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सेंसेक्स 50,000 के पार! इन 6 वजहों से दलाल स्ट्रीट पर लग सकता है ब्रेक

बीएसई सेंसेक्स का मार्केट कैप 2.7 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है.
बीएसई सेंसेक्स का मार्केट कैप 2.7 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है.

Sensex Hits 50,000: 2020 में कोरोना वायरस महामारी के बाद भी घरेलू शेयर बाजार (Share Market) में अच्छी तेजी देखने को मिली. जनवरी 2021 में यही ट्रेंड दिख रहा है. हालांकि, इस जोरदार रैली के बाद भी कुछ ऐसे कारण हैं, जिनकी वजह से बाजार में गिरावट देखने को मिल सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 4:45 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल घरेलू शेयर बाजार (Share Market) में करीब 20 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी. नये साल में भी यही पॉजिटिव मोमेंटम देखने को मिल रहा है. बजट से ठीक पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 50,000 के रिकॉर्ड स्तर को पार करने में कामयाब रहा है. निफ्टी 14,700 के नये उच्चतम स्तर के पार ट्रेड कर रहा है. यही कारण रहा कि बुधवार के कारोबारी सत्र के बाद बीएसई का मार्केट कैप (BSE Market Cap) करीब 197.70 लाख करोड़ रुपये पर बंद हुआ था. अगर 73.03 रुपये प्रति डॉलर के हिसाब से कैलकुलेट करें तो यह करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचा चुका है. घरेलू शेयर बाजार के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.

बजट 2021 से ठीक पहले बाजार में इस उत्साह को लेकर एक्सपर्ट्स अब निवेशकों को सावधान करने में लगे हैं. हालिया तेजी की एक बड़ी वजह ग्लोबल लिक्विडिटी है, जोकि 20 जनवरी तक करीब 20,000 करोड़ रुपये के करीब है. बाजार में इस रैली को लेकर उनका कहना है कि बजट से पहले यह उत्साह अति-आशावाद को लेकर भी हो सकता है. हालांकि, वित्त मंत्री (Finance Minister) ने यह भी कहा है कि इस बार का बजट पिछले 100 सालों से भी बिल्कुल अलग होगा.





क्यों दिख रही बाजार में इतनी तेजी?
कैपिटलवाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के सीईओ रोहित गाडिया के हवाले से मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस बाजार के बजट में बड़े स्तर पर सपोर्ट और राहत का ऐलान हो सकता है. इससे दलाल स्ट्रीट पर साकारात्मकता देखने को मिलेगी. निवेशक कुछ बेहतर प्रोत्साहन प्रावधानों की उम्मीद कर रहे हैं, जोकि आर्थिक रिकवरी और ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी भी है. वित्त मंत्री द्वारा बजट को पिछले 100 साल में सबसे अलग होने के बयान ने भी आशावाद को बढ़ाया है. वर्तमान में मौजूदा तेजी बजट 2021 से उम्मीद को लेकर है. हालांकि, जनवरी में छुट्टियों के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भी इसमें भूमिका है.

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किन वजहों से बाजार में आ सकती है गिरावट?
अगर वित्त मंत्री द्वारा किया गया ऐलान निवेशकों की उम्मीद पर खरा नहीं उतरता है तो बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि वित्तीय घाटे के आंकड़े भी इस रैली पर ब्रेक लगा सकते हैं, लेकिन अगर लिक्विडिटी जारी रहती है तो यह ब्रेक ज्यादा दिनों के लिए नहीं होगा. कोविड-19 संक्रमण या दुनिया के कुछ हिस्से में लॉकडाउन के ऐलान से भी बाजार के सेंटीमेंट को धक्का लग सकता है. वैश्विक स्तर पर देखें तो अगर केंद्रीय बैंक अतिरिक्त प्रोत्साहन उपायों पर ब्रेक लगा देते हैं या मौद्रिक नीतियों में ढील देते हैं तो इससे विदेश निवेशकों धक्का लग सकता है.

अगर इसे 6 बिंदुओं में देखें तो बाजार में मौजूदा रैली पर ब्रेक लगाने के लिए ये प्रमुख कारण हो सकते हैंः

कंपनियों के तिमाही नतीजे: तीसरी तिमाही के नतीजे के बाद दलाल स्ट्रीट पर यह आसानी से देखा जा सकता है कि स्टॉक्स और मार्केट - दोनों ओवरवैल्यूड है. इसका बड़ा कारण तिमाही नतीजे को लेकर ऐलान हैं.

बजट से निराशा: इस बार के बजट में टैक्स/सरचार्ज, वित्तिय अनियमितता, ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत या दूसरी उम्मीदों पर खरा न उतरना बाजार के सेंटीमेंट को झटका देने के लिए पर्याप्त होगा. अगर बजट से पहले बाजार में करेक्शन नहीं आता है तो बजट के बाद देखने को मिल सकता है. हालांकि, अगर बजट में कुछ बड़ी घोषणाएं होती हैं तो करेक्शन नहीं आएगा.

केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाना: वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर शुरू होने और इसी क्रम में महंगाई बढ़ने का असर भी बाजार पर देखने को मिल सकता है. माना जा रहा है कि मौद्रिक नीतियों में ढील का यह दौर अब खत्म होने वाला है.

अमेरिकी टैक्स में बढ़ोतरी: अमेरिका के नये राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) अमेरिकी कॉरपोरेट्स व ज्यादा कमाई करने वाले लोगों पर ज्यादा टैक्स वसूलने का ऐलान कर सकते हैं. इसके अलावा टेक्नोलॉजी कंपनियों पर रेगुलेशन को कठिन करना या कुछ ऐसे स्टेप्स उठाना जिससे फार्मा कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा. इन वजहों से भी बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है.

कोविड: कोरोना वायरस महामारी पर अभी भी नियंत्रण नहीं मिला है. ऐसे में अगर एक बार फिर लॉकडाउन का दौर शुरू होता है तो बाजार में निराशा देखने को मिल सकती है.

डॉलर में मजबूती: अमेरिकी डॉलर में रिकवरी देखने को मिल रही है. डॉलर में तेजी का मतलब है कि उभरती बाजार का आकर्षण कम हो रहा. बाजार पर इसका भी असर दिखेगा.
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