खुशखबरी! फिर सस्ता हो सकता है कर्ज, RBI गवर्नर ने दिए संकेत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले महीने यानी अगस्त में मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 1:17 PM IST
खुशखबरी! फिर सस्ता हो सकता है कर्ज, RBI गवर्नर ने दिए संकेत
खुशखबरी! फिर सस्ता हो सकता है कर्ज, RBI गवर्नर ने दिए संकेत
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Updated: July 22, 2019, 1:17 PM IST
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले महीने यानी अगस्त में मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है. यदि केंद्रीय बैंक ऐसा करता है तो यह लगातार चौथा मौका होगा जब वह ब्याज दर घटाएगा. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह जानकारी दी. बता दें कि आरबीआई ने 2019 में रेपो रेट में अब तक 0.75 फीसदी की कटौती की है. हालांकि बैंकों ने अभी तक सिर्फ 15-20 बेसिस प्वाइंट्स का फायदा दिया है. आरबीआई की अगली पॉलिसी बैठक 7 अगस्त को होगी.

25 बेसिस प्वाइ्ंट्स की कटौती संभव
सोमवार को टाइम्स ऑफ इंडिया और ब्लूमबर्ग में प्रकाशित अलग-अलग साक्षात्कार में दास ने कहा कि अगला पॉलिसी निर्णय आने वाले डाटा, खासकर महंगाई डाटा पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा, 'हमने अभी तक 75 बेसिस प्वाइंट ब्याज दरें घटाई हैं और हम अकोमोडेटिव पर शिफ्ट हो गए हैं. अकोमोडेटिव पर शिफ्ट होने का मतलब है कि कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो सकती है.' दास के कमेंट के बाद 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 9 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 6.45 फीसदी हो गई.

दास ने कहा, 'आरबीआई ने 2019 की शुरुआत से अभी तक ब्याज दरों में 75 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की है, लेकिन बैंकों ने 15-20 बेसिस प्वाइंट्स कर्ज सस्ते किए हैं.'

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देश की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए लिया फैसला
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सरकार ने जुलाई में फिस्कल डेफिसिट टारगेट को 3.4 फीसदी से घटाकर 3.3 फीसदी कर दिया है, जो फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में 3.4 फीसदी था.

ब्याज दरें (रेपो रेट) घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी आरबीआई से फंड (पैसे) लेंगे, उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा. सस्ती दर पर बैंकों को मिलने वाले फंड का फायदा बैंक अपने उपभोक्ता को भी देंगे. यह राहत आपके साथ सस्ते कर्ज और कम हुई ईएमआई के तौर पर बांटी जाती है. इसी वजह से जब भी रेपो रेट घटता है तो आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है. साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग हैं उनकी ईएमआई भी घट जाती है.

क्या होगा ग्राहकों पर असर?
> जिन ग्राहकों के लोन एमसीएलआर से जुड़े हैं, उनकी ईएमआई का बोझ कम होगा. इसके लिए जरूरी है कि बैंक एसीएलआर में कटौती करे. हालांकि, फायदा तभी से शुरू होगा जब लोन की रीसेट डेट आएगी. अमूमन बैंक छह महीने या सालभर के रीसेट पीरियड के साथ होम लोन की पेशकश करते हैं. रीसेट डेट आने पर भविष्य की ईएमआई उस समय की ब्याज दरों पर निर्भर करेंगी.

> जिन ग्राहकों के लोन अब भी बेस रेट या बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर) से जुड़े हैं, उन्हें अपने होम लोन को एमसीएलआर आधारित व्यवस्था में स्विच कराने पर विचार करना चाहिए. कारण है कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता अधिक है. इनमें पॉलिसी रेट में कटौती का असर तुरंत दिखता है.

>> नए होम लोन ग्राहक एमसीएलआर व्यवस्था में लोन ले सकते हैं. उनके पास एक्सटर्नल बेंचमार्क व्यवस्था का मूल्यांकन करने का भी विकल्प है. इसके लिए उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा. इस तरह की व्यवस्था पर दिशानिर्देश आने बाकी हैं.

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First published: July 22, 2019, 12:43 PM IST
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