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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देश को होगा लाखों करोड़ों का फायदा, जानिए पूरा मामला....

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देश को होगा लाखों करोड़ों का फायदा, जानिए पूरा मामला....

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देश को होगा लाखों करोड़ों का फायदा, जानिए पूरा मामला....

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम से देश को होगा लाखों करोड़ों का फायदा, जानिए पूरा मामला....

2 अक्टूबर से भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) बैन होने वाली है. क्या आपने कभी सोचा है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था (Economy) को कितना नुकसान पहुंचता है. एक टन प्लास्टिक के बदले हमें 33 हजार डॉलर का नुकसान होता है.

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  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए भाषण में देश को सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) से मुक्त बनाने की अपील की थी. उन्होंने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन इस अभियान के शुरू होने की बात कही. इस पर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि किसी भी राज्य में जब प्लास्टिक पर बैन (Plastic Ban) लगता है, तो अक्सर खबर मिलती है कि इस वजह से कारोबार को इतना नुकसान हुआ. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था (Economy) को कितना नुकसान पहुंचता है.

    आइए जानें इसके बारे में...

    कितना होता है नुकसान?
    'द गॉर्डियन' में छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रत्येक टन प्लास्टिक के बदले हम 33 हजार डॉलर (23 लाख 74 हजार रुपये) के पर्यावरणीय मूल्य का नुकसान करते हैं. हम एक साल में लगभग 300 मिलियन टन (3000 लाख टन) प्लास्टिक प्रोड्यूस करते हैं. इसका सबसे ज्यादा असर फिशिंग इंडस्ट्री और टूरिज्‍म इंडस्ट्री पर पड़ रहा है.



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    समुद्र के किनारे और उसके सहारे अपना जीवन-यापन करने वालों की बड़ी संख्या है. समुद्र का अपना एक नेचुरल कैपिटल है, इस पर आधारित इकोनॉमी को मरीन इको-सिस्टम कहा जाता है. 'द गार्डियन' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल हम लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के मरीन इकोसिस्टम वैल्यू का नुकसान कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा होने में बहुत समय नहीं है और 2050 तक यह खतरनाक स्थिति आ सकती है. एक साल में हम लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र में डाल देते हैं. इसका नुकसान सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है.



    टूरिज्‍म इंडस्ट्री को नुकसान-प्लास्टिक ने टूरिज्‍म इंडस्ट्री को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. समुद्री बीच टूरिज्‍म के लिए बड़ा केंद्र हैं. गोवा जैसे राज्य इन समुद्री किनारों से पैसा कमा रहे हैं. प्लास्टिक का असर इन पर भी बहुत गहरा पड़ा है. जो प्लास्टिक और कचरा समुद्र में जाता है, हाई टाइड के समय समुद्र उसे वापस किनारे पर छोड़ जाता है. इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ता है.

    इसी साल जनवरी में समुद्र ने हाई डाइड के दौरान 300 टन कचरा जुहू बीच पर छोड़ दिया था. Impacthub में छपी रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे ही कचरे की वजह से साउथ कोरिया के टूरिज्‍म को साल 2010 से 2011 के बीच 29 मिलियन यूरो ( करीब 2 अरब 30 लाख रुपये) का नुकसान उठाना पड़ा.

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    खेती को हो रहा है बड़ा नुकसान-आज की परिस्थिति में ग्रीन हाउस कल्टीवेशन, माइक्रो इरिग्रेशन और प्लास्टिक उपकरण के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल रहा है. इसका फायदा तुरंत दिख रहा है, लेकिन इसका नुकसान ज्यादा बड़ा है. कृषि विशेषज्ञ नवीन सिंह के मुताबिक, इसका असर पैदावार पर ज्यादा नहीं पड़ रहा है, लेकिन फूड क्वालिटी और वॉटर रिसोर्स पर काफी असर है. प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन खेतों के माध्यम से हमारे फूड चेन में शामिल हो रहे हैं.



    वहीं, प्लास्टिक टूटकर पहले माइक्रो प्लास्टिक और फिर नैनो प्लास्टिक में बदल जाता है. यह अगर खेत के मिट्टी में मिल जाए तो सिंचाई सही तरीके से नहीं हो पाती. नवीन के अनुसार, इसका असर पशुओं पर भी पड़ता है. पशु और खेत दोनों ही ग्रमीण अर्थव्यस्था के मुख्य अंग हैं.

    प्लास्टिक उत्पादन से एक तरफ आय तो हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ इसका बुरा प्रभाव सीधे अर्थव्यवस्था पड़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा इम्पेक्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. चाहे वह किसान हो या मछुआरा. ये दोनों ग्रामीण इकोनॉमी के प्रमुख अंग हैं.

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    Tags: Modi, Modi government, PM Modi, Uttarakhand plastic ban

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