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शेयर बाजार में आज 4.5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए क्या हैं इस गिरावट के 5 मुख्य कारण

सोमवार को शेयर बाजार में निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

सोमवार को शेयर बाजार में निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

सोमवार को शेयर बाजार में निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. आज की गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण है. इन पांच का ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की चाल पर काफी हद तक निर्भर करता है.
क्रेडिट सुइस: पहली बार किसी बड़ी कंपनी की खराब स्थिति को लेकर खबर आई है.
ओपेक+ ने कहा है कि रोज 1 मिलियन बैरल से अधिक उत्पादन कम करने पर विचार करेगा.

नई दिल्ली. सोमवार को शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेशकों को 4.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. पूरे दिन बाजार ग्लोबल सेल-ऑफ अथवा बिकवाली के प्रेशर में दिखा. अंत तक सेंसेक्स 638 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी भी अपने अहम स्तर 17,000 को तोड़कर नीचे बंद हुआ.

निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि एक दिन बड़ा उछाल आता है तो अगले ही दिन बाजार नीचे क्यों गिर जाता है. आज की गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण है. ये कारण आपको जान लेने चाहिए. इन पांच कारणों में ग्लोबल सेल-ऑफ के अलावा क्रेडिट सुइस द्वारा री-स्ट्रक्चरिंग का ऐलाना, क्रूड ऑयल की कीमतें, रुपये पर दबाव, और FIIs द्वारा पैसा निकालने जैसे कारण शामिल हैं.

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कारण 1: वैश्विक बाजारों में गिरावट
भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों की चाल पर काफी हद तक निर्भर करता है. यूरोपीय STOXX 600 सूचकांक 1.4% नीचे था. लंदन का FTSE-100 स्टॉक इंडेक्स गिरकर 1% नीचे था. जापानी बाजार को छोड़कर एशियाई शेयर ज्यादातर नकारात्मक रहे. जापान के बाजार गिरावट से इसलिए बचे रहे, क्योंकि उन्हें एनर्जी और सेमीकंडक्टर शेयरों का सपोर्ट मिल गया.

कारण 2: क्रेडिट सुइस संकट
स्विस बैंकिंग दिग्गज क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) की 27 अक्टूबर को घोषित की जाने वाली प्रस्तावित पुनर्गठन योजना के बारे में अफवाहों से बाजार गुलजार रहा. पिछले कुछ दिनों से चर्चा है कि बढ़ती महंगाई के कारण कंपनी अपनी फाइनेंशियल स्थिति को लेकर मुश्किलों से गुजर रही है. इस बार की मंदी की खबरों के बीच पहली बार किसी बड़ी कंपनी की खराब स्थिति को लेकर खबर आई है. बैंक के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (Credit Default Swaps) में करीब 15 फीसदी का उछाल है. CDS दर्शाता है कि आने वाले समय में कंपनी के डिफॉल्टर होने की कितनी संभावना है.

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कारण 3: कच्चे तेल की कीमतें
तेल की कीमतें 4% से अधिक उछल गईं हैं, क्योंकि ओपेक + ने कहा है कि यह प्रति दिन 1 मिलियन बैरल से अधिक उत्पादन को कम करने पर विचार करेगा. कोविड -19 महामारी की शुरुआत के बाद से यह अब तक की इसकी सबसे बड़ी कटौती होगी. यदि ऐसा होता है तो जाहिर है क्रूड ऑयल के दाम और भी बढ़ सकते हैं.

कारण 4: रुपये पर दबाव
भारतीय रुपया पिछले काफी समय से दबाव में है. आज घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.67% कम होकर 81.89 पर कारोबार कर रही थी. हालांकि दो दिन पहले ही यह 82 रुपये के स्तर को पार कर गई थी. हालांकि रुपये में गिरावट निर्यातकों के लिए सकारात्मक है, लेकिन इससे आयात महंगा हो जाता है. चूंकि भारत काफी वस्तुओं का आयात करता है तो इसका सीधा असर व्यापार घाटे के आंकड़े को बढ़ाने पर पड़ेगा.

कारण 5: FIIs द्वारा फिर से बिकवाल होना
21 सितंबर को UC फेड की ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक या FIIs भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध बिकवाल बन गए हैं. शुक्रवार को एफआईआई ने 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी निकाल दी थी. NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने एफआईआई 7,624 करोड़ रुपये के शुद्ध विक्रेता थे.

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