टाटा जिन स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं, उसके पीछे इस नौजवान का है दिमाग

पिता के कहने पर शांतनु ने टाटा को लिखे थे पत्र, फिर मुलाकात के लिए बुलाया.

पिता के कहने पर शांतनु ने टाटा को लिखे थे पत्र, फिर मुलाकात के लिए बुलाया.

दिग्गज बिजनेस लीडर और टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के पर्सनल निवेश का काम संभालते हैं 28 साल के शांतनु नायडू. उनका काम रतन टाटा को स्टार्टअप निवेश में मदद के साथ एग्जिक्यूटिव असिस्टेंस देना है.

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  • Last Updated: February 17, 2021, 9:36 AM IST
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नई दिल्ली. दिग्गज बिजनेस लीडर और टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा अपने पर्सनल निवेश जिन स्टार्टअप्स में करते हैं, उनके पीछे 28 साल के एक नौजवान का दिमाग है. इनका नाम है शांतनु नायडू.

शांतनु टाटा के ओला, पेटीएम, स्नैपडील जैसे 30 से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश का पूरा काम संभालते हैं. उनका काम रतन टाटा को स्टार्टअप निवेश में मदद के साथ एग्जिक्यूटिव असिस्टेंस देना है. इतनी कम उम्र में टाटा के साथ जुड़ने की बड़ी ही दिलचस्प कहानी है. शांतनु टाटा के साथ जुड़ने से 2014 में पुणे की टाटा एलेक्सी में ऑटोमोबाइल इंजीनियर थे.

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कुत्तों से लगाव की वजह से आए टाटा की नजर में


शांतनु बताते हैं कि रास्ते में गाड़ियों की तेज रफ्तार की चपेट में आकर बहुत से कुत्तों को मरते देखा. यह बेहद पीड़ादायक था. पता चला कि समय रहते ड्राइवर कुत्तों को नहीं देख पाते हैं, यह दुर्घटनाओं का बड़ा कारण था. इससे शांतनु को कुत्तों के लिए एक कॉलर रिफलेक्टर बनाने का आइडिया आया. कुछ प्रयोग के बाद मेटापॉज नाम से कॉलर बना दी. इससे ड्राइवर रात में स्ट्रीट लाइट के बगैर भी कुत्तों को दूर से देख सकते थे. अब स्ट्रीट डॉग्स की जान बच रही थी. इस छोटे से लेकिन महत्वपूर्ण काम के बारे में टाटा समूह की कंपनियों के न्यूजलेटर में लिखा गया. रतन टाटा की इस पर नजर पड़ी, जो खुद भी कुत्तों से काफी लगाव रखते हैं.

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पिता के कहने पर टाटा को लिखा पत्र और आ गया बुलावा


पिता के कहने पर शांतनु ने एक दिन टाटा काे पत्र लिख दिया. फिर उन्हें रतन टाटा से मिलने का न्योता मिला. शांतनु अपने परिवार की पांचवी पीढ़ी है, जो टाटा ग्रुप में काम कर रही है. लेकिन कभी टाटा से मिलने का मौका नहीं मिला. मुलाकात में टाटा ने स्ट्रीट डॉग्स प्राजेक्ट की मदद के लिए पूछा लेकिन शांतनु ने मना कर दिया. टाटा ने जोर दिया और एक अघोषित निवेश किया. रतन टाटा के पैसा लगाने के बाद मोटोपॉज की पहुंच देश के 11 अलग-अलग शहरों तक हो गई है. इसी बहाने टाटा से लगातार मुलाकात होती रही.

और फिर 2018 में मिला टाटा के ऑफिस ज्वाइन करने का न्यौता

एक दिन शांतनु ने रतन टाटा को कॉर्नेल में एमबीए करने की बात बताई. कॉर्नेल में एडमिशन भी मिल गया. एमबीए के दौरान पूरा ध्यान उद्यमिता, निवेश, नए स्टार्टअप के साथ-साथ क्रेडिबल स्टार्टअप्स की खोज, इंटरेस्टिंग बिजनेस आइडियाज और मुख्य इंडस्ट्री ट्रेंड्स खोजने पर था. कोर्स खत्म करने के बाद साल 2018 में टाटा की ओर से अपना ऑफिस जॉइन करने का न्यौता आ गया. शांतनु कहते हैं कि उनके साथ काम करना सम्मान की बात है. इस तरह का मौका जिंदगी में एक ही बार मिलता है. उनके साथ रहकर हर मिनट कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है. कभी जेनरेशन गैप जैसी बात महसूस नहीं की.वह आपको कभी यह महसूस नहीं होने देते कि आप रतन टाटा के साथ काम कर रहे हैं.

स्टार्टअप्स को भी मिलता है टाटा के अनुभव का फायदा

81 साल के रतन टाटा का देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में गहरा विश्वास है. जून 2016 में रतन टाटा की प्राइवेट इनवेस्टमेंट कंपनी आरएनटी असोसिएट्स और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ऑफ द रीजेंट्स ने भारत में यूसी-आरएनटी फंड्स' के रूप में नए स्टार्टअप, नई कंपनियों और अन्य उद्यमों को फंड देने के लिए हाथ मिलाया था. हालांकि, रतन टाटा के ज्यादातर निवेशों की रकम के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन जो भी स्टार्टअप उन्हें अपने साथ लाने में सफल होते हैं, उन्हें वित्तीय मदद से हटकर रतन टाटा के अनुभव का खजाना मिल जाता है.
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