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SBI ग्राहक ध्यान दें! अब घर बैठे ऐसे जमा करें एफडी से जुड़ा ये जरूरी फॉर्म, नहीं देने पर हो सकती है सज़ा

News18Hindi
Updated: April 9, 2020, 6:31 AM IST
SBI ग्राहक ध्यान दें! अब घर बैठे ऐसे जमा करें एफडी से जुड़ा ये जरूरी फॉर्म, नहीं देने पर हो सकती है सज़ा
फॉर्म 15G और फॉर्म 15H क्या है

देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों की सुविधा के लिए निमयों में बदलाव किया है. SBI ने फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) से जुड़े एक नियम को बदला है, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा.

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नई दिल्ली. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों की सुविधा के लिए निमयों में बदलाव किया है. SBI ने फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) से जुड़े एक नियम को बदला है, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा. SBI ने अपने ग्राहकों के लिए नई सुविधा शुरू की है, जिसके तहत अब कोई भी ग्राहक फॉर्म 15G/15H होम ब्रांच के अलावा किसी भी ब्रांच में जमा कर सकता है. इसके साथ ही अब आप ये फॉर्म ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं. आयकर विभाग ने लोगों को चालू वित्त वर्ष के लिए 15G और 15H फॉर्म भरने के लिए 30 जून के बाद और समय देने का एलान किया है. ये फॉर्म ब्याज आय पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) से छूट के लिए भरने होते हैं. बता दें कि बैंक में FD करने पर ब्याज पर टैक्स यानी TDS (Tax Deducted at Source) कटता है. TDS की कटौती तभी होती है जब FD और बचत खाते से सालाना 40,000 रुपये तक का ब्याज मिलता है. पहले टीडीएस की लिमिट सालाना 10 हजार रुपये थी.

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TDS की लिमिट 40 हजार रुपये- इस साल के अंतरिम बजट में कहा गया है कि बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले TDS की सीमा को 10 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है.



फॉर्म 15G और फॉर्म 15H क्या है - टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि फार्म 15G और फॉर्म 15H एक फार्म है जो आप अपने बैंक में जमा कर सकते हैं. अगर आपके द्वारा अर्जित कुल आय पर कोई कर दायित्व नहीं है तो टीडीएस आपकी आय से कटौती नहीं की जाती है. यह फॉर्म हर साल जमा किए जा सकते हैं. इसलिए, हर साल आपको यह जांचना है कि आप इन फॉर्म को भरने के लिए पात्र हैं या नहीं, या फिर भी वर्ष अगर आपकी आय कर के लिए लायक है, तो आप पात्र नहीं हैं.



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जेल की सजा का प्रावधान- फॉर्म 15G में गलत डिक्लेयरेशन पर इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 277 के तहत पेनल्टी लग सकती है. टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि इस फॉर्म में गलत जानकारी देने पर तीन महीने से लेकर दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है. जुर्माना अलग से लगेगा. अगर 25 लाख से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला हो तो सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

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First published: April 9, 2020, 6:31 AM IST
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