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Sensex VS Gold: दोनों को 50 हजार तक पहुंचने में लगे 21 साल, जानिए कहां मिला सबसे ज्यादा रिटर्न

21 साल पहले भी 1999 में सोना और सेंसेक्स लगभग एक समान स्तर पर थे.
21 साल पहले भी 1999 में सोना और सेंसेक्स लगभग एक समान स्तर पर थे.

1999 से 21 साल बाद भी सोने का भाव (Gold Rate) और Sensex का लेवल करीब-करीब एक समान ही है. लेकिन, इतनी लंबी अवधि में निवेशकों के लिए सेंसेक्स ज्यादा फायदेमंद साबित हुआ. हालांकि, छोटी अवधि में सेंसेक्स और सोना ने लगभग एक जैसा ही रिटर्न दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:49 AM IST
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नई दिल्ली. सोना या सेंसेक्स - लंबी अवधि में कहां सबसे ज्यादा बेहतर रिटर्न मिलेगा? छोटी अवधि में दोनों में लगभग एक समान रिटर्न मिल रहा है. करीब 21 साल पहले सेंसेक्स (Sensex) और गोल्ड दोनों एक समान स्तर पर थे और अब भी दोनों लगभग स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं. साल 1999 में सोने का भाव 4,234 रुपये प्रति 10 ग्राम था. उसी दौरान BSE Sensex 4,141 अंक के लेवल पर था. अब करीब 21 साल बाद भी दोनों लगभग एक सामन स्तर पर ही ट्रेड करते नज़र आ रहे हैं. गोल्ड की कीमतें इस दौरान 12 गुना बढ़कर 49,659 रुपये प्रति 10 ग्राम हो चुकी हैं. दूसरी ओर सेंसेक्स भी करीब 12 गुना बढ़कर 49,000 के आसपास पहुंच चुका है.

लेकिन, इन 21 सालों के दौरान सेंसेक्स ने रिटर्न के मामले में गोल्ड से करीब 50 फीसदी ज्यादा का रिटर्न दिया है. इसका प्रमुख कारण यह है कि सेंसेक्स का वास्तविक रिटर्न प्राइस रिटर्न्स इंडेक्स (PRI) के आधार पर नहीं है. बल्कि यह टोटल रिटर्न्स इंडेक्स (TRI) पर आधारित होता है. PRI के जरिए केवल पूंजी में वृद्धि के बारे में जानकारी मिलती है. जबकि, टीआरआई में पूंजीगत वृद्धि के अतिरिक्त डिविडेंड, ब्याज और कैपिटल गेन्स के बारे में जानकारी मिलती है.

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कैसे करीब 50 गुना ज्यादा फायदेमंद रहा सेंसेक्स
पिछले 21 साल में सेंसेक्स और निफ्टी 4,100 - 4,200 से बढ़कर 50,000 के करीब पहुंच चुके हैं. सेंसेक्स का टीआरआई 30 जून 1999 के 4,356 से बढ़कर फिलहाल करीब 72,200 से अधिक पहुंच गया है. इसमें करीब 17 गुना का इजाफा हुआ है. सेंसेक्स का टीआरआई 14.31 फीसदी सीएजीआर के हिसाब से बढ़ा है. अब यह गोल्ड की तुलना में 22,500 यानी करीब 45 फीसदी ज्यादा है.

वास्तविक रिटर्न जानने के लिए क्यों जरूरी है टीआरआई?
टीआरआई ने केवल किसी स्टॉक की वजह से इंडेक्स में बढ़त के बारे में जानकारी देता है, ​बल्कि इस स्टॉक पर मिलने वाले डिविडेंड के बारे में भी जानकारी देता है. किसी इंडेक्स स्टॉक में निवेश करने वाले निवेशक को उस इंडेक्स के रिटर्न्स के बारे पता करना चाहिए. तभी उस ​इंडेक्स के वास्तविक रिटर्न के बारे में जानकारी मिल सकेगी.

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जानकारों का भी यही कहना होता है कि अलग तरह के एसेट क्लास के बीच रिटर्न के बारे में जानकारी पता करने के लिए रिटर्न्स इंडेक्स के जरिए ही वास्तविक रिटर्न के बारे में सटीक जानकारी जुटाई जा सकती है. इक्विटी रिटर्न मालूम करने के लिए यह सबसे बेहतर तरीका इसलिए भी माना जाता है, क्योंकि इसमें पूंजीगत वृद्धि के अलावा डिविडेंड्स को भी शामिल किया जाता है.
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