इन सरकारी बैंकों के सेविंग्स अकाउंट पर मिल रहा सबसे बेस्ट इंटरेस्ट रेट

सरकारी बैंकों औसतन न्यूनतम बैलेंस की लिमिट भी कम होती है.
सरकारी बैंकों औसतन न्यूनतम बैलेंस की लिमिट भी कम होती है.

Savings Account Interest: वैसे तो कम ब्याज दर के इस दौर में सेविंग्स अकाउंट पर भी कम ही ब्याज दर मिल रहा है. लेकिन कुछ प्रमुख प्राइवेट बैंकों की तुलना में कुछ सरकारी बैंक बेहतर दर पर ब्याज दे रहे हैं. साथ ही इन बैंकों में न्यूनतम बैलेंस रखने की लिमिट भी कम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 6:05 AM IST
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अधिकतर लोगों की सैलरी उनके सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में ही क्रेडिट होती है. सेविंग्स अकाउंट से ही लोगों के लोन्स भी सर्विसे होते हैं. लेकिन, आमतौर पर सेविंग्स अकाउंट पर फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम्स की तुलना में कम ब्यजा मिलता है. अगर पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs - Public Sector Banks) की बात करें तो प्राइवेट सेक्टर बैंकों (Private Sector Banks) की तुलना में यह और भी कम होता है. लेकिन, कम ब्याज दर के बावजूद भी सेविंग्स अकाउंट में पैसे रखने के कई फायदे होते हैं. सेविंग्स अकाउंट की पॉपुलेरिटी और इसकी उपयोगिता को देखते हुए यह जानना भी जरूरी है कि आखिर कौन सा बैंक सबसे बेहतर ब्याज दे रहा है.

प्राइवेट बैंकों की तुलना में क्या है सरकारी बैंकों में ब्याज दर?
बैंक बाजार द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक या पंजाब व सिंध बैंक में सेविंग्स अकाउंट पर क्रमश: 3.6 फीसदी और 3.5 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है. इंडियन ओवरसी बैंक में ब्याज दर 3.10 फीसदी है. जबकि, जबकि बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक में यह दर 3 फीसदी है. अन्य पब्लिक सेक्टर बैंकों में 3.1 फीसदी की दर तक ब्याज मिल रहा है.

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अगर प्राइवेट बैंकों से तुलना करें तो ये ब्याज बेहतर हैं. उदाहरण के तौर पर एचडीएफसी बैंक में सेविंग्स अकाउंट पर 3 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक के सेविंग्स अकाउंट पर 3.5 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है. इस में उन सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों के ब्याज दर को शामिल किया गया है, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं.



लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि बड़े सरकारी बैंकों में सेविंग्स अकाउंट पर ब्याज दर तुलनात्मक रूप से कम है. जैसे भारतीय स्टेट बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है लेकिन में सेविंग्स अकाउंट पर 2.70 फीसदी की दर से ही ब्याज मिल रहा है. इसी प्रकार बैंक आफ बड़ौदा में यह ब्याज दर 2.75 फीसदी है.

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मिनिमम बैलेंस रखने की लिमिट कम
सरकारी बैंकों में औसत न्यूनतम बैलेंस रखने की अनिवार्यता मात्र 250 रुपये से शुरू होती है. प्राइवेट सेक्टर बैंकों की तुलना में यह बेहद कम है. दरअसल, सरकारी बैंकों को केंद्र सरकार का सम​र्थन है और ये बैंक मीडिल और लोवर क्लास को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराने पर फोकस होते हैं. ​प्राइवेट सेक्टर की बात करें तो एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक में औसत न्यूनतम बैलेंस रखने की लिमिट 2,500 रुपये से 10,000 रुपये तक है. इसी प्रकार आईसीआईसीआई बैंक में यह लिमिट 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की है.
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