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किसानों के लिए गुड न्यूज़! इथेनॉल बनाने को पराली खरीदेगी रिफाइनरी, बदले में मिलेंगे पैसे

पराली प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्‍य सरकारें कई कदम उठा रही हैं.

पराली प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्‍य सरकारें कई कदम उठा रही हैं.

रिफाइनरी को पराली देने के लिए किसानों को बेलर से पराली की गांठें बनवानी होंगी. करीब 900 करोड़ रुपये से तैयार यह प्लांट ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो महीने पहले इस इथेनॉल प्‍लांट का उद्घाटन किया था.
यह प्लांट प्रतिदिन 100 किलोलीटर इथेनॉल बनाने की क्षमता रखता है.
प्‍लांट के लिए पराली खरीदने को आसपास के जिलों के किसानों से पराली खरीदेगा.

नई दिल्‍ली. धान की पराली जलाए जाने से होने वाले प्रदूषण का सीजन आ ही चुका है. हरियाणा, पंजाब और उत्‍तर प्रदेश में कई जगहों से पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं. पराली प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्‍य सरकारें कई कदम उठा रही हैं. हरियाणा के पानीपत में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) रिफाइनरी ने पराली से इथेनॉल उत्‍पादन करने के लिए किसानों से पराली खरीदने की घोषणा की है. रिफाइनरी में पराली से इथेनॉल बनाने के लिए प्‍लांट लगाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 महीने पहले इस इथेनॉल प्‍लांट का उद्घाटन किया था.

पानीपत रिफाइनरी 172 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पराली खरीदेगी. इसे किसानों के खेतों से ही उठाया जाएगा. रिफाइनरी को पराली देने के लिए किसानों को पराली की गांठें बनवानी होंगी. करीब 900 करोड़ रुपये से तैयार यह प्लांट प्रतिदिन 100 किलोलीटर (1 किलोलीटर में 1 हजार लीटर) इथेनॉल बनाने की क्षमता रखता है. प्‍लांट के लिए पराली खरीदने को आसपास के जिलों के किसानों से पराली खरीदेगा. इसके लिए प्लांट की ओर से आसपास के जिलों में पराली कलेक्शन केंद्र स्थापित किए गए हैं.

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कितनी होगी बचत
अगर किसान खुद स्ट्रा बेलर से पराली की गांठ बनवाता है तो एक एकड़ पर करीब 2 हजार रुपये खर्च आता है. जबकि, एक एकड़ धान की पराली 3,500 तक की बिक जाती है. इस तरह किसान को प्रति एकड़ 1,500 रुपये की बचत होती है और साथ ही उसे पराली जलानी भी नहीं पड़ती. इसके साथ ही पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार भी किसान को प्रति एकड़ 1 हजार रुपये अलग से देती है. हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट में आने वाले पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों में धान की फसल की वजह से बहुत ज्यादा पराली होती है. अकेले पानीपत में ही हर साल 3.80 लाख टन पराली होती है.

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गेहू बुआई में नहीं आएगी दिक्‍कत
स्ट्रा बेलर से पराली की गांठ बनवाने पर खेत बिल्‍कुल साफ हो जाता है. इससे किसान को गेहूं की बुआई करने में कोई दिक्‍कत नहीं आती. इसका कारण है कि खेत में पराली के अवशेष नहीं बचते. किसान हैरो से जुताई करके गेहूं बो सकते हैं. साथ ही वो जीरो ड्रिल मशीन से बिना बुआई किए भी बेलर से गांठ बनाकर पराली प्रबंधनकिए गए खेत में गेहूं बुआई आसानी से कर सकते हैं.

Tags: Agriculture, Business news in hindi, Paddy Harvesting, Stubble Burning, Stubble fires

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