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Sovereign Gold Bond: मैच्योरिटी से पहले भी भुना सकते हैं गोल्ड बॉन्ड, जानें नियम

Sovereign Gold Bond: मैच्योरिटी से पहले भी भुना सकते हैं गोल्ड बॉन्ड, जानें नियम

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) सरकारी सिक्योरिटीज है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) सरकारी सिक्योरिटीज है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, पेपर फॉर्म में होता है. इसलिए इसके साथ फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) की तरह कहां स्टोर किया जाए कहां नहीं, ऐसी कोई दिक्कत नहीं है. आप किसी फाइल में आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं.

Sovereign Gold Bond: बाजार में भूचाल मचा हुआ है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange) का सूचकांक निफ्टी में आज 400 से भी ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई. मुंबई शेयर बाजार संवेदी सूचकांक Sensex भी 1300 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया. बाजार में इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. बाजार की इसी उठापटक के चलते निवेशक इन्वेस्टमेंट के सुरक्षित प्लान की तरह अपना रुख करते हैं. निवेश के लिए गोल्ड को हमेशा से बेहतर एसेट (Gold investment) माना जाता रहा है. पिछले कुछ सालों में सोना (Gold) दुनिया भर में निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर उभरा है.

सोने में आप कई तरह से निवेश कर सकते हैं. आप फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) यानी सिक्का, गहने आदि के रूप में सोना खरीद सकते हैं. आप गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) पैसा लगा सकते हैं. गोल्ड म्यूचुअल फंड (Gold Mutual Fund) या फिर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) में आप निवेश कर सकते हैं.

8 साल के लिए निवेश

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) सरकारी सिक्योरिटीज है. गोल्ड बॉन्ड को भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी 8 साल में होती है. इसका लॉक-इन पीरियड 5 साल है. इसका मतलब यह है कि गोल्ड बॉन्ड खरीदे जाने के 5 साल पूरे होने के बाद आप इसे भुना सकते हैं.

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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, पेपर फॉर्म में होता है. इसलिए इसके साथ फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) की तरह कहां स्टोर किया जाए कहां नहीं, ऐसी कोई दिक्कत नहीं है. आप किसी फाइल में आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं.

कितना कर सकते हैं निवेश

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेशक को कम से कम एक ग्राम सोने के लिए निवेश करना होगा. कोई भी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार अधिकतम चार किलो मूल्य तक का गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है. जबकि, ट्रस्ट और समान संस्थाओं के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलो है.

मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड भुनाना

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी का समय 8 साल है. 8 साल बाद बॉन्ड से मिलने वाला पैसा पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है. अगर आप 8 साल से पहले बॉन्च को भुनाना चाहते हैं तो आपको इस पर टैक्स अदा करना होगा.

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आप 5 साल का लॉक-इन पीरियड पूरा होने और मैच्योरिटी से से पहले गोल्ड बॉन्ड भुना सकते हैं. मैच्योरिटी से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से आने वाला पैसा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में आता है. इस पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर और अन्य चार्ज मिलाकर करीब 20 फीसदी टैक्स देना होता है.

अगर गोल्ड बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं तो बॉन्ड को आरबीआई द्वारा नोटिफाई की गई तारीख से शेयर बाजार में ट्रेड किया जा सकता है. अगर गोल्ड बॉन्ड की बिक्री, खरीद की तारीख के 3 साल के अंदर की जाती है तो प्राप्त होने वाला रिटर्न शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स माना जाएगा. यह इनकम आपकी सालाना आय में जुड़ेगी. फिर इस पर इनकम टैक्स की स्लैब के मुताबिक टैक्स लगेगा.

​गोल्ड बॉन्ड पर रिटर्न

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर हर साल एक निश्चित 2.5 फीसदी के हिसाब से ब्याज मिलता है. यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट के तहत कर योग्य होता है. एक साल में गोल्ड बॉन्ड से मिलने ब्याज आपकी आमदनी के अन्य जरियों में जुड़ता है और फिर कुल इनकम पर टैक्स लगता है.

Tags: Gold ETF, Gold investment, Gold price, Sovereign gold bond

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