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    Borrowing का विकल्प नहीं चुनने वाले राज्यों को अभी नहीं मिलेगा GST मुआवजा, 2022 तक करना होगा इंतजार

    केंद्र सरकार की जीएसटी मुआवजे के मुद्दे को लेकर उधार योजना पर सहमति जताने वाले 21 राज्‍यों में एक कांग्रेसशासित प्रदेश भी है.
    केंद्र सरकार की जीएसटी मुआवजे के मुद्दे को लेकर उधार योजना पर सहमति जताने वाले 21 राज्‍यों में एक कांग्रेसशासित प्रदेश भी है.

    देश के 21 राज्‍यों ने वस्‍तु व सेवा कर मुआवजे (GST Compensation) के मुद्दे पर केंद्र सरकार की उधार योजना (Borrowing Scheme) का विकल्प चुन लिया है. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिन में अभी इनकार करने वाले कई दूसरे राज्‍य भी इस विकल्‍प का चुनाव कर लेंगे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: September 20, 2020, 9:11 PM IST
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    नई दिल्‍ली. वस्‍तु व सेवा कर मुआवजे (GST Compensation) के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कर्ज योजना (Borrowing Scheme) का विकल्प नहीं चुनने वाले राज्‍यों को क्षतिपूर्ति भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. दरअसल, दिल्‍ली समेत झारखंड, केरल, महाराष्‍ट्र, पंजाब, राजस्‍थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने सरकार के कर्ज योजना विकल्‍प के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया है. ऐसे में इन 10 राज्‍यों को कर्ज योजना का विकल्‍प नहीं चुनने के कारण भारी आर्थिक संकट (Economic Crisis) का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, अब ये देखना दिलचस्‍प होगा कि 5 अक्‍टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक में इन राज्‍यों का रुख क्‍या रहता है.

    हामी भरने वाले 21 राज्‍यों में एक है कांग्रेस शासित प्रदेश
    केंद्र सरकार की कर्ज योजना का विकल्‍प 21 राज्यों ने चुना है. इनमें एक राज्‍य में कांग्रेस की सरकार है. दरअसल, कोरोना संकट के बीच जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर केंद्र की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे की कमी को पूरा करने के लिए 21 राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की ओर से प्रस्तावित 'उधार' के विकल्प को चुना है. इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं. इस सूची में कांग्रेस शासित केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी भी है.

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    मणिपुर ने पहले पहले ना करने के बाद दी प्रस्‍ताव पर सहमति


    मणिपुर ने पहले ऑप्‍शन-2 का विकल्प चुना था. हालांकि, बाद में ऑप्‍शन-1 में तब्‍दील कर केंद्र सरकार के प्रस्‍ताव पर हामी भर दी. माना जा रहा है कि एक-दो दिन में कुछ दूसरे राज्य भी अपना 'उधार' विकल्प देने पर सहमति जता देंगे. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के सूत्रों ने माना है कि जीएसटी काउंसिल में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की उपस्थिति है. जीएसटी एक्‍ट के अनुसार, किसी भी मुद्दे पर मतदान के लिए केवल 20 राज्यों को ही कोई प्रस्ताव पारित करना होगा. साफ है कि अगर अन्य राज्य 5 अक्टूबर 2020 को जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले अपने विकल्प नहीं बताते हैं, तो उन्हें जून 2022 तक मुआवजे के लिए इंतजार करना होगा.
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