SBI ने MCLR दरों को लेकर लिया ये फैसला! जानें क्या होगा आप पर असर

SBI ने MCLR दरों को लेकर लिया ये फैसला! जानें क्या होगा आप पर असर
SBI ने MCLR दरों को लेकर लिया ये फैसला! जानें क्या होगा आप पर असर

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में कोई बदलाव नहीं किया है.

  • Last Updated: June 10, 2019, 1:55 PM IST
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (MCLR) में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका मतलब साफ है कि एमसीएलआर पर आधारित ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. यानी आरबीआई के रेपो रेट घटाने के बावजूद इन दरों पर कर्ज लेने वाले पर्सनल, ऑटो और होम लोन की एमआई सस्ती नहीं होगी. हालांकि, SBI ने एक जुलाई से रेपो रेट से जुड़ी कर्ज़ दरों को 0.25 फीसदी तक घटा दिया है. इसका मतलब साफ है कि एक जुलाई से इसके जरिये लिंक सभी लोन 0.25 फीसदी तक सस्ते हो जाएंगे.

क्‍या है एमसीएलआर फॉर्मूला- बैंकों के लिए लेंडिंग इंटरेस्‍ट रेट तय करने के फॉर्मूले का नाम मार्जिनल कॉस्‍ट ऑफ फंड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) है.

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आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए तय फॉर्मूला फंड की मार्जिनल कॉस्‍ट पर आधारित है. इस फॉर्मूले का उद्देश्य कस्‍टमर को कम इंटरेस्‍ट रेट का फायदा देना और बैकों के लिए इंटरेस्‍ट रेट तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है.
अप्रैल, 2016 से ही बैंक नए फॉर्मूले के तहत मार्जिनल कॉस्ट से लेंडिंग रेट तय कर रहे हैं. साथ ही बैंकों को हर महीने एमसीएलआर की जानकारी देनी होती है. आरबीआई द्वारा जारी इस नियम से बैंकों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलने और इकोनॉमिक ग्रोथ में भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद थी.

#NewsFlash | SBI ने जून के लिए MCLR में कोई बदलाव नहीं किया। #AwaazMarkets pic.twitter.com/JWIxjwd9ny



पुराने कस्‍टमर को भी होता है फायदा-एमसीएलआर फॉर्मूले का फायदा नए कस्टमर के साथ ही पुराने कस्‍टमर को भी मिलता है. जिस कस्‍टमर ने एमसीएलआर बदलने से पहले लोन लिया है और उसका लोन लेंडिंग रेट फॉर्मूले से जुड़ा हुआ है, तो एमसीएलआर घटने के साथ ही उसकी ईएमआई कम हो जाती है.

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कैसे तय होता है MCLR-मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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