रेलवे को तगड़ा झटका! यात्री किराये से आय में हुआ भारी नुकसान, जानें हजारों करोड़ के घाटे की कैसे की भरपाई

Indian Railways को कोरोना संकट के दौरान तगड़ा घाटा झेलना पड़ा है.

Indian Railways को कोरोना संकट के दौरान तगड़ा घाटा झेलना पड़ा है.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) को वित्त वर्ष 20019-20 में यात्री किराये (Train Fare) से 53,525.57 करोड़ रुपये की आमदनी हुई, जो चालू वित्त वर्ष में घटकर 15,507.68 करोड़ रह गई. हालांकि, रेलवे ने इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई मालढुलाई से होने वाली आय (Freight Revenue) से की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 5:08 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) को कोविड-19 महामारी की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान आमदनी के मामले में तगड़ा झटका (Revenue Loss) लगा है. दरअसल, कोरोना संकट के बीच ट्रेन परिचालन पर लगाई गई रोक के कारण यात्री किराये से होने वाली आय (Passenger Fare Income) में रेलवे को 38,017 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि, आम लोगों की परेशानियों को ध्‍यान में रखकर चलाई गईं श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों (Special Trains) से घाटे की कुछ भरपाई हुई है.

माल ढुलाई से आय को बरकरार रखने पर पूरा जोर

भारतीय रेलवे ने कोरोना संकट के बीच माल ढुलाई के नए तरीकों को अपनाया. इससे रेलवे का माल ढुलाई से राजस्व (Freight Revenue) पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है. रेलवे ने नियमित पैसेंजर ट्रेनों (Passenger Trains) का परिचालन अब तक शुरू नहीं किया है, लेकिन अब उसका ध्यान माल ढुलाई से राजस्व को बरकरार रखने पर है. रेलवे माल ढुलाई से होने वाली आय में 22 मार्च 2021 तक वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले 1,868 करोड़ रुपये की वृद्धि हासिल करने में सफल रहा है. भले ही यह महज 2 फीसदी की वृद्धि है, लेकिन इससे कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन की समस्या से उबरने में काफी सहायता मिली है.

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यात्री किराये से आमदनी में 71 फीसदी की हुई कमी

रेलवे के यात्री किराये से होने वाली आय की बात की जाए तो वित्त वर्ष 20019-20 में यह 53,525.57 करोड़ रुपये रही, जो चालू वित्त वर्ष में घटकर 15,507.68 करोड़ रह गई. यह पिछले साल के मुकाबले 71.03 फीसदी कम है. अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के बीच यात्री भाड़े से 12,409.49 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह राशि 48,809.40 करोड़ रुपये थी. रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने की शुरुआत की. बता दें कि 1 मई से 30 अगस्त 2020 के बीच रेलवे ने 4000 श्रमिक विशेष ट्रेनों का परिचालन किया और 23 राज्यों से करीब 63.15 लाख श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाया.
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