SEBI ने स्टार्टअप की लिस्टिंग के लिए आसान किए नियम, प्री-इश्यू कैपिटल के लिए होल्डिंग पीरियड को किया कम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड

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सेबी (SEBI) ने स्टार्टअप्स की लिस्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए गुरुवार को प्रावधानों में कई ढील देने की घोषणा की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 9:14 PM IST
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नई दिल्ली. स्टार्टअप्स की लिस्टिंग को बढ़ाने के लिए मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (Securities and Exchange Board of India) ने गुरुवार को नियमों में कुछ रियायतें देने का फैसला किया है. इनमें प्री-इश्यू कैपिटल के लिए होल्डिंग पीरियड को कम करना भी शामिल है.

प्री-इश्यू कैपिटल के लिए होल्डिंग पीरियड घटाया

मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी स्टार्टअप की लिस्टिंग से पहले प्रमोटर को 2 साल तक 25 फीसदी प्री-इश्यू कैपिटल होल्ड करना पड़ता था. हालांकि नए नियम के मुताबिक, इस अवधि को घटाकर 1 साल कर दिया गया है.

30 दिनों तक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच सकते हैं निवेशक
सेबी ने स्टार्टअप्स को यह भी मंजूरी दी है कि वह लिस्टिंग से पहले इश्यू साइज का 60 फीसदी एलिजिबल इनवेस्टर्स को आवंटित कर सकता है. हालांकि इसका 30 दिनों का लॉकइन पीरियड होगा. यानी निवेशक 30 दिनों तक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच सकते हैं. इनोवेटर ग्रोथ प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कंपनी के टेकओवर के लिए मौजूदा 25 फीसदी के बजाय 49 फीसदी के लिए ओपन ऑफर लाना होगा.

स्टॉक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में लिस्ट होने के नियमों को भी बनाया आसान

सेबी ने कहा, "किसी स्टार्टअप कंपनी का अधिग्रहण होता है, शेयर होल्डिंग या वोटिंग राइट्स में कोई बदलाव होता है तो ओपन ऑफर लाना होगा." सेबी ने इनोवेटर ग्रोथ प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कंपनियों के स्टॉक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में लिस्ट होने के नियमों को भी आसान बनाया है.



सेबी ने कहा कि जो स्टार्टअप्स मुनाफे में नहीं हैं, उनमें अगर 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के पास है तो वह स्टॉक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में शामिल हो सकते हैं. पहले यह लिमिट 75 फीसदी थी लेकिन अब इसे घटा दिया गया है.
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