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Savings Account Rules: सेविंग अकाउंट पर कितना बैलेंस होता है टैक्स फ्री और कितने पर लगता है टैक्स? जानें

Savings Account Rules: सेविंग अकाउंट पर कितना बैलेंस होता है टैक्स फ्री और कितने पर लगता है टैक्स? जानें

बचत खाते की लिमिट (Savings Account)

बचत खाते की लिमिट (Savings Account)

Savings Account Rules: आमतौर पर बचत खाते में जमा की जाने वाली धनराशि की काेई सीमा नहीं हाेती है , लेकिन क्या आपने कभी सोचा है एक वित्तीय वर्ष में आप सेविंग अकाउंट में कितना पैसा डाल या निकाल सकते है जिससे आप टैक्स के दायरे में ना आए?

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  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. आज के समय में हर व्यक्ति के पास एक सेविंग अकाउंट (Savings Account) जरूर होता है चाहे वह नौकरीपेशा हो, व्यापारी हो या अन्य. इन सेविंग अकाउंट पर बैंक की तरफ से सालाना ब्याज भी दिया जाता. यह ब्याज दर सभी बैंक की अलग अलग होती है. आमतौर पर बचत खाते में जमा की जाने वाली धनराशि की काेई सीमा नहीं हाेती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है एक वित्तीय वर्ष में आप सेविंग अकाउंट में कितना पैसा डाल या निकाल सकते है जिससे आप टैक्स के दायरे में ना आए?

    ऐसे खातों पर होती आयकर की नजर
    कर कानूनों के तहत बैंकिंग कंपनियों को चालू वित्त वर्ष के दौरान कर विभाग को उन खातों की जानकारी देनी होती जिसमें एक वर्ष के दाैरान नियमित आधार पर दस लाख रुपये या उससे अधिक जमा या निकाले गए हाे. यह लिमिट करदाता के एक या एक से अधिक खातों (चालू खातों के अतिरिक्त व टाइम डिपॉजिट) में वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा के लिए समग्र रूप से देखी जाती है.

    इनकम टैक्स के नियम 114E के बारे में होनी चाहिए जानकारी
    चालू यानी करंट अकाउंट में यह सीमा 50 लाख रुपये और उससे अधिक है. हांलाकि लेनदेन के अलावा, कुछ अन्य लेनदेने भी है जिनके बारे में आपकाे जानकारी हाेना आवश्यक है. हाेस्टबुक लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष कपिल राणा कहते हैं कि एक व्यक्ति काे खातें से किए जाने वाले आय व्यय काे लेकर इनकम टैक्स के नियम 114E के बारे में जानकारी हाेनी चाहिए. जिससे वह एक वित्तीय वर्ष में अपने सेविंग अकाउंट से उतना ही पैसा निकाले या जमा करे जिससे वाे आयकर की रडार में ना आए.

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    1. प्रत्येक बैंकिंग कंपनी या सहकारी बैंक जाे बैंक खाता की सुविधा प्रदान करते है उन पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 लागू हाेता है. उन्हें बैंक खाताें से जुड़े निम्नलिखित लेनदेन की रिपाेर्ट देना आवश्यक रहता है

    ऐसे एक या दाे खाते (चालू व टाइम डिपॉजिट) काे छाेड़कर जिसमें एक वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपये या उससे ज्यादा की राशि जमा की जाती है.

    भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 की धारा 18 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए बैंक ड्राफ्ट, पे ऑडर, बैंकर चैक, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स की खरीद के लिए एक वित्तीय वर्ष में नकद एकत्रीकरण में दस लाख या उससे अधिक का भुगतान किया गया हाे.

    2. क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली बैंकिंग कंपनी या एक सहकारी बैंक जिसे बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू हाेता है या अन्य किसी कंपनी या संस्था काे निम्नलिखित लेनदेन की रिपाेर्ट करनी हाेती है

    जारी किए गए एक या अधिक क्रेडिट कार्ड के बिल के विरूद्ध एक वित्तीय वर्ष में एक लाख या उससे अधिक का नकद भुगदान करना
    जारी किए गए एक या अधिक क्रेडिट कार्ड के बिल के विरूद्ध किसी भी माेड से दस लाख या उससे अधिक का भुगतान करना.

    3. बॉन्ड या डिवेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्था काे किसी वित्तीय वर्ष में कंपनी या संस्था द्वारा जारी बॉन्ड या डिबेंचर प्राप्त करने करने के लिए दस लाख रुपयाे या उससे अधिक की राशि के किसी भी व्यक्ति से रसीद की रिपाेर्ट करना आवश्यक हाेता है. (नवीनीकरण के कारण प्राप्त राशि काेछाेड़कर) बांड या कंपनी द्वारा जारी डिबेंचर.

    4. कंपनी जाे शेयर जारी कर रही है, कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयराें काे प्राप्त करने के लिए किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपये या उससे अधिक की राशि की रिपाेर्ट करना आवश्यक है.

    5. कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 68 के तहत मान्यता प्राप्त स्ट़ॉक एक्सचेंज और अपनी प्रतिभूतियाें की खरीद पर सूचीबद्ध कंपनी काे किसी भी व्यक्ति से किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख या उससे अधिक राशि के शेयराें के बायबैक की रिपाेर्ट देना जरूरी है.

    6. म्यूचुअल फंड के ट्रस्टी या अन्य व्यक्ति जाे म्यूचुअल फंड के मामलाें का प्रबंधन करते है उन्हें म्यूचुअल फंड की एक या एक से अधिक याेजनाओं की इकाइंयां प्राप्त करने के लिए वित्तीय वर्ष में दस लाख या उससे अधिक की राशि के किसी भी व्यक्ति से रसीद की रिपाेर्ट (एक स्कीम से दूसरे म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर के कारण प्राप्त राशि काे छाेड़कर) करना जरूरी है.

    7. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 की धारा 2 के खंड (ग) में निर्दिष्ट एक अधिकृत व्यक्ति काे विदेशी की बिक्री के लिए वित्तीय वर्ष में दस लाख या उससे अधिक की राशि के किसी भी व्यक्ति से प्राप्तियाें की रिपाेर्ट करने की आवश्यकता है.

    8. पंजीकरण अधिनिमय 1908 की धारा के तहत नियुक्त महानिरीक्षक या उस अधिनिमय की धारा 6 के तहत नियुक्त रजिस्ट्रार या उप पंजीयक काे किसी भी व्यक्ति द्वारा 30 लाख रुपये या उससे अधिक की अचल संपत्ति की खरीद या बिक्री की रिपाेर्ट करने की जरूरत है.

    इस प्रकार, बैंक खाते में किसी भी राशि काे जमा करने या निकालने से पहले, हमें सुनिश्चित करना हाेगा कि लागू प्रावधानाें का अनुपालन करते हुए , हमें ऐसे लेनदेन के दायरें में नहीं आना चाहिए जाे नियम 114 ई के तहत आपकाे कर के दायरे में ला सकता है.

    Tags: Business news in hindi, Savings accounts, Tax saving, Tax saving options

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