म्युचूअल फंड में SIP के जरिए यहां लगाए पैसा, मिलेगा टैक्स छूट में डबल मुनाफा!

SIP (सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्टमेंट किया है तो आप भी 80C के तहत छूट मिलती हैं. आइए जानें कैसे और कहां...

News18Hindi
Updated: July 21, 2019, 8:21 AM IST
म्युचूअल फंड में SIP के जरिए यहां लगाए पैसा, मिलेगा टैक्स छूट में डबल मुनाफा!
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत SIP के जरिए म्यूचुअल फंड स्कीम में छूट मिलती है.
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Updated: July 21, 2019, 8:21 AM IST
ज्यादातर लोग शेयर मार्केट से पैसे कमाने के बारे में पढ़ते और सुनते तो जरूर हैं, लेकिन ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाते हैं. कई बार मार्केट में पैसा लगाना उनके लिए ऐसा साबित होता है कि वो अपनी जमा पूंजी भी खो देते हैं. अगर आप Mutual Fund में पैसा लगाकर मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं. लेकिन इसकी जानकारी नहीं है. तो ये खबर आपके लिए बेहद काम की है. आज हम आपको म्यूचुअल फंड एसआईपी की जानकारी दे रहे हैं. साथ ही म्यूचुअल फंड्स की उनकी स्कीम के बारे में बता रहें है जिनमें पैसा लगाकर टैक्स भी बचाया जाता है.  SIP (सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में इनवेस्टमेंट किया है तो आप भी 80C के तहत छूट मिलती हैं. लेकिन आपको बता दें कि इसके तहत सभी SIP पर छूट नहीं मिलती है.

आइए जानें इसके बारे में...

SIP (सिप) क्या है- सिप (SIP) या सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आपको हर महीने एक निश्चित रकम को आपकी पसंदीदा Mutual Fund स्कीम में डालने का अवसर देता है. यह आमतौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में शुरू किया जाता है. Mutual Fund निवेश में अनुशासन का बहुत महत्व है. सिप आपके इसी अनुशासन को कायम रखता है. इसके अलावा सिप (SIP) नियमित रूप से Mutual Fund में निवेश जारी रखता है भले ही शेयर बाजार में तेजी हो या मंदी.

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मिलती है टैक्स छूट लेकिन...इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत SIP के जरिए म्यूचुअल फंड स्कीम में छूट मिलती है. लेकिन इन्हें ELSS- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम कहते हैं. निवेशकों के पास ऐसे फंड्स में एक तय अवधि के लिए एक तय रकम से एसआईपी शुरू करने का ऑप्शन होता है.

कैसे और कितने दिन में शुरू कर सकते हैं SIP- सभी ओपन-एंडेड ELSS स्कीम्स में निवेशकों को एसआईपी के जरिए निवेश का मौका मिलता है.

>> कुछ फंड हाउस एसआईपी के लिए महीने की कोई तारीख चुनने को कहते हैं. निवेशकों को एसआईपी और ईसीएस मैंडेट्स देते हुए एक फॉर्म भरना होता है.
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>> आपके ईसीएस मैंडेट को रजिस्टर करने में बैंक आमतौर पर 21 से 30 दिन लगाते हैं. आप ऑनलाइन एसआईपी भी शुरू कर सकते हैं. इसके बाद आपके बैंक खाते से आपके द्वारा तय की गई रकम (कम से 500 रुपये)  हर महीने कटने लगती है. (ये भी पढ़ें-इन म्यूचुअल फंड्स स्कीम में पैसा लगाने वालों पर गहराया संकट, अब क्या करें निवेशक)

>> निवेशक एक तय अवधि के लिए एसआईपी चुन सकते हैं या परपेचुअल ऑप्शन ले सकते हैं यानी एसआईपी तब तक जारी रहेगी, जब तक निवेशक फंड हाउस को उसे बंद करने का निर्देश न दे.

>> ईएलएसएस एसआईपी के मामले में हर इंस्टॉलमेंट तीन साल के लिए लॉक होगा. आसान शब्दों में समझें तो अगर आपने पहली अप्रैल 2019 से प्रति महीने 12,500 रुपये का एसआईपी शुरू किया तो पहला इंस्टॉलमेंट अप्रैल 2022 तक लॉक होगा, जबकि दूसरा इंस्टॉलमेंट मई 2022 तक.

>> जिस स्कीम में एसआईपी आप चला रहे हों, उसमें आप एकमुश्त रकम जोड़ सकते हैं. इससे आपकी रेग्युलर स्कीम पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट- इनकम टैक्स की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये का निवेश अधिकतम ईएलएसएस में कर टैक्स में छूट का फायदा उठाया जा सकता है.

>> ज्यादातर निवेशक टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस में निवेश करना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे वे म्यूचुअल फंड (एमएफ) की दूसरी इक्विटी स्कीमों में निवेश करने लगते हैं. इसलिए इसे एमएफ की पहली स्कीम भी कहा जाता है. (ये भी पढ़ें-शेयर बाजार में गिरावट आने पर अगर हुआ म्यूचुअल फंड SIP में घाटा, अब तुरंत करें ये काम)

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क्या PPF, NSC से बेहतर हैं- अगर आप टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस में निवेश नहीं कर रहे हैं तो आप संभवत: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) जैसी दूसरी टैक्स सेविंग्स स्कीमों में निवेश कर रहे होंगे. अगर ऐसा है तो आपको अपने निवेश की रणनीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है.

>> पीपीएफ और एनएससी में लॉक-इन पीरियड काफी लंबा होता है. इसका मतलब यह है कि इनमें एक बार निवेश करने के बाद आप जल्द अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं.

>> हालांकि, पीपीएफ में पांच साल के बाद आंशिक निकासी की सुविधा है, लेकिन इसकी मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है. इसी तरह एनएससी में लॉक-इन पीरियड 6 साल है. इसके मुकाबले ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड 3 साल है.

>>इन एसआईपी में मिलेगा ज्यादा मुनाफा-कम लॉक-इन पीरियड के अलावा ईएलएसएस में रिटर्न काफी आकर्षक है.

>> पिछले तीन साल में ईएलएसएस फंडों ने करीब 13.52 फीसदी रिटर्न दिया है. पांच साल में यह रिटर्न 17.2 फीसदी और 10 साल में 9.83 फीसदी है. इसके मुकाबले टैक्स बचत की सुविधा देने वाली दूसरी स्कीमों का रिटर्न 10 फीसदी से कम है.
First published: July 21, 2019, 7:50 AM IST
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