सेबी ने PNB हाउसिंग फाइनेंस-Carlyle ग्रुप के बीच 4 हजार करोड़ रुपये की डील को रोका, जानिए वजह

इस डील पर कुछ दिन पहले एक प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म ने सवाल उठाए थे.

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस के चार हजार करोड़ रुपये के शेयरों को कार्लाइल ग्रुप की अगुवाई वाली कंपनियों के समूह को आवंटित करने को रोक दिया है.

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    नई दिल्ली. मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने पंजाब नेशनल बैंक हाउसिंग फाइनेंस (PNBHF) को कार्लाइल ग्रुप (Carlyle Group) के साथ प्रस्तावित 4 हजार करोड़ रुपये की डील को रोकने के निर्देश दिए हैं. मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कहा है कि 31 मई को Extraordinary General Meeting बुलाने के लिए जारी की गई नोटिस, कंपनी के ऑर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (Article of Association -AOA) के नियमों के उलट है. जब तक कंपनी शेयरों का वैल्यूएशन नहीं करती है तब तक इस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

    बता दें कि कंपनी की EGM 22 जून के लिए तय की गई है. जिसमें कर्लाइल ग्रुप (Carlyle group) के लीडरशिप में बने एक कंसोर्टियम (consortium) को शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाना है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी में कार्लाइल ग्रुप के पास स्टेक होल्डर हो जाएंगे.

    मामले पर वित्त मंत्रालय की भी नजर
    इस पर PNBHF ने अपने बयान में कहा है कि कंपनी और उसके बोर्ड ऑफ डायेरक्टर्स को सेबी के लेटर को संज्ञान में लिया है. उन्हें भरोसा है कि कंपनी ने सेबी और कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में निर्धरित सभी नियमों का पालन किया है. इन नियमों में सेबी द्वारा निर्धारित प्राइसिंग रेगुलेशन (pricing regulations) भी शामिल हैं. कंपनी का यह भी मानना है कि इस तरह का Preferential Allotment कंपनी इसके शेयरहोल्डर्स औरसभी संबंध पक्षों (all relevant stakeholders) के हित में है. इस बयान में आगे कहा गया है कि कंपनी इस मामले में उठाए जाने वाले अगले कदमों पर विचार कर रही है. इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि इस डील पर वित्त मंत्रालय भी अपने नजर टिकाए हुए हैं.

    डील पर उठे सवाल
    दरअसल, इस डील पर कुछ दिन पहले एक प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म (proxy advisory firm) ने सवाल उठाए थे. इस प्रॉक्सी एडवाइडरी फर्म स्टेक होल्डर्स एम्पॉवरमेंट सर्विसेज (Stakeholders Empowerment Services -SES) ने डील की आलोचना करते हुए कहा था कि यह डील PNB हाउसिंग फाइनेंस और पंजाब नेशनल बैंक दोनों के शेयरहोल्डर्स के हितों के खिलाफ है. इसकी वजह ये है कि यह डील काफी कम वैल्यूएशन पर की गई है. फर्म का यहां तक कहना है कि इस डील की वैल्यूएशन कंपनी के बुक वैल्यू (book value of the company) से भी कम स्तर पर किया गया है. SES का मानना है कि यह डील कंपनी के AoA के मुताबिक नहीं हुई है. यह डील Ultra Vires के तहत किया गया है.

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