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SBI समेत देश के 4 सबसे बड़े बैंकों ने कर्ज किया महंगा! अब इतनी बढ़ेगी आपकी EMI

News18Hindi
Updated: October 2, 2018, 2:34 PM IST
SBI समेत देश के 4 सबसे बड़े बैंकों ने कर्ज किया महंगा! अब इतनी बढ़ेगी आपकी EMI
सांकेतिक तस्वीर

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में 0.05 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है.

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  • Last Updated: October 2, 2018, 2:34 PM IST
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में 0.05 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है. इसके अलावा PNB, HDFC लिमिटेड, ICICI बैंक ने भी ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. इस फैसले के बाद अब होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी. आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों पर बैठक 4-5 अक्टूबर को होगी. (ये भी पढ़ें-LIC ने बंद कर दी है ये पॉलिसी, अगर आपके पास है तो जानिए अब क्या करें?)

किस बैंक ने कितनी बढ़ाई ब्याज दरें
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एसबीआई ने मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में 0.05 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है.
>> पीएनबी ने भी शॉर्ट टर्म लोन के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट को 0.2 पर्सेंट बढ़ाया. >> एचडीएफसी लिमिटेड ने भी रिटेल प्राइस लेंडिंग रेट (आरपीएलआर) में तत्काल प्रभाव से 0.10 पर्सेंट की बढ़ोतरी की है. अलग-अलग स्लैब के लोन के लिए नई दरें 8.80 से 9.05 पर्सेंट के बीच होंगी.



>> आईसीआईसीआई बैंक ने एमसीएलआर में 0.1 पर्सेंट का इजाफा किया है. (ये भी पढ़ें-म्यूचुअल फंड: इन स्कीम में पैसा लगाने वालों को हुआ 20% तक का नुकसान, अब क्या करें?)



अब क्या होगा- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) पर आधारित कर्ज की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी. लिहाजा ग्राहकों को अब पर्सनल, ऑटो और होम लोन की ईएमआई में ज्यादा पैसा देना होगा. (ये भी पढ़ें-महंगा होगा Loan लेना, रेपो रेट में 0.25% की वृद्धि कर सकता है RBI)

क्या होता है मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर)- अप्रैल 2016 से सभी बैंकों की बेचमार्क दरें एमसीएलआर यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट के आधार पर तय होती हैं. इसके पहले बैंकों के लोन की दरें बेस रेट पर तय की जाती थीं. अगर आपने 1 अप्रैल 2016 के पहले लोन लिया है, तो आपका लोन बेस रेट के आधार पर होगा.

ऐसे तय होता है एमसीएलआर- एमसीएलआर तय करने के लिए बैंक इन तथ्यों को ध्यान में रखते हैं
>> ऑपरेटिंग खर्च
>> सीआरआर मेंटनेंस खर्च
>> सेविंग्स/करेंट/टर्म डिपॉजिट अकाउंट पर दिया जाने वाला ब्याज
>> रेपो रेट
>> नेटवर्थ पर रिटर्न
>> टेन्योर प्रीमियम

कैसे तय होता है बेस रेट- इसे तय करने के लिए इन तथ्यों को ध्यान में रखते हैं
>> ऑपरेटिंग खर्च
>> सीआरआर मेंटनेंस खर्च
>> सेविंग्स/करेंट/टर्म डिपॉजिट अकाउंट पर दिया जाने वाला ब्याज
मार्जिन

बेस रेट- एमसीएलआर में अंतर? एमसीएलआर बैंकों के कर्ज की लागत और उनके नेटवर्थ पर रिटर्न को ध्यान में रखकर निकाला जाता है. इसकी गणना में रेपो रेट में हुए बदलाव और टेन्योर प्रीमियम को भी ध्यान में रखा जाता है.वहीं, बेस रेट की गणना में रेपो रेट में बदलाव और टेन्योर प्रीमियम का ख्याल नहीं रखा जाता था. नतीजा ये कि एमसीएलआर में हर महीने बदलाव आता है और हर बैंक के एमसीएलआर अलग-अलग हो सकते हैं.

RBI की बैठक में क्या होगा-सिंगापुर बेस्ड डीबीएस बैंक की इकनॉमिस्ट राधिका राव ने एक रिसर्च नोट में लिखा, ‘मार्केट में इधर उतार-चढ़ाव बढ़ा है और रुपये में तेज गिरावट आई है. इसलिए रिजर्व बैंक अगली मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. ऐसा भी लग रहा है कि इस साल दरों में वह 0.25 पर्सेंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है.

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First published: October 2, 2018, 1:52 PM IST
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