SBI की रिपोर्ट! देश की जीडीपी ग्रोथ मार्च 2021 तिमाही में 1.3 फीसदी रहने का है अनुमान, जानें वजह

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे वित्‍त वर्ष के लिए जीडीपी में करीब 7.3 फीसदी की कमी दर्ज की सकती है.

एसबीआई (SBI) ने 41 हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के साथ एक नाउकास्टिंग मॉडल तैयार किया है. इसमें इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज, सर्विस एक्टिविटीज और ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) से जुड़े इंडिकेटर शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्‍त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के दौरान 6 लाख करोड़ रुपये तक का नॉमिनल जीडीपी लॉस (Nominal GDP Loss) हो सकता है.

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    नई दिल्‍ली. देश के सकल घरेलू उत्‍पाद (India's GDP) वित्‍त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 1.3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद है. देश के सबसे बड़े बैंक स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट "इकोरैप" में कहा गया है कि पूरे वित्‍त वर्ष के लिए जीडीपी में करीब 7.3 फीसदी की कमी दर्ज की सकती है. नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) तिमाही और सालाना अस्थायी अनुमान 31 मई 2021 को जारी करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर चौथी तिमाही के लिए अनुमानित जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) करीब 1.3 फीसदी और पूरे वर्ष के लिए इसमें करीब 7.3 फीसदी की कमी आ सकती है.

    25 देशों में भारत 5वीं सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था होगा
    एसबीआई ने 41 हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के साथ एक नाउकास्टिंग मॉडल तैयार किया है. इसमें इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज, सर्विस एक्टिविटीज और ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) से जुड़े इंडिकेटर शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के अनुमान के साथ भारत अभी तक अपने सकल घरेलू उत्‍पाद के आंकड़े जारी करने वाले 25 देशों में 5वीं सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) होगा. अनुमानों से संकेत मिल रहा है कि वित्‍त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के दौरान 6 लाख करोड़ रुपये तक का नॉमिनल जीडीपी लॉस हो सकता है.

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    वित्‍त वर्ष 2021 में हुआ 11 लाख करोड़ का नॉमिनल जीडीपी लॉस
    वित्‍त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में करीब 11 लाख करोड़ रुपये का नॉमिनल जीडीपी लॉस हुआ था. रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल और मई 2021 में सभी बैंकों के डिपॉजिट व क्रेडिट में कमी आई है. इस वित्‍त वर्ष के शुरुआती तीन पखवाड़ों में बैंक डिपॉजिट में बढ़ोतरी और कमी दोनों दर्ज किए गए हैं. इसका कारण पहले पखवाड़े में लोगों को वेतन मिलना और दूसरे पखवाड़े में मेडिकल खर्चों के लिए उसकी निकासी करना हो सकता है. इसके साथ ही लोगों के अनिश्चित स्थिति के लिए पैसे अपने पास रखना भी कारण हो सकता है.