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देश के इस्पात संयंत्रों ने बढ़ाई ऑक्सीजन उत्‍पादन और आपूर्ति क्षमता, राज्यों को रोज दी जा रही 3100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन

देश के इस्पात संयंत्रों ने बढ़ाई ऑक्सीजन उत्‍पादन और आपूर्ति क्षमता, राज्यों को रोज दी जा रही 3100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन

देश के कई सरकारी और निजी स्‍टील प्‍लांट्स ने ऑक्‍सीजन उत्‍पादन क्षमता बढ़ा दी है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

देश के कई सरकारी और निजी स्‍टील प्‍लांट्स ने ऑक्‍सीजन उत्‍पादन क्षमता बढ़ा दी है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

केंद्र के आदेश के बाद इस्‍पात संयंत्रों (Steel Plants) ने ऑक्सीजन उत्‍पादन और आपूर्ति क्षमता (Oxygen Production) दोगुनी कर दी है. एक सप्ताह पहले देश के इस्‍पात संयंत्र राज्यों को 1700 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन आपूर्ति कर रहे थे. अभी इन संयंत्रों ने नाइट्रोजन और अर्गोन के उत्पादन को कम करके मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया है.

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    नई दिल्‍ली. देश में बढ़ते कोरोना मामलों (Coronavirus in India) के बीच शायद ही कोई अस्पताल ऐसा हो जहां ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी ना हो रही हो. ऐसी दुश्वारियों के बीच देश के सार्वजनिक और निजी इस्पात संयंत्र (Steel Plants) संकटमोचक के तौर पर उभर कर सामने आई है. इस्‍पात कंपनियां एक दिन में राज्यों को 3100 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति (Medical Oxygen Supply) कर रही हैं. आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो 25 अप्रैल को ही इन इस्पात संयंत्रों ने 3131.84 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति राज्यों को की है. वहीं, 24 अप्रैल को इस्पात संयंत्रों ने राज्यों को 2894 टन ऑक्सीजन भेजी है.

    इन उपायों की वजह से ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ी
    केंद्र सरकार के आदेश के बाद इन संयंत्रों ने ऑक्सीजन बनाने और आपूर्ति की अपनी क्षमता को दोगुना कर दिया है. एक सप्ताह पहले ये संयंत्र महज 1500 से 1700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति राज्यों को कर रहे थे. अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने के लिए इन संयंत्रों ने नाइट्रोजन और अर्गोन के उत्पादन को कम करके सिर्फ लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया. यहीं नहीं, इस्पात संयंत्रों में सुरक्षा और जरूरत के लिहाज से साढ़े 3 दिनों का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का स्टॉक रखा जाता है, जिसे घटाकर महज 0.5 दिन के लिए किया गया है ताकि अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाई जा सके.

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    तेज ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए उठा रहे ये कदम
    डीपीआईआईटी (DPIIT) के निर्देश के मुताबिक, राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति तेजी से करने के लिए इस्पात संयंत्रों ने नाइट्रोजन और एर्गोन टैंकरों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकर में तब्दील कर दिया है. ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 8345 मीट्रिक टन क्षमता वाले 765 नाइट्रोजन और 7642 मीट्रिक टन क्षमता वाले 434 एर्गोन टैंकर लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन में तब्‍दील किए जा चुके हैं. टैंकरो में बदलाव की अनुमति पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन ने दी है. राज्यों को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए 15,900 मीट्रिक टन क्षमता वाले 1,172 टैंकर में जरूरी बदलाव किए जा चुके हैं. इस कड़ी में भिलाई इस्पात संयंत्र भी बेहतर काम कर रहा है.

    Tags: Bhilai Steel Plant, Liquid Oxygen, Medical Oxygen Supply, Oxygen Crisis India, Oxygen cylinder, Tata steel

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