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SEBI कर रहा है इन नियमों को बदलने की तैयारी, शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों पर होगा असर

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Updated: November 28, 2019, 10:15 AM IST
SEBI कर रहा है इन नियमों को बदलने की तैयारी, शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों पर होगा असर
कुछ सूचीबद्ध कंपनियों खासकर जो परिवार द्वारा संचालित कंपनी हैं, उनमें संबद्ध पक्षों के बीच सौदों के मामले में नियमों के अनुपालन को लेकर कुछ कमियां पायी गयी हैं.

कुछ सूचीबद्ध कंपनियों खासकर जो परिवार द्वारा संचालित कंपनी हैं, उनमें संबद्ध पक्षों के बीच सौदों के मामले में नियमों के अनुपालन को लेकर कुछ कमियां पायी गयी हैं.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 10:15 AM IST
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मुंबई. सेबी (SEBI) चेयरमैन अजय त्यागी ने बुधवार को कहा कि वह कंपनियों के लिये रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (Related party Transactions) से संबद्ध संचालन नियमों में सुधार पर गौर कर रहा है. त्यागी ने कहा कि नियामक के लिये उन ठोस सूचनाओं को सूचीबद्ध करना संभव नहीं है जिनकी जानकारी को साझा किया जाना जरूरी होना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी इन्फोसिस मामला सामने आने के कुछ सप्ताह बाद आई है. कुछ सूचीबद्ध कंपनियों खासकर जो परिवार द्वारा संचालित कंपनी हैं, उनमें संबद्ध पक्षों के बीच सौदों के मामले में नियमों के अनुपालन को लेकर कुछ कमियां पायी गयी हैं.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी संचालन पर आयोजित ओईसीडी सेमिनार में उन्होंने कहा, सेबी रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के मौजूदा नियमों में सुधार लाने पर गौर कर रहा है. सेबी चेयरमैन ने कहा कि समूह कंपनियों के बीच आपसी लेनदेन के बढ़ते उपयोग से कंपनी संचालन के स्तर पर विभिन्न मोर्चे खासकर संबद्ध पक्षों के बीच लेन-देन से जुड़े कई मामले आये हैं.

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उन्होंने कहा,‘‘समूह का जटिल ढांचा और संबद्ध पक्षों के बीच उलझाऊ लेन-देन से कोष की हेराफेरी, मनी लांड्रिंग आदि को लेकर चिंता बढ़ी है. इस प्रकार का ढांचा और लेन-देन विदेशों में होता है, सही रूप से सूचना नहीं आने से निगरानी और नियमों के प्रवर्तन में समस्या आती है.

त्यागी ने कहा कि सेबी ने नियमन को लेकर इस बारे में अपनी बातें ओईसीडी (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) को बतायी है और इस मामले में आगे और समर्थन उपलब्ध कराने की बात कही है. इस बीच, इन्फोसिस में गड़बड़ी को उजागर करने वाले (व्हिसलब्लोअर) मामले में उन्होंने किसी कंपनी का नाम लिये बिना कहा कि यह निर्णय करना मुश्किल है कि क्या ठोस सूचना है और इसीलिए यह कंपनियों पर ही छोड़ना बेहतर है.

हालांकि, त्यागी ने कहा कि खुलासा नहीं होना एक गंभीर मुद्दा है और इससे जुड़ी किसी भी पहलू की अनदेखी से निवेशकों की संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है.

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First published: November 27, 2019, 7:55 PM IST
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