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SBI की चेतावनी : 'मुफ्त' की सुविधाओं के चक्‍कर में खाली हो रहा राज्‍यों का खजाना, बढ़ते कर्ज से कहीं दिवालिया न हो जाएं

केंद्र ने राज्‍यों को 1.10 लाख करोड़ टैक्‍स क्षतिपूर्ति के लिए भी दिए हैं.

केंद्र ने राज्‍यों को 1.10 लाख करोड़ टैक्‍स क्षतिपूर्ति के लिए भी दिए हैं.

जनता को मुफ्त सुविधाएं उपलब्‍ध कराने और योजनाओं पर बेतहाशा पैसा बहाने की वजह से अधिकतर राज्‍यों के ऊपर भारी भरकम कर्ज ह ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. वैसे तो अपनी जनता के लिए कल्‍याणकारी और सुविधाओं वाली योजनाएं चलाना हर सरकार की जिम्‍मेदारी होती है, लेकिन मौजूदा भारतीय राजनीति में ‘मुफ्त’ बांटने का खेल इतना बढ़ गया है कि इस चक्‍कर में राज्‍यों का खजाना तेजी से खाली हो रहा.

SBI ने अपनी शोध रिपोर्ट Ecowrap में चेतावनी दी है कि राज्‍य अपना राजस्‍व बढ़ाने के बजाए जनता को मुफ्त में सुविधाएं उपलब्‍ध करा रहे हैं. इसके लिए न सिर्फ सरकारी खजाने का इस्‍तेमाल किया जा रहा, बल्कि केंद्र व आरबीआई से कर्ज भी जुटाया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज माफी और पुरानी पेंशन जैसी योजना राज्‍यों का आर्थिक ढांचा बिगाड़ सकती है.

किस राज्‍य में कितना हिस्‍सा खर्च

तेलंगाना सरकार अपनी कुल कमाई का 35 फीसदी हिस्‍सा जनता की योजनाओं पर खर्च करती है. इसके अलावा राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्‍य अपने कुल राजस्‍व का 5-19 फीसदी हिस्‍सा इन योजनाओं पर खर्च कर देते हैं. कुछ राज्‍यों के मामले में यह भागीदारी 63 फीसदी तक पहुंच जाती है.

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बढ़ रहा राजकोषीय घाटा

एसबीआई ने कहा है कि मुफ्त सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए अंधाधुंध तरीके से खर्च की जा रही रकम की वजह से राज्‍यों का राजकोषीय घाटा उनकी जीडीपी के अनुपात में लगातार बढ़ता जा रहा है. करीब 18 राज्‍यों ने बताया है कि उनका राजकोषीय घाटा महामारी के बाद 0.50 से 4 फीसदी तक बढ़ चुका है. सात राज्‍यों का घाटा तो उनके बजट अनुमान से भी कहीं आगे निकल गया है, जबकि 11 राज्‍य इस पर काबू पाने में सफल रहे हैं.

बिहार को सबसे ज्‍यादा घाटा

राज्‍य की जीडीपी के मुकाबले सबसे ज्‍यादा राजकोषीय घाटा बिहार को हुआ, जहां आंकड़ा 8.3 फीसदी पहुंच गया है. असम में यह 4.5 फीसदी, जबकि अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान का राजकोषीय घाटा भी उनके बजट अनुमान से कहीं आगे निकल चुका है.

अगर विकास दर की बात करें तो आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हरियाणा, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की विकास दर राष्‍ट्रीय विकास दर से कहीं आगे है. वहीं, 17 राज्‍यों की विकास दर राष्‍ट्रीय विकास दर के आंकड़े से पीछे चल रही है.

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बढ़ता जा रहा राज्‍यों का रूटीन खर्च

एसबीआई की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना महामारी की वजह से पूंजीगत खर्च में 36.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. स्‍वास्‍थ्‍य ढांचे को मजबूत बनाने, वाटर सप्‍लाई, शहरी विकास, सिंचाई और यातायात साधन बढ़ाने के लिए भी सरकारों को ज्‍यादा खर्च करना पड़ा.

राज्‍यों ने जिस तरह से खुद के ऊपर खर्चों का बोझ बढ़ाया है, चालू वित्‍तवर्ष 2022-23 में भी उनका खर्च 6 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. इस दौरान कुल राजस्‍व का 6.8 फीसदी वेतन पर, 8.7 फीसदी ब्‍याज भुगतान में और 12.2 फीसदी पेंशन में जाएगा.

Tags: Economy, Loan waiver, SBI Bank

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