सितंबर के आंकड़ों ने दिए आर्थिक रिकवरी के संकेत, पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था

कई इंडिकेटर्स ने आर्थिक रिकवरी के संकेत दिए हैं.
कई इंडिकेटर्स ने आर्थिक रिकवरी के संकेत दिए हैं.

वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) का कहना है कि अर्थव्यवस्था अब सामान्य स्तर पर पहुंच रही है. सितंबर माह में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) के आंकड़े समेत अन्य इंडिकेटर्स से इस बात के संकेत मिल रहे हैं. मंत्रालय ने कहा कि आगे भी सरकार कोई फैसला लेने से पीछे नहीं हटेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 11:33 AM IST
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नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने शनिवार को कहा कि सितंबर माह में अर्थव्यवस्था के सामान्य होने के संकेत मिले हैं और सरकार आम लोगों को संकट से निकालने के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगी. मंत्रालय ने कहा कि बीते 6 महीने में कोविड-19 संकट के दौरान, अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए ​वित्तीय प्रोत्साहन (Fiscal Stimulus) जारी किए. सरकार ने सभी स्टेकाहेल्डर्स और नागरिकों को ध्यान में रखकर फैसले लिए हैं. आर्थिक रिकवरी (Economic Recovery) प्रक्रिया में इस बात पर भी फोकस किया गया कि डिमांड और सप्लाई को दुरुस्त किया जाए. इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी.

मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया, 'कोरोना वायरस महामारी के बीच बीते कुछ महीनों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर अब अर्थव्यवस्था में दिखने लगा है. सितंबर महीने में आर्थिक वृद्धि के सामान्य होने के संकेत मिलने लगे हैं.'

जीएसटी कलेक्शन से मिल रहा व्यापारिक गतिविधियां तेज होने का संकेत
मंत्रालय ने आगे कहा कि अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के लिए और लोगों की जीविका बेहतर करने के लिए सरकार सभी संभावनाओं पर काम कर रही है. आम लोगों का जीवन बेहतर करने के लिए वित्त मंत्रालय कोई भी फैसला लेने से पीछे नहीं हटेगा. इसमें कहा गया कि लॉकडाउन में चरणबद्ध तरीके से ढील देने के बाद अर्थव्यवस्था अब रफ्तार पकड़ने लगी है. ​व्यापारिक गतिविधियों के शुरू होने का असर अब दिखने लगा है. सितंबर महीने में 95,480 करोड़ रुपये के जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) से ही इस बात के संकेत मिल रहे हैं. यह साल-दर-साल आधार पर सितंबर महीने में 4 फीसदी बढ़ा है.
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इन इंडिकेटर्स से मिल रहा आर्थिक रिकवरी का संकेत
वित्त मंत्रालय ने बताया कि रेलवे की माल ढुलाई से होने वाली कमाई 13.5 फीसदी बढ़ी है. इस प्रकार बिजली की मांग 4.2 फीसदी बढ़ी है. ट्रैक्टर की बिक्री में इजाफा हुआ है. बेहतर मॉनसून के साथ ग्रोथ के अन्य इंडिकेटर्स जैसे पीएमआई मैन्युफैक्चरिंग, 8 कोर सेक्टर्स के इंडेक्स, ई-वे बिल्स, निर्यात, खरीफ की बुवाई, कार्गो ट्रैफिक और पैसेंजर वाहनों की बिक्री आदि में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इन सब बातों से मंत्रालय को भरोसा है कि अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के असर को कम करने के फैसलों का लाभ मिलने लगा है.

दो राहत पैकेज का ऐलान कर चुकी है सरकार
बता दें कोरोना काल में केंद्र सरकार ने दो वित्तीय पैकेज का ऐलान किया था. सबसे पहले 16 मार्च को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PMGKP) और फिर इसके बाद करीब 21 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का ऐलान किया गया. दूसरे राहत पैकेज में फिस्कल और मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों को भी शामिल किया गया था.

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इन पैकेज के तहत केंद्र सरकार ने कई उपाय किए, जिसमें वरिष्ठ ना​गरिकों , विधवा महिलाओं, दिव्यांगों, महिला जन धन खाताधारकों, किसानों के बैंक अकाउंट में सीधे पैसे ट्रांसफर किए गए. हेल्थकेयर सेक्टर में काम करने वाले लोगों को इंश्योरेंस कवरेज दिया गया और मनरेगा के तहत भी लोगों को काम दिए गए.

किन्हें मिला राहत पैकेज से लाभ
कोविड-19 संकट के बीच मंत्रालय द्वारा उठाए गए इन कदमों से 42 करोड़ लोगों के हाथ में सरकार ने 68,921 करोड़ रुपये दिए . इसमें पीएम​-किसान स्कीम के तहत 8.94 करोड़ किसानों को दो इनस्टॉलमेंट में 17,891 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. इसके अलावा, 20.65 करोड़ महिलाओं के जनधन खातों में 30,952 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. करीब 1.82 करोड़ कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को 4,987.18 करोड़ रुपये का फाइनेंशियल सपोर्ट दिया गया. 40.59 लाख ईपीएफओ सदस्यों ने नॉन​-रिफंडेबल एडवांस के तौर पर 10,615 करोड़ रुपये अपने पीएफ अकाउंट से निकाले.

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इसके अलावा करीब 20 करोड़ परिवारों को हर महीने 1 किलो दाल 8 महीनों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है. 81 करोड़ लाभार्थियों को 8 महीनों के लिए 5 किलो अनाज दिया जा रहा है. इसमें देश की आबादी के करीब 60 फीसदी लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है.
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