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IPO से 500 कर्मचारियों को करोड़पति बनाने वाली भारतीय कंपनी आखिर करती क्या है, कैसे आया आइडिया?

फ्रैशवर्क्स आज जिस ऊंचाई पर है, वहां आज से पहले कोई भारतीय SaaS कंपनी नहीं पहंच पाई.

फ्रैशवर्क्स आज जिस ऊंचाई पर है, वहां आज से पहले कोई भारतीय SaaS कंपनी नहीं पहंच पाई.

फ्रैशवर्क्स पहली भारतीय SaaS कंपनी है जोकि अमेरिकी शेयर बाजार Nasdaq में लिस्ट हुई है. लिस्टिंग के साथ ही कंपनी के 500 कर्मचारी करोड़पति बन गए. जानिए इस कंपनी की पूरी कहानी.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. आजकल फ्रैशवर्क्स (Freshworks) कंपनी की बड़ी चर्चा है. चर्चा हो भी क्यों न! आखिर ये सॉफ्टवेयर बनाने वाली भारत की पहली ऐसी कंपनी है, जो नैस्डेक (NASDAQ) पर लिस्ट हुई है. नैस्डेक अमेरिकी शेयर बाजार के एक सूचकांक का नाम है, जैसे भारत में निफ्टी (Nifty) है. इसी बुधवार (22 नबम्बर) को फ्रैशवर्क्स की नैस्डेक पर धमाकेदार लिस्टिंग हुई. इसका शेयर ऑफरिंग प्राइस 36 डॉलर से 21% ऊपर खुला और इन्वेस्ट करने वालों की चांदी हो गई. फिलहाल कंपनी की वेल्यू या कहें कि मार्केट कैप 12.2 बिलियन डॉलर हो गई है. 12.2 बिलियन डॉलर को यदि रुपयों में लिखा जाए तो होगा – 8 खरब 99 अरब 13 करोड़ 39 लाख रुपये (₹8,99,13,39,00,000). कंपनी ने अपने कर्मचारियों को भी शेयर्स दिए थे तो कंपनी के 500 कर्मचारी करोड़पति बन गए हैं, जिनकी उम्र 30 साल से कम ही है.

आज हम आपको इस कंपनी के बारे में पूरा बताने वाले हैं, जैसे कि ये कंपनी करती क्या है और इसे शुरू किसने किया और इसका आइडिया कैसे आया. तो पहले ये जान लीजिए कि इस कंपनी का मुख्य काम क्या है.

क्या काम करती है फ्रैशवर्क्स

ये एक सॉफ्टवेयर-ऐज-ए-सर्विस (Software-as-a-service) (Saas) कंपनी है. इसकी शुरुआत 2010 में फ्रैशडेस्क (FreshDesk) से हुई थी. शुरू में कंपनी हेल्प डेस्क की तरह काम करती थी. बाद में कई अन्य तरह की सर्विसेज भी दी गई. फिलहाल फ्रैशवर्क्स दूसरी कंपनियों को एआई (Artificial Intelligence) आधारित कस्टमर सर्विस, सेल्स एंड मार्केटिंग ऑटोमेशन, आईटी (IT) सर्विस मैनेजमेंट और एचआर (HR) मैनेजमेंट सर्विस उपलब्ध कराती है.

ग्राहकों की संतुष्टि है सर्वोच्च

किसी भी बिजनेस को चलाने के लिए ग्राहकों की आवश्यकता होती है. हर कंपनी चाहती है कि उसके साथ जो ग्राहक जुड़ें वे हमेशा के लिए हों. ऐसा तभी संभव है जब ग्राहक को उसके हर सवाल का संतोषजक जवाब तुरंत मिल जाए. यदि ग्राहकों को अपनी समस्याओं के लिए भटकना पड़ेगा तो वे ग्राहक कंपनी से दूर हो जाएंगे. इसलिए हर कंपनी में ऐसा डेस्क जरूर होता है जो ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करता है. इसे कस्टमर सर्विस कहा जाता है. फ्रैशवर्क्स भी दूसरी कंपनियों को हेल्प डेस्क या कस्टमर सर्विस उपलब्ध कराती है.

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तो फ्रैशवर्क्स ने क्या खास किया?

अब सवाल ये हो सकता है कि ये काम तो बहुत सारी कंपनियां करती हैं, तो फिर फ्रैशवर्क्स ने ऐसा क्या किया कि वह दूसरों से अलग और इतनी बड़ी कंपनी बन गई. दूसरी कंपनियां अपने कस्टमर्स के लिए शिकायत करने का एक प्लेटफॉर्म बनाती हैं, जहां पर लोग अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. लेकिन कई बार होता है कि कस्टमर को समस्या का हल पाने के लिए बार-बार ई-मेल, फोन या मैसेज करने पड़ते हैं. हर बार कोई नया कस्टमर केयर अधिकारी आता है और कस्टमर को फिर से अपनी प्रॉब्लम उसे बतानी पड़ती है. यह पूरी प्रक्रिया काफी थकाऊ है और कस्टमर ऊब जाते हैं, परेशान होकर कंपनी के इसी रवैये के बारे में सोशल मीडिया पर लिखते हैं.

फ्रैशवर्क्स ने कंपनी से जुड़े तमाम प्लेटफॉर्म्स को एक जगह पर ला दिया. सारी शिकायतें, फिर चाहे वो ई-मेल से आई हों, मैसेज से, फोन से या फिर सोशल मीडिया के जरिए, एक ही जगह पर उपलब्ध रहती हैं. उन पर किस कस्टमर केयर अधिकारी ने क्या एक्शन लिया, उसका भी ब्यौरा रहता है. इसके दो फायदे हैं. पहला ये कि कोई भी शिकायतकर्ता छूटता नहीं, सबकी प्रॉब्लम कंपनी के पास पहुंचती है और दूसरा ये कि सब शिकायतें समय रहते हल हो जाती हैं. बस, कस्टमर को यही तो चाहिए और फ्रैशवर्क्स ने एक थकाऊ प्रक्रिया को बदलकर नई और आसान प्रक्रिया मुहैया करवा दी.

कैसे आया इतना शानदार आइडिया

पहले आपको ये बता दें कि इस कंपनी को लगभग एक दशक पहले 2010 में शुरू किया गया था. कंपनी के फाउंडर हैं गिरीश मात्रुबूदम (Girish Mathrubootham) और शान कृष्णासामी (Shan Krishnasamy). ये दोनों पहले ज़ोहो कॉर्प (Zoho Corp) के साथ कम कर चुके हैं. ज़ोहो कॉर्प भी भारत में एक बड़ी SaaS कंपनी है. फिलहाल ज़ोहो और फ्रैशवर्क्स इस इंडस्ट्री के दो बड़े खिलाड़ी हैं और कह सकते हैं कि दुश्मन भी हैं. दुश्मनी की कहानी बाद में बताते हैं, पहले ये जान लीजिए कि ये आइडिया कैसे आया.

गिरीश मात्रुबूदम ने खुद एक इंटरव्यू में इसके बारे में बताया. 2009 की बात है, जब गिरीश ऑस्टन टेक्सॉस से काम करते थे. गिरीश अमेरिका से अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर चेन्नई (भारत) में शिफ्ट हो रहे थे. वह अपने घर का पूरा सामान भी भारत ला रहे थे. गिरीश तो चेन्नई पहुंच गए, मगर उनका सामान पहुंचने में ढाई महीने लग गए. उनके सामान में एक 40 ईंच का एलसीडी टीवी भी था. जब उन्होंने सामान देखा तो वह टीवी टूट चुका था. उनके पास टीवी का इंश्योरेंस था तो उन्हें लगा कि वे कंपनी को फोन करेंगे और इंश्योरेंस के पैसे उन्हें मिल जाएंगे. गिरीश ने ई-मेल लिखे और न जाने हर तरह से कंपनी से संपर्क किया, जिसमें की लगभग 5 महीने बीत गए, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं मिला.

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गिरीश खुद कहते हैं कि वह बहुत परेशान हो गए थे और अब मसला पैसे का नहीं रह गया था, अब वे बदला लेना चाहते थे. उन्होंने अपनी ये पूरी कहानी एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म R2IClub फोरम पर डाल दी. इस फोरम पर एक देश से दूसरे देश में शिफ्ट होने वाले लोग अपने अनुभव शेयर करते हैं. जैसे ही गिरीश ने अपनी प्रॉब्लम इस फोरम पर डाली, लोग आने लगे और चर्चा होने लगी. अगले ही दिन टीवी बनाने वाली कंपनी के प्रेसीडेंट आए और गिरीश को हुई परेशानी के लिए माफी मांगी और उनको उनके पैसे दिला दिए गए. इस तरह उनके दिमाग में ये आइडिया आया. उन्हें लगा कि उनकी तरह बहुत सारे ग्राहक हर रोज परेशान होते होंगे. कंपनियों की परेशानी है कि उन तक हर कस्टमर की आवाज पहुंचती नहीं. यदि कंपनी को सभी ग्राहकों की समस्या एक ही जगह मिल जाए तो वे उन्हें अच्छा अनुभव दे सकती हैं. तो उन्होंने अपनी कंपनी बनाई और कंपनी ने जबरदस्त सॉफ्टवेयर बनाए.

ज़ोहो और फ्रैशवर्क्स के दुश्मनी

ज़ोहो (जिसमें गिरीश पहले काम करते थे) ने फ्रैशवर्क्स पर संगीन आरोप लगाए हैं. 2020 में ये दुश्मनी और भी गहरी हो गई, जब ज़ोहो ने एक कानूनी केस फाइल कर दिया. ज़ोहो का कहना है कि फ्रैशवर्क्स ने उनकी गोपनीय जानकारियां (कॉन्फिडेंशियल इन्फोर्मेशन्स) चुराई हैं और उसी से अपना बिजनेस खड़ा किया है. यही नहीं ज़ोहो ने ये आरोप भी लगाया है कि फ्रैशवर्क्स ने उनके कर्मचारियों और ग्राहकों तक को अवैध तरीके से अपना बनाया है. हालांकि फ्रैशवर्क्स हमेशा से इन आरोपों को नकारती रही है. मामला अभी चल रहा है.

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