसके बाद रकम बच जाती है तो इसे बच्चों की शिक्षा या अपने रिटायरमेंट फंड के लिए बचा कर रखें.
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    12 महीने के मासिक खर्च के बराबर रकम खाते में सहेजें
    पति या पत्नी में से कोई एक ही रह जाए तो आपात जरूरत के लिए छह महीने के मासिक खर्च के बजाय 12 महीने के मासिक खर्च के बराबर रकम खाते में सहेज लें. ऐसे में आप इस विकट स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगे.
    सालाना खर्च कम से कम 10 गुना ज्यादा का बीमा लें
    अपने सालाना खर्च की 10 से 15 गुना रकम का टर्म बीमा या सालाना आय एवं कुल देनदारियों की 8 से 10 गुना बीमित रकम वाली पॉलिसी लें सकते हैं. पॉलिसी दो लोगों के नाम है तो किसी एक की मौत होने की खबर बीमा कंपनी को जरूर दें. मृत्यु प्रमाणपत्र सौंपने के बाद खुद को प्राथमिक पॉलिसीधारक बनाने का अनुरोध करें. अगर पति ने इम्प्लॉयीज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (ईडीएलआई) या नियोक्ता द्वारा दिया गया समूह बीमा लिया हो तो इसके भी दावे जरूर करें.
    फैमिली फ्लोटर पॉलिसी के प्रीमियम की दर दोबारा तय करवाएं
    सामान्यत: जिस कंपनी में आप जॉब करते हैं वहां आजकल ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस होता है. लेकिन आपात स्थितियों के लिए अतिरिक्त 15 से 20 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा खरीदना चाहिए. वहीं, बीमा कंपनी को पति की मौत की सूचना दें ताकि फैमिली फ्लोटर पॉलिसी के प्रीमियम की दर दोबारा निर्धारित की जा सके. स्वास्थ्य बीमा के साथ क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी (गंभीर बीमारी होने पर वित्तीय लाभ देने वाली बीमा पॉलिसी) और एक दुर्घटना सह विकलांगता (डेथ-कम-डिजेबिलिटी कवर) पॉलिसी जरूर लें.
    वसीयत तैयार करना नहीं भूलें
    अपने एसेट्स और निवेश योजनाओं में नामित व्यक्ति अलग-अलग रखें. हो सकता है कि पहले परिवार का मुखिया बाकी सदस्यों के नाम से किए गए सभी निवेश में नॉमिनी रहे होंगे. अब इसमें अपने बच्चों का नाम जोड़ देना चाहिए. वसीयत तैयार करना नहीं भूलें.

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