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सोलर पावर स्टार्टअप से की 20 करोड़ की कमाई, टाटा जैसी कंपनियों को दे रहे टक्कर

सोलर पावर स्टार्टअप से की 20 करोड़ की कमाई, टाटा जैसी कंपनियों को दे रहे टक्कर

सुभग जैन का स्टार्टअप 'कहो' अब छत्तीसगढ़, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट और राजस्थान में अपनी पहुंच बना चुका है. इसके जरिए कंपनी ने 20 करोड़ रुपये की कमाई की है.

    जहां भारत के ज्यादातर बड़े शहरों में बिजली एक बेहद आम और मूलभूत सुविधा के तौर पर देखी जाती हैं, वहीं अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र है जहां बिजली एक लग्जरी है. ऐसे छोटी और रिमोट जगहों की इस परेशानी को समझने और समाधान निकालने का फैसला सुभग जैन ने किया. इस आइडिया को लेकर उन्होंने अपनी कंपनी 'कहो' की शुरुआत की. उनकी ये कंपनी अब छत्तीसगढ़, गोवा, अरुणाचल प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट और राजस्थान में अपनी पहुंच बना चुका है. इसके जरिए कंपनी ने 20 करोड़ रुपये की कमाई की है. (ये भी पढ़ें-तीन दोस्तों का कॉफी बिजनेस सिर्फ 2 साल में हुआ हिट, कमाते हैं करोड़ों)

    क्या करती है कंपनी- 'कहो' स्टार्टअप बिजली पहुंचाने के लिए माओवादी या नक्सली इलाकों पर फोकस करता है जहां ग्रिड इलेक्ट्रिसिटी स्थिर रूप से मौजूद नहीं है. इसके लिए ये स्टार्टअप ऑफ ग्रिड या स्टैंड अलोन सोलर लाइट, इनवर्टर और टीवी जैसे प्रोडक्ट बनाता है. इन्हें बनाने के लिए कंपनी लिथियम आयन बैटरी भी अपने नोएडा प्लांट में ही मैन्युफैक्चर करती है. इस सेटअप की मदद से बैटरी सोलर पावर को सेव कर लेती है और इसे जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

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    कैसे काम करती है कंपनी- 'कहो' स्टार्टअप बी2बी बिजनेस मॉडल पर काम करता है. कंपनी फिलहाल सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट्स पर टेंडर के जरिए काम कर रही है. 'कहो' सरकार की सौभाग्य योजना और दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत अब तक करीब 50,000 लोगों तक बिजली की सुविधा पहुंचा चुके हैं. 2012 में शुरु हुआ ये स्टार्टअप  20 करोड़ रुपये की कमाई कर चुका है. 'कहो' अब तक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1-1.5 करोड़ का निवेश कर चुका है. इस निवेश का ज्यादातर हिस्सा इस्तेमाल बैटरी बनाने में होता है.

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    विस्तार के लिए पैसा जुटाने की योजना- हर स्टार्टअप की तरह, 'कहो' ने भी फंडिंग के लिए बैंकों का रुख किया, लेकिन कोलैटरल न होने की वजह से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी. इसके कारण कंपनी को अपनी ग्रोथ की रफ्तार धीमी करनी पड़ी. पूंजी जुटाने की इस परेशानी से उबरने के लिए कंपनी अब वेंचर कैपिटलिस्ट को अप्रोच कर रही हैं, साथ ही इक्विटी फंडिंग का रास्ता निकालने पर भी काम जारी हैं.

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    टाटा जैसी कंपनियों को दे रही है टक्कर- कंपनी साल दर साल रेवेन्यू को दुगना कर रही है, वहीं आने वाले सालों में 1 गीगावाट की क्षमता के साथ में इसे चौगुना करने का लक्ष्य रखती है. इसके लिए कंपनी भारतीय रेलवे के साथ भी काम करने की तैयारी कर रही है. सोलर इलेक्ट्रिफिकेशन के इस सेक्टर में टाटा पावर जैस बड़े प्लेयर तो काम कर रही रहे हैं, वहीं रिन्युएबल एनर्जी में बढ़ते मौके और जरूरत देख मायसन, 8 मिनट और ऊर्जा जैसे स्टार्टअप भी इंडस्ट्री में पैर जमा रहे हैं. सरकार के क्लीन एनर्जी पर बढ़ते फोकस से इंडस्ट्री का भरोसा और बढ़ रहा है.

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    Tags: Business, Business news in hindi, Business opportunities, How to do business, New Business Idea

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