अगर बाज़ार में हल्दी-मिर्च, मसाले सस्ते हो जाएं तो चौंकिएगा मत! यह है बड़ी वजह

हल्दी-मिर्च, मसाले सस्ते हो सकते हैं.
हल्दी-मिर्च, मसाले सस्ते हो सकते हैं.

कोरोना वायरस महामारी का असर हल्दी-मिर्च और गर्म मसालों के बाज़ार पर भी पड़ा है. होटल-रेस्टोरेंट बंद रहने और शादी-ब्याह न होने से इस बाजार में मांग कम है. यही कारण है कि अधिकतर माल के एक्सपायर होने का खतरा बढ़ गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 1:18 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी और लॉकडाउन के असर से बाज़ार हर पल अपना रंग बदल रहा है. बाज़ार का कोई वर्ग ऐसा नहीं है जिस पर इसका असर न पड़ा हो. ऐसा ही हल्दी-मिर्च और गर्म मसालों का बाज़ार है. लॉकडाउन में शादी-ब्याह न होने और होटल-रेस्टोरेंट बंद रहने से कारोबार पर खासा असर पड़ा है. सबसे बड़ी बात यह कि मसालों की एक्सपाइरी नजदीक है, लेकिन बाज़ार में अभी तक उठान नहीं आया है. कारोबारियों का कहना है कि या तो माल को सस्ता कर जल्दी से बेच दें या फिर एक्सपायर होने के बाद डंप कर दें.

लॉकडाउन में नहीं बिका 50 फीसदी माल
नूरी मसाले, जामा मस्जिद, दिल्ली के संचालक मोहम्मद आज़म बताते हैं कि हमारे यहां वेज और नॉन वेज हर तरह के खाने के मसाले मिलते हैं. दिल्ली के बहुत सारे नामी होटल और रेस्टोरेंट में हमारे मसालों की सप्लाई. लेकिन अप्रैल से सितम्बर तक होटल-रेस्टोरेंट बंद रहे. शादी-ब्याह भी नहीं हुए. हमारा करीब 50 फीसदी माल होटल-रेस्टोरेंट और शादी-ब्याह के मौकों पर बिकता है.

उन्होंने आगे कहा कि अगर माल के एक्सपायर होने की बात करें तो हमारे मसालों पर एक साल की एक्सपाइरी होती है. अब अगर जल्द ही सरकार ने होटल-रेस्टोरेंट और शादी-ब्याह के मौके पर छूट नहीं दी तो माल खराब होने का डर है. वैसे तो हम एक्सपायर माल को डंप कर देते हैं.
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मसाले सस्ते बेचकर निकालेंगे लागत
दिल्ली के ही एक विक्रेता अफसार का कहना है कि अब ज़्यादातर मसाले पैकेट वाले ही बिकते हैं. पैकेट पर एक्सपाइरी भी ज़्यादा नहीं होती है. बहुत सारी कंपनी माल वापस भी नहीं लेती हैं. अब ऐसे में ज़ल्द से ज़ल्द माल बेचने के लिए सस्ता बेचना पड़ेगा. कोशिश यह है कि कम से कम लागत तो निकाल ही लें. ऐसा सिर्फ मसालों पर ही नहीं और भी दूसरे पैक्ड आइटम के साथ ही भी यही परेशानी है. क्योंकि दीवाली के बाद आने वाले देवोत्थान के सहलग पर भी छूट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं होटल-रेस्टोरेंट में भी ग्राहकों की संख्या बढ़ाने पर सरकार तैयार होती नहीं दिख रही है.
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