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 एसएंडपी ने भारत के ग्रोथ का अनुमान घटाया, कौन से फैक्टर विकास दर को कर रहे प्रभावित ?

पिछले वर्ष दिसंबर में इस रेटिंग एजेंसी ने 2022-23 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.8 फीसदी लगाया था

पिछले वर्ष दिसंबर में इस रेटिंग एजेंसी ने 2022-23 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.8 फीसदी लगाया था

रेटिंग एजेंसी एसएंडपी भारत के विकास अनुमान को घटा दिया है. एजेंसी ने भारत की वृद्धि के पूर्वानुमान को पहले के 7.8 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है. एसएंडपी ने अपनी ‘ग्लोबल मेक्रो अपडेट टू ग्रोथ फोरकास्ट्स’ में कहा कि मुद्रास्फीति का लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहना चिंता का विषय है. 

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नई दिल्ली . वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि के पूर्वानुमान को पहले के 7.8 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है. ऐसा बढ़ती मुद्रास्फीति और रूस- यूक्रेन के बीच लंबी खिंचती लड़ाई के मद्देनजर किया गया है. एसएंडपी ने अपनी ‘ग्लोबल मेक्रो अपडेट टू ग्रोथ फोरकास्ट्स’ में कहा कि मुद्रास्फीति का लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहना चिंता का विषय है. ऐसे में केंद्रीय बैंकों को दरों में वृद्धि करनी पड़ती है और उत्पादन व रोजगार पर बुरा असर पड़ता है.

पिछले वर्ष दिसंबर में इस रेटिंग एजेंसी ने 2022-23 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.8 फीसदी लगाया था. अब इसे चालू वित्त वर्ष (2022-23) में घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया गया है. अगले वित्त वर्ष के लिए 6.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया गया है.

युद्ध की वजह से जोखिम बढ़ा
एसएंडपी ने कहा, ‘‘पिछले पूर्वानुमान के बाद से हमारे पूर्वानुमान के प्रति जोखिम बढ़ गया है और यह मजबूती से नीचे की ओर बना हुआ है. रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लंबा खिंचने की आशंका है जिससे जोखिम बढ़ा है.’’

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अनुमान है कि 2021-22 में भारत की जीडीपी वृद्धि 8.9 फीसदी रही. एसएंडपी के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 6.9 फीसदी रह सकती है. रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तथा जिंसों की बढ़ती कीमतों के कारण कई वैश्विक एजेंसियों ने भारत की वृद्धि का पूर्वानुमान घटाया है.

विश्व बैंक ने भी घटाया विकास का अनुमान
विश्व बैंक ने अप्रैल में भारत की जीडीपी का पूर्वानुमान 8.7 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दिया था जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 9 फीसदी से घटाकर 8.2 फीसदी और एशियाई विकास बैंक ने 7.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया था. वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले महीने वृद्धि पूर्वानुमान 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था.

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दरअसल, रूस-यूक्रेन के बीच का युद्ध अप्रत्याशित रूप से लंबा खींच रहा है. किसी को भी यकीन नहीं था कि दोनों देशों के बीच का युद्ध 60 दिन से भी ज्यादा लंबा खींचेग. अब इसके दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं. पहले से ही संकट में चल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसने और मुश्किल में डाल दिया है. युद्ध ने महंगाई को और बढ़ा दिया है. लिहाजा फेडरल रिजर्व सहित दुनियाभर के रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं. इसका असर भी ग्रोथ रेट पर दिखने का अनुमान लगाया जा रहा है.

Tags: Economy, GDP growth, India economy, India's GDP, Indian economy, Rural economy

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