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सेविंग अकाउंट पर हो सकती है मोटी कमाई, करना होगा यह काम

स्वीप इन फैसिलिटी के तहत जब सेविंग्‍स अकाउंट की जमा एक निश्चित लिमिट के पार चली जाती है तो इससे ज्यादा जमा धनराशि फिक्सड डिपोजिट (एफडी, FD) में कन्‍वर्ट हो जाता है.

आजकल बैंक एक ऐसी सुविधा भी दे रहे हैं, जिसके जरिए ग्राहक सेविंग्‍स अकाउंट में जमा पर तय ब्‍याज दर से ज्‍यादा का फायदा उठा सकते हैं. इस सुविधा का नाम स्‍वीप इन फैसिलिटी (Sweep in Facility) है.

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    नई दिल्ली. अकस्मात खर्चों के लिए हम सभी अपने सेविंग अकाउंट (Saving Account) में अपनी बचत रखते हैं. लेकिन इस पर मिलने वाला ब्याज काफी कम 3 से 4 प्रतिशत होता है. काफी कम लोगों को पता होगा कि सेविंग अकाउंट में रखे पैसों पर भी फिक्सड डिपॉजिट (Fixed Deposit) की तरह ब्याज पाया जा सकता है.
    आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे सेविंग अकाउंट पर ज्यादा ब्याज कमाया जा सकता है. आजकल बैंक एक ऐसी सुविधा भी दे रहे हैं, जिसके जरिए ग्राहक सेविंग्‍स अकाउंट में जमा पर तय ब्‍याज दर से ज्‍यादा ब्‍याज का फायदा उठा सकते हैं. यह सुविधा है स्‍वीप इन फैसिलिटी (Sweep in Facility). एसबीआई (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक(ICICI), बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India), एक्सिस बैंक (Axis Bank) आदि ज्‍यादातर बैंकों में स्वीप इन फैसिलिटी की सुविधा मौजूद है.
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    स्‍वीप इन फैसिलिटी में सरप्‍लस अमाउंट FD में हो जाता है कन्‍वर्ट
    स्वीप इन फैसिलिटी के तहत जब सेविंग्‍स अकाउंट की जमा एक निश्चित लिमिट के पार चली जाती है तो इससे ज्यादा जमा धनराशि फिक्सड डिपोजिट (एफडी, FD) में कन्‍वर्ट हो जाता है. हर बैंकों में यह लिमिट अलग-अलग हो सकती है. कन्वर्टेड FD के अमाउंट पर बैंक में FD के लिए तय ब्‍याज दर के हिसाब से ब्‍याज मिलता है. स्वीप इन फैसिलिटी के चलते कस्‍टमर को सेविंग्‍स अकाउंट की जमा पर उसके लिए तय ब्याज मिलता रहता है, साथ ही स्वीप इन के तहत कन्वर्ट हुई FD पर उसके लिए तय ब्‍याज मिलने लगता है. इस तरह कस्‍टमर को डबल फायदा होता है.
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    ज्यादा अमाउंट के लिए एक से ज्यादा एफडी भी कर सकते हैं
    स्‍वीप इन फैसिलिटी के तहत होने वाली FD के लिए भी एक तय डिपॉजिट लिमिट होती है.यानी उस FD में उस लिमिट से ज्‍यादा अमाउंट नहीं जा सकता. ऐसे में आपके पास स्‍वीप इन के तहत एक से ज्‍यादा FD का भी ऑप्‍शन रहता है.यानी सरप्‍लस अमाउंट बढ़ते जाने पर आप एक से ज्‍यादा FD रखकर ज्‍यादा ब्‍याज का फायदा ले सकते हैं.
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    ज्यादातर बैंकों में सुविधाएं लेकिन नाम अलग-अलग
    कुछ बैंक सामान्य सेविंग्‍स अकाउंट को ही इस स्वीप इन फैसिलिटी से लिंक कर देते हैं लेकिन कुछ बैंकों में इसके लिए अलग से सेविंग्‍स अकाउंट हैं.जैसे- SBI में सेविंग्‍स प्‍लस अकाउंट, HDFC बैंक में स्‍वीप इन फैसिलिटी, बैंक ऑफ इंडिया में सेविंग्‍स प्‍लस स्‍कीम, ICICI बैंक में मनी मल्‍टीप्‍लायर अकाउंट आदि. स्वीप इन फैसिलिटी को लेकर हर बैंक के अलग नियम व क्राइटेरिया रहते हैं.
    बैलेंस तय सीमा से कम हुआ तो एफडी हो जाएगी खत्म
    सेविंग्‍स अकाउंट में डिपोजिट जब तक निश्चित लिमिट से ज्‍यादा रहेगी, स्वीप इन के तहत बनी FD ऑटोमेटिकली चलती रहेगी. सेविंग्‍स अकाउंट का बैलेंस लिमिट के अंदर आने पर सरप्‍लस अमाउंट वाली FD खत्‍म हो जाती है और पैसा फिर से सेविंग्स अकाउंट में आ जाता है व उस पर फिर सेविंग्स अकाउंट वाला ब्याज मिलने लगता है. इसे स्‍वीप आउट कहते हैं. ग्राहक को स्वीप इन FD का ब्‍याज सरप्‍लस अमाउंट पर ही मिलता है और तब तक ही मिलता है, जब तक सेविंग्‍स अकाउंट बैलेंस लिमिट से ज्‍यादा रहता है.

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