कमाई से ज्यादा खर्च कर रही सरकार: SBI रिपोर्ट का दावा- इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है राजकोषीय घाटा

इस वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा GDP के 13% पर पहुंच जाएगा: SBI Report
इस वित्त वर्ष में सरकार का राजकोषीय घाटा GDP के 13% पर पहुंच जाएगा: SBI Report

राजकोषीय घाटे का आसान शब्‍दों में मतलब यह है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कितना उधार लेने की जरूरत पड़ेगी. SBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार का Fiscal deficit चालू वित्त वर्ष 2020-21 में उसके तय अनुमान से कहीं आगे निकल सकता है.

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नई दिल्ली. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI-State Bank of India) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि इस साल राजकोषीय घाटा सरकार के अनुमान से अधिक रह सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा तय अनुमान से कहीं आगे निकल सकता है यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 13 फीसदी रहने का अनुमान है. आपको बता दें कि सरकार का खर्च आमदनी से अधिक होना राजकोषीय घाटे का सबसे बड़ा कारण है. इस साल इसके बढ़ने के पीछे कोरोना वायरस संक्रमण है. क्योंकि सरकार ने राहत पैकेज पर 20 लाख करोड़ रुपये के खर्च करने का ऐलान किया है.

राजकोषीय घाटा- अर्थशास्त्री बताते हैं किराजस्व घाटा तब होता है जब सरकार के कुल खर्च उसकी अनुमानित आय से ज्‍यादा होते हैं. सरकार के राजस्व खर्च और राजस्व प्राप्तियों के बीच के अंतर को राजस्व घाटा कहा जाता है. यहां ध्‍यान रखने वाली बात यह है कि खर्च और आमदनी केवल राजस्‍व के संदर्भ में होती है. रेवेन्‍यू डेफिसिट या राजस्‍व घाटा दिखाता है कि सरकार के पास सरकारी विभागों को सामान्‍य तरीके से चलाने के लिए पर्याप्‍त राजस्‍व नहीं है.

दूसरे शब्‍दों में कहें तो जब सरकार कमाई से ज्‍यादा खर्च करना शुरू कर देती है तो नतीजा राजस्‍व घाटा होता है. राजस्‍व घाटे को अच्‍छा नहीं माना जाता है. खर्च और कमाई के इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है या फिर वह विनिवेश का रास्‍ता अपनाती है.



रेवेन्‍यू डेफिसिट के मामले में अक्‍सर सरकार अपने खर्चों को घटाने की कोशिश करती है या फिर वह टैक्‍स को बढ़ाती है. आमदनी बढ़ाने के लिए वह नए टैक्‍सों को ला भी सकती है या फिर ज्‍यादा कमाने वालों पर टैक्‍स का बोझ बढ़ा सकती है.
अभी आमदनी और खर्चों को लेकर कैसे है देश के हालात-भारत के लेखा महानियंत्रक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकार के खर्च और राजस्व प्राप्ति के बीच का अंतर अप्रैल से अगस्त के दौरान 8,70,347 करोड़ रुपये यानी बजट में अनुमानित वार्षिक लक्ष्य के 109.3 प्रतिशत पर पहुंच गया.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का fiscal deficit अगस्त तक 8.7 लाख करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान के 109.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है. इससे केंद्र सरकार को अब 12 लाख करोड़ रुपये के नए उधारी लक्ष्य पर टिके रहने के लिए खर्च में बड़ी कटौती करने की जरूरत होगी, जिसका इकोनॉमिक ग्रोथ पर निगेटिव इंपैक्ट पड़ेगा.

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Net Revenue में 7 लाख करोड़ रुपये की कमी
हालांकि, SBI ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र और राज्यों के लिए आंकड़े अलग-अलग करके नहीं बताए हैं. इससे पहले SBI ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि केंद्र का राजकोषीय घाटा सरकार के 3.8 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में दोगुना से कुछ अधिक होकर 7.9 प्रतिशत पर पहुंच सकता है. लेकिन अब इसे 13% तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार के उधार लेने के कार्यक्रम (borrowing programme) पर टिके रहने से ऋण बाजार (debt market) को खुशी मिलेगी, लेकिन सरकार की मौजूदा खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को देखते हुए ऐसा कर पाना मुश्किल लग रहा है. SBI ने अपनी रिसर्च में कहा, एक्साइज ड्यूटी (excise duty) अगस्त तक 32 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है. इस साल टैक्स और नॉनटैक्स रेवेन्यू में कमी आने की वजह से सरकार के नेट राजस्व कमी (Net revenue slippage) करीब 7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.
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