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SBI चेयरमैन ने कहा-फिजिकल और फाइनेंशियल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को नई ऊंचाई पर ले जाएगा बजट 2021

एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा के मुताबिक, बजट 2021 की कुछ घोषणाएं रेटिंग एजेंसियों को भी पसंद आएंगी.

एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा के मुताबिक, बजट 2021 की कुछ घोषणाएं रेटिंग एजेंसियों को भी पसंद आएंगी.

बजट 2021 (Budget 2021) में की गई घोषणाओं का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत (AtamNirbhar Bharat) को अधिक प्रमुखता देना है. इसमें किसानों की आमदनी (Farmers' Income) को दोगुना करना, मजबूत बुनियादी ढांचा, स्वस्थ भारत, सुशासन, युवाओं के लिए अवसर, सभी के लिए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, और समावेशी विकास जैसी अहम बातें शामिल हैं.

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    दिनेश कुमार खारा

    केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतामरण (FM Nirmala Sitharamana) के संसद में पेश किया गया बजट 2021-22 (Budget 2021-22) ऐतिहासिक है क्‍योंकि यह फिजिकल और फाइनेंशियल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए नया विजन व रोडमैप देता है. हम इसे 'इन्फ्रास्ट्रक्चर बजट' (Infrastructure Budget) भी कह सकते हैं. केंद्र सरकार की भूमिका का विस्तार करते हुए बजट प्रस्तावों में 2020-2021 के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की तुलना में 34.5 फीसदी की वृद्धि के जरिये 5.54 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे मांग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

    आत्‍मनिर्भर भारत के मकसद को दी गई है प्रमुखता
    बजट संबंधी घोषणाओं का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत (AtamNirbhar Bharat) के मकसद को अधिक प्रमुखता देना है, जिसमें किसानों की आमदनी (Farmers' Income) को दोगुना करना, मजबूत बुनियादी ढांचा, स्वस्थ भारत, सुशासन, युवाओं के लिए अवसर, सभी के लिए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, और समावेशी विकास जैसी अहम बातें शामिल हैं. हाल के दौर में फैली कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) और बड़ी संख्या में लोगों पर पड़े असर को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र (Health Sector) की ओर पूरा ध्यान दिया गया है. इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लॉन्‍च की गई है.

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    इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनेंसिंग के मुद्दे पर दिया है ध्‍यान
    केंद्र सरकार ने भारतमाला परियोजना, भारत के लिए राष्ट्रीय रेल योजना-2030 के तहत सड़कें, टियर-1 व टियर-2 शहरों में मेट्रो रेल और पीपीपी आधार पर प्रमुख बंदरगाहों के परिचालन प्रबंधन जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए संसाधन जुटाए हैं. वितरण कंपनियों की व्‍यवहारिकता पर ध्यान दिया गया है, जिसकी उन्हें जरूरत भी है. इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग से संबंधित मुद्दों पर भी अच्छी तरह से ध्यान दिया गया है. लोन कंपोनेंट्स, एसेट्स मोनेटाइजेशन, और इनविट्स व आरईआईटी के जरिये विदेशी भागीदारी की राह खोली गई है. इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से फंड उपलब्ध कराने के लिए टैक्‍स बेनिफिट्स की दिशा में अधिसूचित आईडीएफ की ओर से जारी किए गए 'जीरो कूपन बांड' जारी करने का प्रस्ताव है.

    कैपिटल एक्‍सपेंडिचर में की गई है 34% वृद्धि
    बुनियादी ढांचे की फाइनेंसिंग के लिए कर्ज की समस्या को दूर करने के लिए नेशनल डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन बनाने का कदम उठाया गया है. इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक अहमियत देने के साथ ही बजट प्रस्तावों में 2020-2021 के पूंजीगत व्यय की तुलना में 34.5 फीसदी की बढ़ोतरी के जरिये 5.54 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से देखें तो वित्तीय बाजार के सेगमेंट्स को नियंत्रित करने वाले कई कामों को एक जगह करते हुए सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड का प्रस्ताव अच्छा कदम है.

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    ARC-AMC के जरिये एनपीए होंगे कंसॉलिडेट
    फाइनेंशियल सेक्‍टर में इक्विटी कैपिटल की भूमिका को बजट में मान्यता दी गई है. इसके मुताबिक बीमा कंपनियों में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी कर (FDI Limit Increased) दी गई है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में 20,000 करोड़ रुपये का कैपिटल इनफ्यूजन (Capital Infusion) होगा. एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (ARC) और एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की स्थापना की जाएगी ताकि मौजूदा तनावग्रस्त कर्ज (NPAs) को कंसॉलिडेट किया जा सके. साथ ही इससे भविष्‍य में पूंजी नुकसान को रोका जा सकेगा. ये कदम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, उचित मूल्य और नकद वसूली सुनिश्चित करेंगे.

    रेटिंग ऐंजसियों को भी पसंद आएंगे कुछ कदम
    देश के सकल घरेलू उत्‍पाद में 14.4 फीसदी वृद्धि की धारणा के तहत वित्‍त वर्ष 2021-2022 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.8 फीसदी होने का अनुमान है. अगले वर्ष के लिए बाजार से सकल उधारी लगभग 12 लाख करोड़ रुपये होगी. सिद्धांत रूप में बजट ने ऑफ-बैलेंस शीट बोरोइंग्स और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को तर्कसंगत बनाया है, जो बाजार और रेटिंग एजेंसियों को भी पसंद आएगा. बजट में खर्च संबंधी घोषणाओं के साथ टैक्‍स को पहले के स्तर पर बरकरार रखा गया है. यह स्थिति निश्चित तौर पर बाजार की भावनाओं को प्रभावित करेगी.

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    बजट में दिखी संतुलित मांग प्रोत्‍साहन की राह
    राजकोषीय घाटे के स्तर को वित्‍त वर्ष 2025-2026 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में 4.5 फीसदी से नीचे तक पहुंचाने का अनुमान लगाया गया है. बेहतर अनुपालन और सरकारी संपत्ति के विमुद्रीकरण जैसे उपायों से कर राजस्व (Tax Revenue) में बढ़ोतरी होगी. इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs), भूमि और रणनीतिक विनिवेश शामिल है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस महामारी की पृष्ठभूमि को देखते हुए बजट 2021-22 ने आउटपुट गैप में सुधार के लिए एक संतुलित मांग प्रोत्साहन का रास्ता हासिल किया है.

    (Disclaimer: लेखक दिनेश कुमार खारा देश के सबसे बड़े सरकारी कर्जदाता स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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