पाकिस्तान छोड़कर भारत आए इस तांगेवाले ने हिंदुस्तान में ऐसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार!

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया था. आज भारत को आज़ाद हुए 73 साल हो गए हैं. देश के बटवारे के वक़्त लाखों परिवारों की जिंदगियां बर्बाद हुई थी. इस समय ऐसा ही एक परिवार धर्मपाल गुलाटी का भी था. आइए आपको बताते हैं इस कारोबारी की कहानी..

News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 1:28 PM IST
पाकिस्तान छोड़कर भारत आए इस तांगेवाले ने हिंदुस्तान में ऐसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार!
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया था. आज भारत को आज़ाद हुए 73 साल हो गए हैं. देश के बटवारे के वक़्त लाखों परिवारों की जिंदगियां बर्बाद हुई थी. इस समय ऐसा ही एक परिवार धर्मपाल गुलाटी का भी था. आइए आपको बताते हैं इस कारोबारी की कहानी..
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रोजगार की तलाश में दिल्ली आकर उन्होंने तांगा चलाना शुरू किया. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. इसीलिए उन्होंने वो तांगा भाई को देकर मसाले बेचना शुरू किया. उनका मसाला लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि देशभर में धूम मच गई. हैरान कर देने वाली कामयाबी की ये कहानी देश के मशहूर उद्योपति एमडीएच मसाले के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी की है.

आइए जानते है कि कैसे उन्होंने खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस एंपायर..

दिल्ली आकर तांगा चलाना शुरू किया
धर्मपाल गुलाटी के सामने दिल्ली आकर पैसा कमाना सबसे बड़ी चुनौती थी. उन दिनों धर्मपाल की जेब में 1500 रुपये ही बाकी बचे थे. पिता से मिले इन 1500 रुपये में से 650 रुपये का धर्मपाल ने घोड़ा और तांगा खरीद लिया और रेलवे स्टेशन पर तांगा चलाने लगे. कुछ दिनों बाद उन्होंने तांगा भाई को दे दिया और करोलबाग की अजमल खां रोड पर ही एक छोटा सा खोखा लगाकर मसाले बेचना शुरू किया.

चल गया मसाले का कारोबार
धर्मपाल ने मिर्च मसालों का जो साम्राज्य खड़ा किया, उसकी नींव इसी छोटे से खोखे पर रखी गई थी. जैसे-जैसे लोगों को पता चला कि सियालकोट की देगी मिर्च वाले अब दिल्ली में हैं धर्मपाल का कारोबार तेजी से फैलता चला गया. 60 का दशक आते-आते महाशियां दी हट्टी करोलबाग में मसालों की एक मशहूर दुकान बन चुकी थी.

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया था. देश के विभाजन के बाद लाखों परिवारों की जिंदगियां बर्बाद हो चुकी थी. उस समय ऐसा ही एक परिवार धर्मपाल गुलाटी का भी था. रोजगार की तलाश में दिल्ली आकर उन्होंने तांगा चलाना शुरू किया. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. इसीलिए उन्होंने वो तांगा भाई को देकर मसाले बेचना शुरू किया. उनका मसाला लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि देशभर में धूम मच गई. हैरान कर देने वाली कामयाबी की ये कहानी देश के मशहूर उद्योपति एमडीएच मसाले के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी की है. आइए जानते है कि कैसे उन्होंने खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस एंपायर....
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ऐसा बना एमडीएच
महाशय धर्मपाल के परिवार ने छोटी सी पूंजी से कारोबार शुरू किया था, लेकिन कारोबार में बरकत के चलते वो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दुकान दर दुकान खरीदते चले गए. गुलाटी परिवार ने पाई–पाई जोड़कर अपने धंधे को आगे बढ़ाया.

मिलती है 21 करोड़ रुपये की सैलरी
महज पांचवीं पास धर्मपाल गुलाटी एमडीएच के सीईओ के तौर पर सालाना 21 करोड़ रुपये सैलरी पाते हैं. उनका सैलरी पैकेज अन्य एफएमजीसी कंपनियों के कहीं सीईओ से ज्यादा है.

ऐसा बना एमडीएच: महाशय धर्मपाल के परिवार ने छोटी सी पूंजी से कारोबार शुरू किया था लेकिन कारोबार में बरकत के चलते वो दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दुकान दर दुकान खरीदते चले गए. गुलाटी परिवार ने पाई–पाई जोड़कर अपने धंधे को आगे बढ़ाया.

उन दिनों जब बैंक से कर्ज लेने का रिवाज नहीं था, लेकिन महाशय धर्मपाल ने यह जोखिम उठाया. गुलाटी परिवार ने 1959 में दिल्ली के कीर्ति नगर में मसाले तैयार करने की अपनी पहली फैक्ट्री लगाई थी. 93 साल के लंबे सफर के बाद सियालकोट की महाशियां दी हट्टी अब दुनिया भर में एमडीएच के रुप में मसालों का ब्रैंड बन चुकी है.

1500 करोड़ रुपये का बिजनेस एंपायर
धर्मपाल गुलाटी जी का बिजनेस एंपायर अब 1500 करोड़ रुपये का हो चुका है. पिछले साल कंपनी की कुल आय 15 फीसदी बढ़कर 924 करोड़ रुपये रही थी. वहीं, मुनाफा 15 फीसदी बढ़कर 213 करोड़ रुपये हो गया है. धर्मपाल गुलाटी एमडीएच में 80 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं.

 

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First published: August 15, 2019, 12:45 PM IST
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