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एसबीआई की नई रिपोर्ट में दावा, भारत में आय असामनता घटी, 1 दशक में राज्यों की औसत आय में भारी उछाल

महामारी के दौरान देश में असमानता घटी- एसबीआई

महामारी के दौरान देश में असमानता घटी- एसबीआई

एसबीआई की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के दौरान देश में असमानता घटी है और 2017 के बाद से आय असमानता में भी गिरावट देखी गई है. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गरीबी अनुपात भी एक दशक में थोड़ा नीचे आ गया है.

नई दिल्ली. एसबीआई की नई Ecowrap शोध रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2017 के बाद से भारत में आय असमानता (income inequality) में काफी गिरावट आई है. इसके साथ ही महामारी के दौरान असामनता में भी गिरावट देखी गई है. इस रिपोर्ट के लेखक एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गरीबी अनुपात 2011-12 के 21.9 फीसदी से घटकर 2020-21 में 17.9 फीसदी हो गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, शोध में पाया गया कि भारत में असमानता महामारी के दौरान कम हुई. इतना ही नहीं, एनबीईआर के शोध के मुताबकि, इस दौरान व्यावसायिक आय में भारी-उतार चढ़ाव के कारण अमीरों की आय में गिरावट देखी गई.

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औसत आय में वृद्धि
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों की औसत में भी वृद्धि दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 2001-02 में यह 18,118 रुपये थी जो बढ़कर 2011-12 में 68,845 रुपये हो गई और 2021-22 में यह 1,74,024 पर पहुंच गई. राज्यों की प्रति व्यक्ति आय में भी इसी तरह का इजाफा देखा गया है. प्रति व्यक्ति आय में सर्वाधिक वृद्ध गोवा और सिक्किम में दर्ज की गई है. इन दोनों राज्यों की औसत प्रति व्यक्ति आय बाकी सभी राज्यों की प्रति व्यक्ति आय के जोड़ से 3 गुना अधिक दर्ज की गई है. इस मामले में बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सबसे नीचे रहे.

भारत का गरीबी अनुपात
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का गरीबी अनुपात 2020-21 में घटकर 17.9 प्रतिशत हो गया जो 2011-12 में 21.9 प्रतिशत था. रिपोर्ट के अनुसार, “कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और सिक्किम सहित कुछ राज्यों में गरीबी बढ़ी है, जबकि असम, बिहार, छत्तीसगढ़, एमपी, यूपी, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित राज्यों में इसमें गिरावट आई है.”

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जीडीपी और जीएनआई का अंतर थोड़ा बढ़ा
एसबीआई ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) के बीच के अंतर का आंकड़ा भी पेश किया है. जीडीपी में उन वस्तुओं और सेवाओं की फाइनल वैल्यू होती है जो एक साल में किसी देश के अंदर उत्पादित होती हैं. वहीं, जीएनआई में राष्ट्रीय को मिली आय देखी जाती है. यह आय देश के अंदर या बाहर से प्राप्त हो सकती है. जीडीपी और जीएनआई का अंतर बताता है कि क्या देश शुद्ध रूप से प्राप्तकर्ता है या भुगतानकर्ता. वित्त वर्ष 2012-20 ये अंतर करीब 1.1 फीसदी के पास था. हालांकि, वित्त वर्ष 2021 में ये 1.3 और वित्त वर्ष 2022 में यह 1.6 फीसदी हो गया.

Tags: Poverty, Sbi, Study

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