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आर्थिक सुस्ती का असर! 12 साल में पहली बार बिजली की मांग में सबसे बड़ी गिरावट

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 5:13 PM IST
आर्थिक सुस्ती का असर! 12 साल में पहली बार बिजली की मांग में सबसे बड़ी गिरावट
अक्टूबर माह में बिजली की मांग में 12 साल की सबसे बड़ी गिरावट

अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर अलग-अलग क्षेत्रों में दिख रहा है.​ पिछले साल के मुकाबले इस साल अक्टूबर माह में बिजली की मांग में 13.2 फीसदी की गिरावट आई, जोकि बीते 12 साल के दौरान किसी भी माह में सबसे अधिक गिरावट है.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 5:13 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले साल के मुकाबले इस साल अक्टूबर माह के दौरान देश में इलेक्ट्रिक पावर की मांग 13.2 फीसदी फिसल चुका है. पिछले 12 साल के दौरान किसी भी माह में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है. कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रिक पावर की मांग में यह कमी देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती (Economic Slowdown) की वजह से है. दक्षिण एशिया (South Asia) की तीसरी सबसे बड़ी​ अर्थव्यवस्था में बिजली की मांग में इस कमी से साल 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (5 Trillion Dollar Economy) बनने के सपने को झटका लग सकता है. दरअसल, बिजली की मांग में इस कमी की वजह से औद्योगिक उत्पादन में भी गिरावट आएगी.

सबसे अधिक इन्डस्ट्रीज वाले राज्यों में मांग में ​कमी
नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस (National Institue of Public Finance) के प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ती ने कहा, 'आर्थिक सुस्ती का असर विशेषतौर पर औद्योगिक क्षेत्र में सबसे अधिक देखने को मिल रहा है. ऐसे में चालू वित्त वर्ष के ग्रोथ पर इसका बुरा असर देखने को मिलेगा.' महाराष्ट्र और गुजरात जैसे सबसे अधिक इन्डस्ट्रीज वाले राज्यों में खपत में कमी आई है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ​अथॉरिटी से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले माह में महाराष्ट्र में खपत 22.4 फीसदी कम हुआ है. वहीं, गुजरात में इसमें 18.8 फीसदी की गिरावट आई है.

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अधिक आबादी वाले राज्यों में भी मांग में कमी
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों में भी​ बिजली की मांग में कमी आई है. मध्य प्रदेश में बिजली की मांग में एक चौथाई की कमी आई है. वहीं, उत्तर प्रदेश में इसमें 8.3 फीसदी की कमी आई है. बता दें कि जनवरी 2006 के बाद इलेक्ट्रिसिटी ​मांग के आंकड़े पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं है.4 राज्यों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में कम रही बिजली की मांग
इस आंकड़े से पता चलता है कि पूर्वी और उत्तर भारत के 4 राज्यों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में बिजली की खपत में कमी रही है. सितंबर माह में औद्योगिक उत्पादन 14 साल के न्यूनतम स्तर पर फिसलकर 5.2 फीसदी रहा था. ऐसे में लगातार कई बड़े कदम उठाने के बावजूद भी अर्थव्यवस्था में सुस्ती जारी रहने की वजह से सरकार की चिंता बढ़ सकती है.

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आर्थिक ग्रोथ में गिरावट का अनुमान
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मांग और निवेश में कमी होने की वजह से ग्रोथ (Economic Growth Rate) फिसलकर 5.8 फीसदी के स्तर पर आ सकती है. पिछले माह ही केन्द्रीय बैंक ने मार्च 2020 तक ग्रोथ रेट का अनुमान 80 बेसिस प्वाइंट घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया था. बता दें कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से बिस्किट से लेकर कारों तक बिक्री में गिरावट देखने को मिल रही है. वहीं, कुछ बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या में भी कमी कर रही हैं. ऑटोमोबाइल्स सेक्टर की कई कंपनियों ने हजारों नौकरियों में कटौती की है. इन कंपनियों ने सेल्स में गिरावट की वजह से ये कदम उठाया था.

इस माह आर्थिक आंकड़े जारी कर सकती है सरकार
भानुमूर्ती ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, 'इन्हीं वजहों से अब चालू वित्त वर्ष के लिए ग्रोथ रेट को 6 फीसदी से नीचे देखने लगे हैं.' चालू वित्त वर्ष के लिए केन्द्र सरका ने भी ग्रोथ के अनुमान को 7 फीसदी से रिवाइज कर दिया है. इस माह के अंत में सरकार आर्थिक ग्रोथ के आंकड़े जारी कर सकती है.

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First published: November 11, 2019, 4:49 PM IST
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