लोकसभा चुनाव नतीजों से पहले अब शेयर बाजार को सता रही हैं ये चिंताएं

एग्जिट पोल के बाद सोमवार को शेयर बाजार सातवें आसमान पर पहुंच गया था. लेकिन मंगलवार को सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली. इस पर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सिर्फ केंद्र में स्थिर सरकार बन जाने से शेयर बाजार के लिए सभी दिक्कतें खत्म नहीं होने जा रही हैं.

News18Hindi
Updated: May 22, 2019, 4:35 PM IST
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एग्जिट पोल के नतीजों से खुश बाजार को अब कई और चिंताएं सताने लगी हैं. गुरुवार यानी 23 मई को आने वाले चुनाव नतीजों से ठीक पहले सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए. लेकिन दिन-भर कारोबारियों के मन में संशय बना रहा. इसीलिए शुरुआती कुछ मिनटों के बाद ही सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली थी. हालांकि, अंत में बुधवार के दिन बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 140 अंक बढ़कर 39,110 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 29 अंक की मामूली बढ़त के साथ  11,737 पर बंद हुआ है. एक्सपर्ट्स का कहना है 23 मई के दिन छोटे निवेशकों को शेयर बाजार में किसी भी तरह का निवेश करने से बचना चाहिए, क्योंकि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा.

बाजार में जारी है तेज उठा-पटक: रविवार को एग्जिट पोल के नतीजों के बाद शेयर बाजार में काफी उत्साह नजर आया. सोमवार को शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स सातवें आसमान पर पहुंच गया. मंगलवार को मुनाफावसूली ने सूचकांकों को लाल निशान में पहुंचा दिया. मंगलवार को बाजार की स्थिति से पता चलता है कि सिर्फ केंद्र में स्थिर सरकार बन जाने से शेयर बाजार के लिए सभी दिक्कतें खत्म नहीं होने जा रही हैं.



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शेयर बाजार को सता रही है ये चिंताएं
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ रही है, कंपनियों की कमाई में उछाल की उम्मीदें कम हैं. NBFC सेक्टर का संकट कम नहीं हो रहा है. इन तमाम वजहों का असर चुनावी बादल छंटने के बाद आने वाले महीनों में बाजार पर पड़ सकता है.

बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता सुस्त होती अर्थव्यवस्था है. कंपनियों की कमाई में कमजोरी और ज्यादा वैल्यूएशन का असर भी सेंटीमेंट पर पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों में कमजोर मांग और NBFC की खस्ता हालत के चलते अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाला खपत (Consumption) का इकलौता दुर्ग भी लड़खड़ा रहा है.
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सरकार पर राजकोषीय दबाव तेजी से बढ़ रहा है. सरकार के रेवेन्यू में ज्यादा वृद्धि पर संशय है. निवेशकों के मन में यह सवाल गहरा रहा है कि अर्थव्यवस्था में सुधार कब और कैसे होगा. फंड मैनेजर्स का मानना है कि निजी कंपनियां भी खर्च करने में कोताही बरत रही हैं, क्योंकि कंपनी प्रमोटर्स भी कर्ज तले डूबे हैं.

इसके अलावा अगले कुछ घंटों के बाद चुनावी नतीजे उम्मीदों के उलट साबित हुए तो बाजार औंधे मुंह गिर सकता है. निवेश की दुनिया में स्थिरता का महत्व सबसे ज्यादा है. ऊपर बताए गए तमाम कारण बाजार की स्थिरता को घटाने या बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की अगुआई में सरकार बनती है और वह कैसे अर्थव्यवस्था की रेल को पटरी पर लेकर आती है.

ब्रोकर्स का बड़ा फैसला
लोकसभा चुनाव के लिए ब्रोकर्स भी तैयार हैं. बाजार में उतार-चढ़ाव देखते हुए ब्रोकर्स ने मार्जिन सीमा 20-30 फीसदी तक बढ़ा दिया है. लोकसभा चुनाव नतीजों के मद्देनजर कल (गुरुवार) बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना को देखते हुए मार्जिन सीमा बढ़ाई गई है. शुक्रवार तक मार्जिन में 20-30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. पोर्टफोलियो की सामने ट्रेडिंग की सीमा भी घटाई गई है. कॉल-पुट की बढ़ी हुई IV यानी Implied Volatility के चलते ये कदम उठाया गया है.
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