स्‍टॉक ब्रोकर्स को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में पीक मार्जिन बढ़ाने पर आपत्ति, सेबी के खिलाफ केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठी

SEBI के खिलाफ स्‍टॉक ब्रोकर्स के संगठन ने केंद्र सरकार को खत लिखा है.

SEBI के खिलाफ स्‍टॉक ब्रोकर्स के संगठन ने केंद्र सरकार को खत लिखा है.

स्टॉक ब्रोकर्स (Stock Brokers) के संगठन एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) ने कहा है कि पीक मार्जिन रिक्‍वायरमेंट (Peak Margin Requirement) को मौजूदा स्तर से भी नीचे लाया जाना चाहिए. इस समय यह 50 फीसदी है, जिसे 25 से 33.33 फीसदी के बीच किया जाना चाहिए. बता दें कि एएनएमआई देश भर के 900 से ज्‍यादा स्टॉक ब्रोकर्स का समूह है.

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नई दिल्ली. पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) और स्टॉक ब्रोकर्स के संगठन एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) के बीच खींचतान शुरू हो गई है. दरअसल, एएनएमआई ने सेबी के एक प्रस्ताव के विरोध में वित्त मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है. सेबी की ओर से प्रस्तावित इंट्रा-ड्रे ट्रेडिंग (Intra-Day Trading) के लिए 100 फीसदी का पीक मार्जिन (Peak Margin) तय करने के प्रस्ताव को लेकर एएनएमआई का कहना है कि यह वास्तविक मार्जिन से 300 फीसदी ज्‍यादा है. एएनएमआई ने लेटर में कहा है 20 मई को सेबी की ओर से जारी प्रस्ताव पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.

ब्रोकर्स एसोसिएशन ने कहा है कि पीक मार्जिन रिक्‍वायरमेंट को मौजूदा स्तर से भी नीचे लाया जाना चाहिए. वर्तमान में यह 50 फीसदी है, जिसे 25 से लेकर 33.33 फीसदी के बीच किया जाना चाहिए. बता दें कि एएनएमआई देश भर के 900 से ज्‍यादा स्टॉक ब्रोकर्स का समूह है. संगठन चिंतित है कि 1 जून 2021 से पीक मार्जिन 50 फीसदी से 75 फीसदी किए जाने का फैसला प्रभावी हो जाएगा. ब्रोकर्स एसोसिशन के मुताबिक, पीक मार्जिन बढ़ने से बाजार के व्यवहार में बदलाव आएगा और फ्यूचर से ऑफ्शन की तरफ ट्रेडिंग शिफ्ट होगी. लोगों की मानसिकता बदलेगी और वे ऑप्शंस ट्रेडिंग अधिक करेंगे. ऐसे में लोग स्टॉक/इंडेक्स फ्यूचर्स और स्टॉक ऑप्शंस से दूर रहेंगे.

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संगठन का कहना है कि अधिक मार्जिन रहने से नुकसान वाली ट्रेड्स को लंबे समय तक कैरी फॉरवर्ड किया जाता रहेगा. इससे निवेशकों को सिक्योरिटी का गलत अहसास मिलेगा. मार्जिन बढ़ाने से कैपिटल मार्केट में कम वॉल्यूम के कारण हेजिंग अपॉर्च्यूनिटीज में गिरावट आई है और कमोडिटी मार्केट्स पर असर पड़ा है. दिसंबर 2020 और फरवरी 2021 के बीच ट्रेडर्स को पीक मार्जिन कम से कम 25 फीसदी बरकरार रखने के लिए कहा गया था. इसके बाद इसे मार्च और मई के बीच बढ़ाकर 50 फीसदी किया गया. अब सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक, जून से अगस्त 2021 के बीच इसे 75 फीसदी तक किया जाना है. इसके बाद 1 सितंबर से यह 100 फीसदी हो जाएगा.

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