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Success Story : शतरंज के जुनून के लिए पढ़ाई छोड़ी, इसी जुनून से लॉकडाउन में खड़ी कर दी एक बिलियन डॉलर की कंपनी

महज दस साल में ही कामथ ने जिरोधा को बना दिया यूनिकॉर्न
महज दस साल में ही कामथ ने जिरोधा को बना दिया यूनिकॉर्न

एक बिलियन डॉलर यानी साढ़े सात हजार करोड़ रुपए का बिजनेस खड़ा करने वाले जिरोधा ब्रोकरेज फर्म के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामथ से न्यूज18 हिंदी ने जानी उनकी कामयाबी की कहानी...

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 12:49 PM IST
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कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली
ऐसा माना जाता है कि ज्यादातर बड़े स्टार्टअप बड़े बिजनेस स्कूलों और आईआईटी जैसे टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट से निकले छात्र खड़ा करते हैं। लेकिन इन्हीं में से एक अपवाद नितिन कामथ का भी है। शतरंज के जुनून के लिए महज 9वीं में पढ़ाई छोड़ दी। शतरंज में मुकाम पाया लेकिन कुछ और बड़ा करने के लिए दस साल पहले शेयर बाजार में उतर गए।  जिरोधा ब्रोकरेज फर्म के को-फाउंडर और सीईओ के रूप में स्टार्टअप शुरू किया। लॉकडाउन में जब सारे बिजनेस बंद थे, तब जिरोधा ऊंचाईयों के नए मुकाम हासिल कर रहा था। तब यह एक अरब डॉलर (करीब 7400 करोड़ रुपए) की वैल्यूएशन हासिल करने वाला यूनिकॉर्न बन गया है। यही नहीं आज जिरोधा ने तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़ 15 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी भी हासिल कर ली है। न्यूज18 हिंदी ने नितिन कामथ से जानी उनकी कामयाबी की कहानी...
सवाल : जिरोधा शुरू करने का ख्याल कैसे आया?
जवाब : शेयर बाजार मेरा पसंदीदा कारोबार रहा है। इसके पीछे की वजह फैमिली बैकग्राउंड है। शुरुआती मकसद उस ब्रोकरेज को बचाना था, जो हम भर रहे थे। शेयर बाजार की सबसे खास बात ये है कि इसके लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती। बतौर ट्रेडर किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। शेयर बाजार में कारोबार के लिए बहुत बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती।
सवाल : लेकिन आपने फार्मल एजुकेशन भी नहीं ली थी। क्या इसकी वजह से दिक्कत नहीं आई?
जवाब : फॉर्मल एजुकेशन की कमी मेरे लिए कमजोरी नहीं बनी, बल्कि शतरंज ने शेयर बाजार में काफी मदद की। दरअसल, बचपन में ही मुझे शतरंज का शौक लग गया था। जल्द ही मैं प्रोफेशनल शतरंज खेलने लगा। साल 2002 में अंडर-16 लेवल इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। चूंकि पढ़ाई शतरंज में कैरियर बनाने के लिए छोड़ी थी, इसलिए मेरे बैंक अधिकारी पिता और मां ने कोई शिकायत नहीं की। लेकिन मैं यह नहीं कहता हूं कि फॉर्मल एजुकेशन का कोई महत्व नहीं है। इसलिए स्कूल छोड़ने से मुझमें यह बदलाव आया कि अब मैं उन विषयों के बारे में अधिक पढ़ने लगा था, जिसमें मेरा मन लगता था। अपने दोस्तों को स्कूल जाता देख मुझे भी पढ़ने की इच्छा करती थी और शायद इस वजह से मैंने बहुत सी किताबें पढ़ डालीं। शतरंज खेलते-खेलते ही बहुत कम उम्र में मैंने और नितिन ने शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे हमारा ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत बढ़ गया और हमने मससूस किया कि हम बहुत ज्यादा ब्रोकरेज दे रहे हैं। और यहीं से जिरोधा शुरू करने के विचार ने जन्म लिया।
सवाल : शतरंज ने शेयर बाजार के कारोबार में कैसे मदद की?


जवाब : शतरंज के खेल और शेयर बाजार में बहुत सारी चीजें समान हैं। मुझे लगता है कि शतरंज का एक अच्छा खिलाड़ी होने के कारण ही मैं शेयर बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन कर सका। शतरंज में इंटेलिजेंस से ज्यादा मेमोरी पॉवर जरूरी होती है। आपको गेम याद रखना होता है। प्रिंसिपल फॉलो करने होते हैं। शेयर बाजार में भी ऐसा ही होता है।

सवाल : जिरोधा नाम कैसे रखा?
जवाब : जिरोधा दो शब्दों जीरो यानी शून्य और संस्कृत शब्द रोधा से मिलकर बना रहा है। रोधा का मतलब बाधा है। यानी कि हम शून्य और बाधा दोनों से ही ऊपर उठने की खेल भावना से प्रेरित हैं।

सवाल : कंपनी के लिए फंडिंग और अन्य दिक्कतें कैसे सुलझाईं?
जवाब : ऑनलाइन प्लेटफार्म की वजह से फंडिंग का ज्यादा इशु नहीं रहा। इसकी वजह से हमारी लागत कम थी। हमारा फोकस हमारे ग्राहक हैं। उनके भरोसे की वजह से ही अन्य दिक्कतों का समाधान होता गया।

सवाल : लॉकडाउन में ब्रोकरेज कंपनियों का बिजनेस बढ़ गया था? आपने इसके लिए क्या तैयारियां की थीं?
जवाब : ऑनलाइन प्लेटफॉर्म था, इसलिए दिक्कत नहीं आई। हमारी टीम ने इस कठिन समय में जमकर मेहनत की। ग्राहकों को विश्वास दिलाया कि जब शेयर मार्केट सबसे निचले स्तर पर हो तब खरीदारी करना अच्छा होता है।

सवाल : कोरोना संकट में अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की कितनी भरपाई संभव है। आर्थिक परिदृश्य कब तक बेहतर हो सकेगा?
जवाब : शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो नुकसान की भरपाई तेजी से हुई है। अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को देखे तो तेज रिकवरी चल रही है। अनलॉक के बाद स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसा लगता है कि जीडीपी में ग्रोथ जल्द ही आ जाएगी।

सवाल : ओलरऑल भारतीय शेयर बाजार के ग्रोथ को आप कैसे देखते हैं?
जवाब : ग्रोथ के हिसाब से शेयर बाजार अच्छा रिटर्न दे रहे हैं। लेकिन अमेरिका की तुलना में यह अभी भी कम है। क्योंकि हमारे यहां वित्तीय शिक्षा का अभाव है। इंटरनेट के जमाने में लोग जागरूक हो रहे हैं, इसलिए मार्केट में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ रही है।

सवाल : मार्केट में इतनी तेज रिकवरी के बाद तमाम विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ये बबल है। क्या मार्केट में कररेक्शन की संभावना है। अगर है तो कितनी ?
जवाब : शेयर मार्केट में निसंदेह बबल है। इसकी तेजी की तीन मुख्य वजह हैं। पहली, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार में जमकर निवेश करना। दूसरी, कोरोना की वजह से लोगों की बचत बढ़ी है। तीसरी, बैंक की एफडी में ब्याज दर काफी गिर गई हैं। रिटेल निवेशक ऐसा कर तो रहें है लेकिन उन्हें ध्यान रखना होगा कि इससे शेयरों की वैल्यूएशन मार्केट के हिसाब से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में करेक्शन की संभावना बहुत बढ़ गई है। हालांकि फिलहाल छोटा करेक्शन का दौर जल्द ही आ सकता है। इसे रिटेल निवेशकों को नुकसान हो सकता है। उन्हें संभलकर निवेश करना चाहिए।

सवाल : अब कई आईपीओ आ रहे हैं? लेकिन क्या मौजूदा वक्त में आईपीओ में निवेश करना बेहतर होगा?
जवाब : आईपीओ में निवेश कभी भी सेकेंडरी मार्केट के मुकाबले अच्छा नहीं रहा है। कंपनियां आईपीओ अपनी पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए लाती है। उनके लिए यह ठीक है लेकिन रिटेल निवेशकों को इससे ज्यादा कुछ हासिल नहीं होता है। इसलिए मैं आइपीओ के लिए कभी उत्साहित नहीं रहता हूंं।
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