धनतेरस-दिवाली से पहले खरीदें सस्ता सोना, सरकार दे रही छूट, टैक्स तक का नहीं होगा झंझट

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम

SGB Series VIII: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की आठवीं सीरीज सोमवार से सब्सक्रिप्शन के​ लिए खुल रही है. निवेशकों के पास 13 नवंबर तक इसमें निवेश करने का मौका होगा. डिजिटल माध्यम से भुगतान करने पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट भी मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 7:25 AM IST
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नई दिल्ली. धनतेरस-दिवाली से ठीक पहले केंद्र सरकार आपको सोने में निवेश के जरिए कमाई करने का शानदार मौका दे रही है. सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2020-21 (Sovereign Gold Bond Scheme 2020-21) सी​रीज VIII का सब्सक्रिप्शन 9 नवंबर यानी सोमवार से शुरू हो जाएगा. निवेशकों के पास 13 नवंबर तक इसे सब्सक्राइब करने का मौका होगा. इस बार के लिए आरबीआई ने सोने का भाव 5,177 रुपये प्रति ग्राम तय किया है. साथ ही, ऑनलाइन आवेदन करने और डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाले लोगों के लिए 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट भी मिलेगी.

डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए यह भाव 5,127 रुपये प्रति ग्राम होगा. इसके पहले 12 अक्टूबर को जारी किए गए गोल्ड बॉन्ड का भाव 5,051 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया था. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को आरबीआई द्वारा सरकार की तरफ से जारी किया जाता है. आरबीआई ने गोल्ड बॉन्ड के तहत सोने का भाव इंडियन बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा पब्लिश की जाने वाली औसत क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय की है. यह 999 शुद्धता वाले सोने के लिए है.

कितना कर सकेंगे निवेश?
निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कम से कम 1 ग्राम सोने में निवेश कर सकते हैं. व्यक्तिगत रूप से अधिकतम 4 किलोग्राम सोने तक में निवेश किया जा सकता है. इसकी मैच्योरिटी अवधि 8 साल की होती है. निवेश के पांचवें साल से इस स्कीम से बाहर निकलने का विकल्प होता है.
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कैसे करें गोल्ड बॉन्ड में निवेश?
इस गोल्ड बॉन्ड में बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पोस्ट ऑफिस और स्टॉक एक्सचेंज (BSE, NSE) के जरिए निवेश किया जा सकता है. स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंकों के जरिए इसमें निवेश का विकल्प नहीं होता है.

सालाना 2.5 फीसदी ब्याज का भी लाभ
गोल्ड बॉन्ड पर सालाना 2.50 फीसदी की दर से ब्याज भी मिलता है. गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने की सबसे खास बात है कि इसके स्टोरेज की चिंता नहीं करनी होती है. इसे डीमैट में रखने पर कोई जीएसटी भी देय नहीं होता है.अगर गोल्ड बॉन्ड के मैच्योरिटी पर कोई कैपिटल गेन्स बनता है तो इसपर छूट मिलेगी. गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाली यह एक एक्सक्लुसिव लाभ है.

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सरकार ने साल 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को लॉन्च किया था ताकि फिजिकल गोल्ड की मांग को कम किया जा सके. आरबीआई की सालाना रिपोर्ट 2019-20 के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के 37 भाग के जरिए कुल 9,652.78 करोड़ रुपये कीमत के 30.98 टन सोना जारी किया जा चुका है.
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