Sensex- Nifty फिर नए उच्चतम स्तर पर पहुंचे, जानिए वो पांच महत्वपूर्ण बातें जो मार्केट को गति दे रही

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई. आज के कारोबार में सेसेंक्स और निफ्टी ने 52,626.64 और 15,835.55 का नया हाई लगाया. अच्छे ग्लोबल संकेतों से भी बाजार को सहारा मिलता दिख रहा है. आज के कारोबार में दिग्गजों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयर भी छलांग मारते नजर आ रहे हैं.

  • Share this:

मुंबई. आज के कारोबार में सेसेंक्स और निफ्टी ने 52,626.64 और 15,835.55 का नया हाई लगाया. अच्छे ग्लोबल संकेतों से भी बाजार को सहारा मिलता दिख रहा है. आज के कारोबार में दिग्गजों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयर भी छलांग मारते नजर आ रहे हैं. आज बीएसई स्मॉल और मिडकैप इंडेक्स ने भी 23,045.01 और 25,248.88 का स्तर छूआ है.

इस साल भारतीय बाजार दुनिया के टॉप परफार्मर

इस साल भारतीय बाजार दुनिया के टॉप परफार्मरों में रहा है. 2021 में अब तक सेसेंक्स में 10 फीसदी और निफ्टी में 13 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 231 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है.

बाजार में और तेजी आ सकती है
बाजार पर बात करते हुए Geojit Financial Services के वीके विजय कुमार ने कहा कि यूएस 10-year बॉन्ड यील्ड गिरकर 1.44 फीसदी के आसपास आ गया है जबकि डॉलर इंडेक्स 90 के आसपास चक्कर लगा रहा है जो इस बात का संकेत है कि बाजार में अभी और तेजी आ सकती है. लेकिन मिड और स्म़ॉलकैप स्पेस में अब तक आ चुकी जोरदार तेजी अब कुछ चिंता दे रही है.

यह भी पढ़ें- विवादों वाली करेंसी: क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज WazirX और उसके डायरेक्टर्स को ईडी का नोटिस, जानिए पूरा मामला

उन्होंने आगे कहा कि 2017 में स्मॉलकैप इंडेक्स में 60 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी लेकिन 2018 में यह पूरा झाग साफ हो गया. जिससे 2018 में स्मॉलकैप इंडेक्स में कदम रखने वाले निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा था.



उन्होंने आगे कहा कि लीडिंग फाइनेंशियल, आईटी, फार्मा और मेटल स्टॉक मजबूत नजर आ रहे हैं. इन स्टॉक में निवेशित बने रहें लेकिन स्म़ॉलकैप शेयरों में निवेश करते समय सावधानी बरतें.

बाजार में दम भरने वाले अहम कारण

1. भारत मे कोविड-19 के मामलों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 11 जून को लगातार चौथे दिन 1 लाख से कम केस आए हैं. देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोनावायरस संक्रमण के 91,702 नए केस सामने आए हैं. इसी के साथ संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 2,92,74,823 पहुंच गई है. इसमें एक्टिव केस 11,21,671 है जबकि 2,77,90,073 लोग इस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं. जबकि पिछले एक दिन में 1,34,580 लोग ठीक होकर घर लौटे हैं.

यह भी पढ़ें- कोरोनाकाल में 28 फीसदी बढ़ा ऑनलाइन साइबर फ्रॉड, देश को 25 हजार करोड़ का नुकसान

2. देश के तमाम राज्यों में लॉकडाउन में नरमी आ रही है जिससे मार्केट सेंटिमेंट को बूस्ट मिल रहा है. अनलॉक के आगे बढ़ने के साथ ही देश में मांग में सुधार आता दिख सकता है जिससे बाजार को बूस्ट मिलेगा. चूंकि इस साल पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन नहीं लगाया गया था इसलिए इसका असर भी 2020 की तुलना मे कम है.

बाजार दिग्गजों का कहना है कि आगे हमें hospitality, travel, और entertainment जैसे सेक्टर को पेंट-अप (pent-up) डिमांड का फायदा मिलता दिखेगा.

3. भारतीय इक्विटी बाजार में रिटेल निवेशकों का रेला आता दिख रहा है. देश के अग्रणी एक्सचेंज बीएसई में 7 जून 2021 तक 7 करोड़ यूजर्स रजिस्टर्ड हो चुके थे जो अपने आप में एक प्रतिमान है. कुछ एनालिस्ट का मानना है कि रिटेल इन्वेस्टरों की बढ़ती संख्या के कारण ही बाजार में उछाल देखने को मिल रहा है.

HDFC Securities के दीपक जसानी का कहना है कि कोविड-19 के बाद बाजार में रिटेल निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार की रैली की अहम वजह है. जसानी का यह भी कहना है कि रिटेल निवेशक की बढ़ती संख्या की वजह से आगे संस्थागत निवेशकों पर बाजार की निर्भरता कम होगी.

उन्होंने आगे कहा कि इससे देश में इक्विटी कल्चर के विस्तार में तेजी आएगी. हालांकि किसी भारी गिरावट के स्थिति में बहुत सेरिटेल इन्वेस्टर हायर लेवल पर फंस सकते है और कुछ समय के लिए बाजार से दूर जा सकते हैं.

4.इसके अलावा बाजार में तेज इकोनॉमी की ग्रोथ की उम्मीद से भी जोश आ रहा है. मार्केट में इस बात की उम्मीद नजर आ रही है कि एक बार कोविड-19 पर नियत्रंण के बाद इकोनॉमी तेजी से ग्रोथ करेगी.इस उम्मीद के चलते बाजार भी छलांग मार रहा है.

5. सामान्य मान्यता यह है कि कोरोना महामारी से निपटने का एक मात्र और सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है. वैक्सीनेशन की गति में तेजी आने के साथ ही बाजार में भी जोश आ रहा है. इसके अलावा आरबीआई द्वारा दरों में कोई बदलाव ना करने के संकेत से भी बाजार को सपोर्ट मिल रहा है.

लेकिन हमें ये ध्यान भी रखना होगा कि बाजार को लेकर कुछ जोखिम भी है. कोविड-19 की तीसरी लहर को लेकर चिंता बनी हुई है. बढ़ती महंगाई रंग में भंग डाल सकती है. इकोनॉमिक इंडीकेटर भी दबाव के संकेत दे रहे हैं और बाजार इकोनाॉमिक हालत के विपरीत रूख दिखा रहा है. इसका मतलब ये हैं कि एक तरफ को इकोनॉमी दबाव में है, वहीं, दूसरी तरफ बाजार झूम रहा है, ये अपने आप में एक बड़ा विरोधाभाष है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज