कोर्स करने के बाद भी कई दिनों तक नहीं मिली नौकरी, कर्ज लिया शुरू किया अपना स्टार्टअप, अब एक करोड़ का है टर्नओवर

दोस्त से पैसे उधार लेकर शुरू किया अपना बिजनस

दोस्त से पैसे उधार लेकर शुरू किया अपना बिजनस

बकौल सुधांशु जब मैं 12वीं क्लास में था तो मेरे टीचर हमेशा एक बात कहते है थे कि कभी भी जॉब सीकर (नौकरी की तलाश करने वाला) मत बनो जॉब प्रोवाइडर (नौकरी देने वाला) बनो. यह बात हमेशा से मेरे जहन में थी.

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नई दिल्ली. कहते हैं यदि आपमें काबिलियत, मेहनत और लगन है तो चाहे स्थितियां कितनी भी खराब क्यों ना हो. आखिरकार नतीजा आपके पक्ष में ही जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार (Bihar)के एक छोटे से गांव में रहने वाले सुधांशु कुमार की. जो आप अपने गांव बिहार के छोटे से जिले जमुई के बेहद सामान्य परिवार से है. आज सुधांशु युवाओं के आईकन (Ikon) है क्योंकि उनके जस्बे ने आज उन्हें जिस मुकाम पर पहुंचा दिया है वहां पहुंचने में सालों लग जाते है. सुघांशु ने भी सामान्य छात्रों की तरह कोर्स (Course) किया, जॉब (Job)ढूढ़ी काफी समय तक नहीं मिली. फिर बड़ी मुश्किल से दस हजार रुपए की नौकरी लगी, लेकिन उसके बाद की कहानी है जिसकी मिसाल आज सुधांशु को जानने वाला हर शख्स देता है. 


दरअसल सुशांधु ने 12 वीं के बाद साइबर सिक्योरिटी का कोर्स किया जिसके लिए वे पहले पटना और बाद में जयपुर भी गए. जैसा सबको उम्मीद होती है सुधांशु भी थी कि उन्हें कोर्स खत्म करने के बाद नौकरी लग जाएगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और ना ही लंबे समय तक कही नौकरी मिली. सुधांशु ने सोचा एमबीए कर लेना चाहिए और वे तैयारी में भी जुट गए. क्योंकि सुधांशु सॉफ्टवेयर की जानकारी रखते थे इसलिए एक दोस्त ने उन्हें कहा कि वे उसके लिए वेबसाइट बना दे. यही उनकी लाइफ का टर्निंग पाइंट था. आगे की पूरी कहानी जानेंगे लेकिन पहले यह जान लेते है कि आज सुधांशु 400 से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट कर चुके है तो वहीं 40 से ज्यादा सेलिब्रिटी का काम भी कर चुके हैं. अकेल शुरू किया उनका सफर आज 20 लोगों की टीम के साथ है और उनकी कंपनी का टर्नओवर एक करोड़ रुपये भी ज्यादा है. 


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पहली नौकरी दस हजार की मिली थी


सुधांशु जब एमबीए की तैयारी कर रहे थे तब उन्होंने कैट सहित दूसरे कई एग्जाम भी दिए. लेकिन कुछ खास हुआ नहीं. एक एग्जाम के लिए वे 2014-2015 में वे मुंबई गए और अपने एक रिलेटिव के यहां रुके. यहीं उन्हें फिल्म सेक्टर में काम करने वाले एक परिचित के यहां दस सुधांशु का काम फिल्म की सीडी ड्राइव को एक स्टूडियो से दूसरे में पहुंचाने का ही था. सुधांशु ने देखा कि यह काम तो ऑनलाइन भी किया जा सकता है. उन्होंने अपनी स्किल का इस्तेमाल किया और अब सारा काम ऑनलाइन ही होने लगा. कंपनी खुश हुई तो सुधांशु की सैलेरी 30 हजार रुपये कर दी गई. लेकिन सुधांशु को यह काम रास नहीं आ रहा था सैलेरी बढ़ने के बाद भी वे संतुष्ट नहीं थे इसलिए नए-नए आयडिया सोचते रहते. आगे की कहानी उनकी ही जुबानी…



टीचर कहते थे जॉब सीकर नहीं प्रोवाइड बनो 




बकौल सुधांशु जब मैं 12वीं क्लास में था तो मेरे टीचर हमेशा एक बात कहते है थे कि कभी भी जॉब सीकर (नौकरी की तलाश करने वाला) मत बनो जॉब प्रोवाइडर (नौकरी देने वाला) बनो. यह बात हमेशा से मेरे जहन में थी. मैंने साइबर सिक्योरिटी का एक कोर्स किया हुआ था 2012 में लेकिन तब उस वक्त इतनी जॉब थी नहीं तो ऐसे ही कुछ कर रहा था तब मेरे दोस्त में अप्रोच किया कि मुझे एक वेबसाइट बनवाई है. मैंने कहा मेरा एक दोस्त वेबसाइट बनाता है मैं उसको बोलता हूं. हालांकि वो वेबसाइट मैंने ही उसे बना कर दी थी जिसके लिए उसने मुझे दो हजार रुपये भी दिए थे. तब  मुझे लगा कि यह तो अच्छा काम है घर बैठे ही ऐसे भी दस प्रोजेक्ट भी मिल जाए तो अच्छा खासा पैसा कमाया जा सकता है. यहां से मुझे स्टार्टअप का आइडिया आया. मैंने डिजिटल सुकून नाम से अपनी वेबसाइट तैयार की और डिजिटल मार्केटिंग का काम शुरू कर दिया. धीरे-धीरे जब कस्टमर्स बढ़ने लगे तो नौकरी छोड़ दी. मैंने अपने एक दोस्त से पांच लाख रुपए उधार लिए और मुंबई में अपना ऑफिस खोला. जहां बड़ी-बड़ी कंपनियों के ऑफर आने लगे. कई सेलिब्रिटी ने भी अपना सोशल मीडिया हैंडल करने के लिए ऑफर किया. एक साल बाद उन्होंने ब्याज सहित अपने दोस्त का पैसा भी चुका दिया. भारत के साथ-साथ डिजिटल मार्केटिंग के लिए विदेशों से भी सुधांशु को ऑर्डर मिलते हैं. 


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जिसमें रूचि हो उसी का स्टार्टअप करो 


सुधांशु कहते हैं कि आप जो भी अपना स्टार्टअप खड़ा करना चाहते है उनके लिए आपका जिसमें इंटरेस्ट है, जिसमें जूनून है जिसमें पैशन है वहीं चीज का स्टार्टअप करे. वर्ना आप एक शुरू करेंगे, उसे बंद करेंगे फिर कुछ नया सोचेंगे. ऐसे ही चलता रहेगा. युवा जनरेशन को सलाह देने के सवाल पर वे कहते है कि मैं मानता हूं मैं बोहत छोटा हूं किसी को सलाह देने के लिए क्योंकि मेरी इतनी स्किल उतनी नहीं मानता और देश के नौजवान बेहद स्मार्ट है. हा पर मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि बेहतर प्लानिंग ही सक्सेस तक पहुंचा सकता है और इसके साथ ही आपका जूनून और इंटरेस्ट भी जरूरी है. किसी भी स्टार्टअप के लिए. 

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