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सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाने के लिए SEBI की मंजूरी, गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क तैयार

 गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क को भी अनुमति दी गई है.

गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क को भी अनुमति दी गई है.

सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क को भी अनुमति दी गई है. सोशल एंटरप्राइसेज की ओर से फंड जुटाने के लिए SEBI के रेगुलेटरी दायरे के तहत सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाया जाएगा.

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    मुंबई . सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क को भी अनुमति दी गई है. सोशल एंटरप्राइसेज की ओर से फंड जुटाने के लिए SEBI के रेगुलेटरी दायरे के तहत सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाया जाएगा.

    गोल्ड एक्सचेंज के लिए फ्रेमवर्क को SEBI (वॉल्ट मैनेजर्स) रेगुलेशंस के तहत अप्रूवल दिया गया है.
    सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट के तहत इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रेसिट्स को सिक्योरिटीज के तौर पर इश्यू और नोटिफाइ किया जाएगा. विदेश में इस तरह के एक्सचेंज पहले से चल रहे हैं. देश में भी गोल्ड के ट्रेड में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक्सचेंज शुरू करने की मांग की जा रही थी.

    यह भी पढ़ें – 1 अक्टूबर से बदलेंगे कई नियम, जानिए क्रेडिट, डेबिट कार्ड के जुड़े नए नियम

    सोशल स्टॉक एक्सचेंज से गैर लाभकारी फर्मों को फंड हासिल करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इस कॉन्सेप्ट के बारे में अधिक जानकारी नहीं होने से फंडिंग देने वालों को इस एक्सचेंज पर लाने में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

    सोने का देशव्यापी मूल्य निर्धारित होगा
    भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन अजय त्यागी ने बताया कि गोल्ड एक्सचेंज देशभर में इजीआर के खरीद-फरोख्त का राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म होगा. इससे सोने का मानक निर्धारित करने के साथ उसकी देशव्यापी कीमत पर तय की जा सकेगी.

    इतना ही नहीं सोेने की गुणवत्ता और पारदर्शी निवेश सुनिश्चित होगा और निवेशकों को बेहतर पूंजी तलरता का लाभ मिलेगा. यानी, वे जब चाहें अपने ईजीआर को फिजिकल गोल्ड में बदलवा सकेंगे. इस तरह बिना किसी जोखिम के सोने में निवेश का पूरा लाभ मिलेगा. इसका प्रबंधन करने वाले वॉल्ट मैनेजर सेबी के मध्यस्थ के तौर पर पंजीकृत होंगे.

    सिल्वर ईटीएफ 
    सेबी निदेशक मंडल ने एक अहम कदम उठाते हुए चांदी का ईटीएफ शुरू करने के लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है. यह मंजूरी मौजूदा गोल्ड ईटीएफ के लिये रखे गये नियामकीय प्रक्रिया की तर्ज में सुरक्षा उपाय रखते हुये दी गई है.

    कैसे कमा करेगा सिल्वर ईटीएफ
    विकसित बाजारों में, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड लॉन्च करती हैं जो चांदी की कीमतों को दो तरह से ट्रैक करती हैं. जबकि कुछ योजनाएं डेरिवेटिव (वायदा में निवेश) के उपयोग से चांदी में रिटर्न की नकल करती हैं, अन्य इसके लिए भौतिक चांदी की छड़ें खरीदना पसंद करते हैं. कुछ ईटीएफ अंडरलाइंग मेटल के लिए लीवरेज्ड एक्सपोजर भी प्रदान करते हैं. ये योजनाएं शॉर्ट या लॉन्ग टर्म में दो गुना रिटर्न ऑफर करती हैं.

    सोने की तुलना में चांदी की प्रकृति अधिक अस्थिर होती है. भारत में, म्यूचुअल फंड को अपने द्वारा प्रबंधित गोल्ड ईटीएफ के लिए फिजिकल गोल्ड खरीदना पड़ता है. उम्मीद की जा रही है कि रेगुलेटर सिल्वर ईटीएफ के लिए फंड हाउस को फिजिकल सिल्वर बार बनाने की उसी प्रथा को जारी रखेगा.

    चांदी न केवल एक कीमती धातु है बल्कि इसके कई औद्योगिक उपयोग भी हैं. इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक सामान और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी किया जाता है.

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