लॉकडाउन के दौरान भी MSME वर्कर्स को देना होगा फुल पेमेंट, सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

लॉकडाउन के दौरान भी MSME वर्कर्स को देना होगा फुल पेमेंट, सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने MSME सेक्टर के एक एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें गृह मंत्रालय के आदेशनुसार वर्कर्स को लॉकडाउन के दौरान फुल पेमेंट करना है. एसोसिएशन का कहना है कि सेल्स नहीं होने की वजह से उनके पास पेमेंट के लिए पैसे नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 7:13 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME Sector) को झटका लगा है. वेज पेमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस सेक्टर के लिए गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा दिए गए आादेश में दखल नहीं देंगे. 29 मार्च को मंत्रालय ने आदेश दिया था, जिसके तहत लॉकडाउन के बीच वर्कर्स को फुल पेमेंट की बात कही गई थी. मंत्रालय ने अपने आदेश में साफ कहा था कि अगर कोई इसे नहीं मानता है तो उन्हें डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मुंब​ई स्थित ट्विन सिटी इंडस्ट्रीयल एम्प्लॉयर एसोसिएशन द्वारा दायर एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. इस याचिका के जरिए एसोसिएशन चाहता कि गृह मंत्रालय के इस आदेश पर स्टे लगा दिया जाए.

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प्रोडक्शन बंद होने से रेवेन्यू और सेल्स पर असर
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि लॉकडाउन की वजह से इंडस्ट्रीयल एक्टिविटी रूक गई है और प्रोडक्शन लगभग ठप पड़ चुका है. सेल्स और रेवेन्यू के तौर पर कोई पैसा नहीं आ रहा है. ऐसी आर्थिक स्थिति में छोटी इंडस्ट्रीज के लिए संभव नहीं है कि वो वर्कर्स को पेंमेंट कर पाएं.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि लॉकडाउन के समय में वर्कर्स को पेमेंट के लिए महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उन्हें धमकी दी जा रही है. जस्टिस रमन की बेंच ने इन सभी बातों को मानने से इनकार कर दिया.

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सरकार की तरफ से नहीं की गई कोई कार्रवाई
इस पूरे मामले में दखल से मना करते हुए उन्होंने कहा कि इस धमकी के बाद भी अभी तक गृह मंत्रालय की तरफ से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है. इस मामले में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले में अंतरिम निर्देश देने से मना कर दिया था. लुधियाना की 41 एमएसएमई एसोसिएशन द्वारा दायर किए गए इस याचिका पर कोर्ट केंद्र सरकार कोई नोटिस जारी नहीं किया.

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