SBI की इस प्लानिंग से दुरुस्त हो सकती है गरीब परिवारों की माली हालत, जानिए क्या है योजना

भारतीय स्टेट बैंक
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भारतीय ​स्टेट बैंक (State Bank of India) के अर्थशास्त्रियों ने एक स्कीम का प्रस्ताव पेश किया है. इस स्कीम को अपनाने वालों को केंद्र सरकार की तरफ से टैक्स छूट का लाभ देने का भी प्रस्ताव है. इस स्कीम को बूस्ट करने के लिए सरकार को कम से कम सेक्शन 80C के अतिरिक्त छूट देने का प्रस्ताव है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 1:40 PM IST
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नई दिल्ली. पीएम जनभागीदारी और जन चेतना आंदोलन के बीच सीधा संबंध है. SBI ने समाज और देश में लोगों के बीच आर्थिक समानता लाने के लिए अनोखा स्कीम को लागू किए जाने का सुझाव दिया है. एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि 'अडॉप्ट अ फैमिली' यानी एक परिवार को अपनाओं स्कीम को लागू किया जाना चाहिए. SBI ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि इस स्कीम से ना सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की माली हालात में सुधार होगा बल्कि अर्थव्यवस्था में मांग भी बढ़ेगी.

आखिर क्या है अडॉप्ट अ फैमिली स्कीम?
दरअसल यह एक स्वैच्छिक स्कीम है, जिसके तहत 10 लाख रुपये या इससे अधिक की सालाना कमाई वाले करदाताओं को स्वैच्छिक रुप से इस स्कीम को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है. करदाताओं को ऐसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे एक साल के लिए किसी BPL परिवार को अपनाएं. करदाता ऐसे परिवार को प्रतिमाह 5000 रुपये आर्थिक सहायता करे. कोरोना वायरस से बुरी तरह से प्रभावित बीपीएल परिवार को बिना किसी सरकारी खर्च के इस स्कीम के जरिए सलाना 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल जायेगी. देश में सालाना 10 लाख या इससे अधिक कमाई वाले करीब 70 लाख करदाता है. अगर 10 फीसदी करदाता भी इस स्कीम को स्वैच्छा से अपनाते है तो देश के करीब 7 लाख परिवारों की माली हालात सुधर सकती है.

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केंद्र सरकार को इस स्कीम को प्रोत्साहित करने के लिए कर देयता छूट देने में बदलाव करने का प्रावधान करना चाहिए. करदाताओें द्वारा अगर 50 हजार या इससे अधिक का रकम BPL परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में दिया जाता है तो केंद्र सरकार ऐसे करदाताओं को कराधान नियम 80C के तहत छूट दिया जाना चाहिए. इस प्रावधान से सरकारी खजाने पर महज 1050 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा जबकि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़कर 11,666 रुपये का हो जायेगा. मांग बढ़ने से अप्रत्यक्ष कर के रुप में भी सरकारी राजस्व में धन जमा हो जायेगा. 10 लाख रुपये से अधिक सालाना कमाई पर 30 फीसदी टैक्स वसूला जाता है. 50000 रुपये का 30 फीसदी 15 हजार रुपये होता है. 7 लाख करदाताओं द्वारा 15 रुपये का कर देने से कुल कर होता है 1050 करोड़ रुपये.



इस स्कीम के लिए भी लोगों ने दिखाया है उत्साह
भारत सरकार ने जब-जब देशवासियों से स्वैच्छिक रुप से योगदान देने की अपील की है लोग बढ़-चढकर आगे आये है. प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एलपीजी सब्सिडी (LPG Subsidy) को स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की थी. नतीजा काफी उत्साहजनक रहा. 30 करोड़ उपभोक्ताओं में से 10 फीसदी यानि करीब 3 करोड़ उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी त्याग दिया.

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स्कीम को लागू करने से देश में असमानता होगी कम
यहीं नहीं दुनियां में कई ऐसे ऐतिहासिक साक्ष्य है जिससे जानकारी मिलती है कि अगर लोग मिलकर काम करे तो नतीजा सभी के हित में होता है. लेकिन अगर लोग अलग-अलग काम करते है तो सभी को नुकसान उठाना पड़ता है. लिहाज़ा सभी को मिलकर कल्याणकारी कदम उठाना चाहिए जिससे सभी का भला हो. 1968 में गेर्रेट हार्टिन द्वारा लिखी बहुचर्चित लेख द ट्रेजडी ऑफ कॉमन्स में भी लोक कल्याण  का बेहतर उदाहरण का जिक्र किया है. यहीं नहीं आरबीआई ने भी अपने नीतिगत फैसलों की जानकारी देने के दौरान कहा था कि मार्केट प्लेयर्स को प्रतिस्पर्धा के साथ काम करना चाहिए ना कि आपस में लड़ाई करना चाहिए. लिहाजा स्वास्थ्य प्रतिस्पर्धा वाले प्लेयर को इंटेटिव दिया जाना चाहिए.
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