स्टार्टअप्स को गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों में तब्दील करने के लिए सेबी कर रहा है बड़ी तैयारी, जाने सबकुछ

अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डेक ने गूगल, फेसबुक, एपल, एमेजॉन और नेटफ्लिक्स जैसे टेक स्टार्टअप कंपनियों की शुरुआत में काफी मदद की थी

इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) के जरिए सेबी भारत का अपना 'नैस्डेक' (Nasdaq) बनाने की तैयारी कर रहा है. भारत में भी स्टार्टअप (Startups) कंपनियों की लिस्टिंग (Listing) आसान कर फंड मुहैया कराने में मदद की जाएगी.

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    नई दिल्ली. अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डेक (Nasdaq) ने गूगल (Google), फेसबुक(Facebook), एपल(Apple), अमेजॉन(Amazon) और नेटफ्लिक्स जैसे टेक स्टार्टअप (Startups) कंपनियों की शुरुआत में काफी मदद की थी और आज ये कंपनियां काफी बड़ी हो गई हैं. इसे देखते हुए मार्केट रेगुलेटर सेबी इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) के जरिए भारत में नैस्डेक जैसा प्लेटफॉर्म शुरू करने की कोशिश कर रहा है.
    सेबी चाहता है कि आईजीपी के जरिेए भारत में भी स्टार्टअप कंपनियों की इसी तरह की मदद की जाए. भारत की शुरुआती टेक स्टार्टअप कंपनियां जैसे मेक माय ट्रिप और यात्रा नैस्डेक में लिस्टेड हैं. नैस्डेक टेक स्टार्टअप कंपनियों की लिस्टिंग में काफी मददगार साबित हुआ है जिससे इन कंपनियों को मार्केट से फंड जुटाने में आसानी हुई है. अभी भी ReNew Power और ग्रोफर्स जैसी कंपनियां एक स्पेशनल पर्पज एक्विजिशन कंपनी (SPAC) के जरिए अमेरिकी मार्केट का रूख किया है.
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    जोमेटो समेत कई स्टार्टअप्स आईपीओ लाने की तैयारी में
    भारत में कई स्टार्टअप कंपनियां IPO लॉन्च करने की तैयारी में हैं. इनमें ज़ोमाटो, डेलीवेरी और नायका हैं. सेबी ने इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म को आसान बनाकर नैस्डेक की तरह कर दिया है. सेबी भारत में स्टार्टअप कंपनियों की लिस्टिंग को बढ़ावा देना चाहता है.
    सेबी ने अब तक स्टार्टअप्स को यह सुविधाएं दी
    प्री-इश्यू होल्डिंग पीरियड को मौजूदा 2 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया. इस कदम से स्टार्टअप कंपनियों को योग्य निवेशकों को आवंटन करने में सहूलियत होगी. यह सुविधा अभी तक सिर्फ BSE और NSE में लिस्टेड कंपनियों के पास ही थी. सेबी के नए नियम के मुताबिक, IPO लाने वाली कंपनी इश्यू साइज का 60 फीसदी तक योग्य निवेशकों को आवंटित कर सकती है. इसका लॉकइन पीरियड 30 दिनों का होगा. अभी तक स्टार्टअप कंपनियों को इस तरह के आवंटन की अनुमति नहीं थी. निवेशक की प्री-इश्यू शेयरहोल्डिंग प्री-इश्यू कैपिटल का 25 फीसदी कर दिया गया है. यह पहले सिर्फ 10 फीसदी था.
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    स्टार्टअप्स मुनाफे में नहीं है तो भी स्टाॅक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में हो सकते हैं शामिल
    सेबी ने कहा कि जो स्टार्टअप्स मुनाफे में नहीं हैं उनमें अगर 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के पास है तो वह स्टॉक एक्सचेंज के मेन बोर्ड में शामिल हो सकते हैं. पहले यह लिमिट 75 फीसदी थी. लेकिन अब इसे घटा दिया गया है.इनोवेटर ग्रोथ प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड कंपनी के टेकओवर के लिए मौजूदा 25 फीसदी के बजाय 49 फीसदी के लिए ओपन ऑफर लाना होगा.

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