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अर्थव्यवस्था उबारने में RBI नहीं बल्कि अब सरकार की अहम भूमिका होगी: SBI इकोनॉमिस्ट

अर्थव्यवस्था उबारने में RBI नहीं बल्कि अब सरकार की अहम भूमिका होगी: SBI इकोनॉमिस्ट

एसबीआई इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि अब अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार का दायित्व सरकार के पाले में पहुंच गया है.

एसबीआई इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि अब अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार का दायित्व सरकार के पाले में पहुंच गया है.

SBI इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अब नीतिगत ब्याज दरों (Policy Rates) में अधिक कटौती की संभावना नहीं है. ऐसी स्थिति में महंगाई में कमी आने की उम्मीद नहीं की जा सकती और अब आर्थव्यवस्था उबारने में सरकार की निर्णायक भूमिका होगी.

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    मुंबई. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रिजर्व बैंक (RBI) अपनी ब्याज दर कटौती चक्र के अंतिम छोर के करीब है, क्योंकि मुद्रास्फीति (Inflation) में मौजूदा स्तर से बहुत अधिक कमी आने की उम्मीद कम है. अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को कहा ऐसे में अब अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार का दायित्व सरकार के पाले में पहुंच गया है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा (RBI MPC) बैठक का ब्योरा सामने आने के एक दिन बाद SBI के अर्थशास्त्रियों की यह टिप्पणी आई है. बैठक के ब्योरे के अनुसार यह साफ हो गया है कि मौद्रिक समीक्षा की पिछली बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने की मुख्य वजह ऊंची मुद्रास्फीति थी.

    मार्च के बाद से नीतिगत ब्याज दर में 1.15 फीसदी की कटौती
    इस साल मार्च में कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus Pandemic) शुरू होने के बाद रिजर्व बैंक दो बार में नीतिगत दर (Policy Rates) में 1.15 फीसदी की कटौती कर चुका है, जिससे आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन दिया जा सके. हालांकि, रिजर्व बैंक ने अगस्त में नीतिगत दर में कोई कटौती नहीं की. जिससे कइयों को हैरानी हुई. एसबीआई इकनॉमिस्ट के अनुसार, ‘यदि हम अर्थव्यवस्था में तेजी से पुनरोद्धार की कोई उम्मीद करते हैं, तो इसे राजकोषीय नीति की भूमिका निर्णायक होगी.’’

    यह भी पढ़ें: RBI गवर्नर इंटरव्यू- EMI में छूट और ब्याज दरों में कटौती को लेकर कही ये बात

    ज्यादा से ज्यादा 0.25 फीसदी तक की कटौती संभव
    SBI के अर्थशास्त्रियों ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हम ब्याज दर कटौती चक्र के अंत में पहुंच चुकें हैं. मुद्रास्फीति के मौजूदा स्तर से बहुत नीचे आने की गुंजाइश नहीं है, ऐसे में बड़ी कटौती की उम्मीद नहीं की जा सकती.’’ उन्होंने संकेत दिया कि ज्यादा से ज्यादा ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की और कटौती हो सकती है.

    सप्लाई चेन में राहत के संकेत नहीं
    उनका मानना है कि जुलाई में जो मुद्रास्फीति 6.9 फीसदी पर रही है, उसके नीचे आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जो बड़े पैमाने पर खरीद की है उससे मुद्रास्फीति के 0.35 से 0.40 फीसदी और ऊपर जाने का अनुमान है. सप्लाई चेन में जो बाधा खड़ी हुई है उसमें फिलहाल राहत के संकेत नहीं दिखाई देते हैं. कई राज्यों में यह स्थिति देखी गई है.

    Tags: Business news in hindi, Modi Government Budget, Nirmala sitharaman, RBI, Sbi

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