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जब महिला होने की वजह से नहीं मिली नौकरी! तो उन्होंने अपने दम पर खड़ी की 35 हजार करोड़ की कंपनी

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Updated: January 18, 2020, 5:54 PM IST
जब महिला होने की वजह से नहीं मिली नौकरी! तो उन्होंने अपने दम पर खड़ी की 35 हजार करोड़ की कंपनी
बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ

किरण मजूमदार को फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में भी शामिल किया है. लेकिन, एक व​क्त ऐसा था जब उन्होंने कई कंपनियों ने नौकरी तक देने से मान कर दिया था. आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने किरण मजूमदार शॉ को सर्वोच्च ना​गरिकता अवार्ड से सम्मानित किया है.

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  • Last Updated: January 18, 2020, 5:54 PM IST
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नई दिल्ली. बायोकॉन (Biocon) की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ (Kiram Mazumdar Shaw) को ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सर्वोच्च नागरिकता अवॉर्ड से सम्मानित किया है. भारत में ऑस्ट्रेलिया उच्चायुक्त ने इस बार में जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि किरण मजूमदार शॉ ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते को पहले से और अधिक बेहतर करने में अहम भूमिका निभाई है. देश के सबसे बड़े बायो फार्मा कंपनी की संस्थापक किरण मजूमदार फेडरेशन यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर चुकी हैं. आपको ये जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने 35 हजार करोड़ रुपये की कंपनी की शुरुआत कभी 1200 रुपये से की थी.

आइए जानें उनकी कहानी के बारे में...

1200 रुपये से शुरू किया था कारोबार
किरण मजूमदार को फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में भी शामिल किया है. लेकिन, एक व​क्त ऐसा था जब उन्होंने कई कंपनियों ने नौकरी तक देने से मान कर दिया था. महिला होने की वजह से कई कंपनियों की बर्ताव के बाद उन्होंने बस 1200 रुपये लगातार खुद का कारोबार शुरू किया था, जो वर्तमान में करीब 37 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की कंपनी बन चुकी है.

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 25 साल की उम्र में स्कॉटलैंड में मिली पहली नौकरी
किरण मजूमदार का जन्म बेंगलुरु के एक मध्यमर्वीय परिवार में हुआ था. 1978 में जब वो ऑस्ट्रेलिया से शराब बनाने की प्रक्रिया में मास्टर्स की डिग्री लेकर भारत लौंटी तो भारत के कई बीयर उत्पादकों ने उन्हें महिला होने की वजह से नौकरी देने से मान कर दिया था. इस समय वो सिर्फ 25 साल की थीं. भारत में नौकरी नहीं मिलने की वजह से वो स्कॉटलैंड चली गईं. वहां उन्होंने ब्रूवर की नौकरी की. यहीं उनकी किस्मत बदली और बायोकॉन की स्थापना की राह खुली.

ऐसे शुरू हुई बायोकॉन
स्कॉटलैंड में ही काम करते हुए उनकी मुलाकात आइरिश उद्यमी लेस्ली औचिनक्लॉस से हुई. उस दौरान लेस्ली भारत में फार्मा सेक्टर में कोई कारोबार शुरू करना चाहते हैं. किरण के काम से प्रभावित होने की वजह से उन्होंने उन्हें भारत में कारोबार को संभालने का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, कोई अनुभव नहीं होने की वजह से शुरुआत में थोड़ी हिचक दिखाई. इसके बावजूद लेस्ली नहीं मानीं और उन्होंने किरण को कारोबार संभालने के लिए मना ही लिया। इस तरह 1978 में बायोकॉन अस्तित्व में आई.

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First published: January 18, 2020, 4:44 PM IST
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