चीन से निकल रही कंपनियां कैसे आएंगी भारत, SIAM के प्रेसिडेंट ने बताया तरीका

SIAM के प्रेसिडेंट ने कहा, निवेश को भारत लेन का करें प्रयास

SIAM के प्रेसिडेंट केनिची आयुकावा ने कहा कि वाहन और कलपुर्जा क्षेत्र को अपने निवेश को भारत लाने का प्रयास करना चाहिए या फिर उनके साथ गठजोड़ के जरिए देश में उत्पादन बढ़ाना चाहिए.

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    ऑटो इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने कहा है कि भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए कई कंपनियां चीन से अपने कारखानों को अन्य देशों में ले जा रही हैं. SIAM के प्रेसिडेंट केनिची आयुकावा ने कहा कि वाहन और कलपुर्जा क्षेत्र को उस निवेश को भारत लाने का प्रयास करना चाहिए या फिर उनके साथ गठजोड़ के जरिए देश में उत्पादन बढ़ाना चाहिए. भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एसीएमए) के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए आयुकावा ने कहा कि वह जापान के विनिर्माताओं के साथ कारोबार से संबंधित कुछ बैठकें आयोजित करने का प्रयास करेंगे, ताकि मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन दिया जा सके.

    आयुकावा ने कहा, निवेश को भारत लाने का प्रयास करें 
    आयुकावा देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के एमडी एवं सीईओ हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी उठाए जाने चाहिए. इसके अलावा कलपुर्जा विनिर्माताओं को आंतरिक पुर्जों तथा कच्चे माल का अधिकतम स्थानीयकरण करना चाहिए. यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुकूल होगा.

    आयुकावा ने कहा, ‘आपदा में भी अवसर है. भू-राजनीतिक तनाव के जोखिमों को कम करने के लिए कई कंपनियां चीन से अपने संयंत्रों को हटा रही हैं. हमें उस निवेश को भारत में लाने का प्रयास करना चाहिए या फिर उनके साथ गठजोड़ कर देश में उत्पादन करना चाहिए.’ आयुकावा ने कहा कि चुनौतियां अभी कायम हैं. उन्होंने कलपुर्जा उद्योग का आह्वान किया कि वह इस चुनौतीपूर्ण समय में अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उत्पादन बढ़ाए.

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    जापान भी है चीन को झटका देने की तैयारी में
    चीन को एक के बाद एक झटके लगने का सिलसिला लगातार जारी है. भारत के बाद अब जापान भी चीन पर स्ट्राइक करने की तैयारी में है. जापान ने कहा है कि अगर कोई जापानी कंपनी चीन को छोड़कर भारत में आकर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाती है तो उसे जापान की सरकार वित्तीय मदद देगी. जापान सप्लाई चेन या कच्चे माल के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है, इसलिए जापान सरकार ने ऐसा फैसला किया है. जापान चीन के बजाय आसियान देशों में अपने सामान तैयार करेगा. साथ ही जापान ने भारत और बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल किया है, जहां जापानी कंपनियां अपने उत्पाद तैयार कर सकती हैं. जापान के इस फैसले से दोनों देशों को लाभ होगा.

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